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Ghazipur News: स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाकर सरजू पांडेय ने जिले में बजाया था आजादी का डंका
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कासिमाबाद। स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभा कर जिले में आजादी का डंका बजाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्व सांसद कामरेड सरजू पांडेय की 105वीं जयंती मंगलवार को मनाई जाएगी। 19 नवंबर 1917 को कासिमाबाद विकासखंड के अति पिछड़े गांव उरहा एवं परिवार में जन्म लेने वाले सरजू पांडेय ने देश और समाज में बराबरी के लिए कई लड़ाइयां लड़ीं। उनकी जयंती पर सरजू पांडेय पार्क में स्मृति सभा का आयोजन किया गया है।
सर्वप्रथम स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाकर सैकड़ों साथियों के साथ 15 अगस्त 1942 को कासिमाबाद थाने की पूरी तरह से घेराबंदी करते हुए आग के हवाले कर दिया था। तिरंगा लहराकर अंग्रेजी हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था । यही नहीं सरजू पांडेय ने अपने सैकड़ों क्रांतिकारी साथियों के साथ थाने पर तिरंगा लहराकर आजादी का जश्न मनाया। इसी प्रकार उन्होंने बलिया जिले के छिछोर गांव जो अब मऊ जिले का हिस्सा है जमींदार रामकुवंर सिंह के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई करते हुए एक इतिहास रचा था। इस आंदोलन के दौरान महिलाओं, बच्चों सहित कुल 6 लोगों को आंदोलनकारियों ने मौत के घाट उतार दिया था। उस समय के लोग छिछोर कांड को आज भी याद कर सिहर जाते हैं। ऐसे ही लड़ाई पाली गांव के जमींदार राजा राय के खिलाफ उन्होंने लड़ी थी। आंदोलन ऐसा चला कि राजा राय की पूरी भूमि पर गरीबों का कब्जा हो गया।
1957 में लोकसभा के साथ विधानसभा का भी दिया दया था टिकट
सरजू पांडेय के बढ़ते जनाधार को देखकर कम्युनिस्ट पार्टी ने नव सृजित लोकसभा क्षेत्र रसड़ा से 1957 में लोकसभा के साथ विधानसभा का टिकट दे दिया। उन्होंने पूरे गर्मजोशी के साथ चुनाव लड़ा और दोनों चुनाव जीतकर पूरे देश में एक ख्यातिलब्ध नेता के रूप में उभर कर सामने आए। इसके बाद सरजू पांडेय गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से 1962, 1967 और 1971 का लोकसभा चुनाव लगातार जीतते रहे। 1978 से 1989 तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहकर गरीबों-मजदूरों की आवाज सदन में उठाते रहे। आज सरजू पांडेय हम लोगों के बीच भले ही नहीं हैं लेकिन उनके संघर्षों को लोग आज भी याद करते हैं। खेद है कि इस महान नेता को सरकार तो भूल ही गई है जिले के लोग भी भूलते जा रहे हैं। जिस पार्टी से उन्होंने चार बार सांसद और एक बार विधान परिषद में रहने का गौरव प्राप्त किया उस पार्टी का जनाधार भी अब कमजोर पड़ गया है। ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की जयंती के साथ पुण्यतिथि को सरकार की तरफ से मनाया जाना चाहिए।
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सर्वप्रथम स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाकर सैकड़ों साथियों के साथ 15 अगस्त 1942 को कासिमाबाद थाने की पूरी तरह से घेराबंदी करते हुए आग के हवाले कर दिया था। तिरंगा लहराकर अंग्रेजी हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था । यही नहीं सरजू पांडेय ने अपने सैकड़ों क्रांतिकारी साथियों के साथ थाने पर तिरंगा लहराकर आजादी का जश्न मनाया। इसी प्रकार उन्होंने बलिया जिले के छिछोर गांव जो अब मऊ जिले का हिस्सा है जमींदार रामकुवंर सिंह के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई करते हुए एक इतिहास रचा था। इस आंदोलन के दौरान महिलाओं, बच्चों सहित कुल 6 लोगों को आंदोलनकारियों ने मौत के घाट उतार दिया था। उस समय के लोग छिछोर कांड को आज भी याद कर सिहर जाते हैं। ऐसे ही लड़ाई पाली गांव के जमींदार राजा राय के खिलाफ उन्होंने लड़ी थी। आंदोलन ऐसा चला कि राजा राय की पूरी भूमि पर गरीबों का कब्जा हो गया।
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1957 में लोकसभा के साथ विधानसभा का भी दिया दया था टिकट
सरजू पांडेय के बढ़ते जनाधार को देखकर कम्युनिस्ट पार्टी ने नव सृजित लोकसभा क्षेत्र रसड़ा से 1957 में लोकसभा के साथ विधानसभा का टिकट दे दिया। उन्होंने पूरे गर्मजोशी के साथ चुनाव लड़ा और दोनों चुनाव जीतकर पूरे देश में एक ख्यातिलब्ध नेता के रूप में उभर कर सामने आए। इसके बाद सरजू पांडेय गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से 1962, 1967 और 1971 का लोकसभा चुनाव लगातार जीतते रहे। 1978 से 1989 तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहकर गरीबों-मजदूरों की आवाज सदन में उठाते रहे। आज सरजू पांडेय हम लोगों के बीच भले ही नहीं हैं लेकिन उनके संघर्षों को लोग आज भी याद करते हैं। खेद है कि इस महान नेता को सरकार तो भूल ही गई है जिले के लोग भी भूलते जा रहे हैं। जिस पार्टी से उन्होंने चार बार सांसद और एक बार विधान परिषद में रहने का गौरव प्राप्त किया उस पार्टी का जनाधार भी अब कमजोर पड़ गया है। ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की जयंती के साथ पुण्यतिथि को सरकार की तरफ से मनाया जाना चाहिए।
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