संकट मोचन संगीत समारोह: काशी की कई पीढ़ियां संगीतमयी निशा पर मुग्ध, लोग रात भर खड़े होकर करते थे रिकॉर्डिंग
संकट मोचन संगीत समारोह को लेकर बनारस के लोगों का यह उल्लास, उत्साह और आनंद नया नहीं है। यह दशकों पुराना है। इस राग उत्सव का रस चखने को अधीर रहते हैं।
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काशी की कई पीढ़ियां संकट मोचन संगीत समारोह की संगीतमयी निशा पर मुग्ध हुई हैं। हर सुर को जी-भर जिया है। एक सदी का सफर तय कर चुका संकट मोचन संगीत समारोह आयोजन भर नहीं रहा। अब यह काशी का उत्सव बन चुका है। ऐसी सुरमयी मुहब्बत, जिसने साल-दर-साल अपने चाहने वालों से राब्ता और गहरा किया है। बरस भर लोग दिन गिनते हैं। इस राग उत्सव का रस चखने को अधीर रहते हैं।
संकट मोचन संगीत समारोह को लेकर बनारस के लोगों का यह उल्लास, उत्साह और आनंद नया नहीं है। यह दशकों पुराना है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब कलाकार अपने कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग करने से मना करते थे, तब समारोह स्थल के आसपास सारी रात लोग टेप रिकॉर्डर लेकर खड़े रहते। समारोह के हर सुर, लय और ताल के साथ मंच के कार्यक्रम को रिकॉर्ड करते।
घंटों तक बिना किसी हलचल के ये प्रेमी मानो संगीत लहरियों में बुत बनकर बह जाया करते थे। संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र बताते हैं कि पंडित जसराज, पंडित रविशंकर जैसे दिग्गज कलाकार अपने कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग करने पर आपत्ति जताते थे। कई बार ऑल इंडिया रेडियो को भी कलाकारों ने अपने कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग करने से मना किया। लेकिन, इस समारोह के प्रति लोगों की मुग्धता का पैमाना ही कुछ ऐसा था कि उस समय के साधकों से जितना अपने पास सहेजा जा सकता था, लोगों ने सहेजकर रखा।
2020 में शुरू हुआ था डिजिटल संस्करण
अब 20-22 लाख जुड़ते हैं ऑनलाइन
आज ये समारोह वैश्विक हो चुका है। हनुमत दरबार में हाजिरी लगाने वालों और समारोह का चाहने वालों के अनुरोध आते हैं, इसका ऑनलाइन प्रसारण कराया जाए। अब तो इस समारोह से 20-22 लाख लोग ऑनलाइन जुड़ते हैं।
पहली बार होगा सात दिवसीय संगीत समारोह
संकट मोचन संगीत समारोह शताब्दी वर्ष में पहली बार सात दिनों का होगा। 10 से 16 अप्रैल तक सात दिन में 58 कार्यक्रमों में 180 कलाकार प्रस्तुति देंगे। इसमें जयपुर के उस्ताद मोइनुद्दीन खान और उस्ताद अकरम खान का सारंगी और तबला वादन भी लोगों को सुनने को मिलेगा। कोलकाता से बिलाल खान तबला वादन, गजल गायक तलत अजीज, संतूर में कोलकाता से तरुण भट्टाचार्य के साथ ही उस्ताद राशिद खान की गायिकी भी होगी। अंतिम दिन 16 अप्रैल को सोनू निगम अपनी टीम के साथ प्रस्तुति देंगे। इसके पहले 14 को भजन सम्राट अनूप जलोटा भी मौजूद रहेंगे।