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रिक्त पदों पर होगा सेवानिवृत्त अध्यापकों का पूल टीचर के रूप में चयन

Sun, 07 Jun 2020 10:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2020 10:21 PM IST
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Retired teachers will be selected as pool teachers on vacant posts
गाजीपुर। जिले के राजकीय और एडेड माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पदों पर सेवानिवृत्त सहायक अध्यापकों एवं प्रवक्ताओं का पूल टीचर के रूप में चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इनकी काउंसंलिंग 19 एव 20 जून को जिला मुख्यालय पर दिन में 11 बजे से होगी। इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक डा. ओपी राय का निर्देश सभी प्रधानाचार्यों को प्राप्त हो चुका है।
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पूल टीचरों को मानदेय पर शिक्षण कार्य के लिए रखा जाएगा। पूल टीचर के रूप में उन्हींसेवानिवृत्त शिक्षकों का चयन किया जाएगा जिन्होंने 70 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कियाहै। ऐसे टीचरों का चयन उन पदों पर किया जाएगा जो किसी शिक्षक के छह माह से अधिक समय के लिए अवकाश पर जाने से रिक्त हुआ है अथवा शिक्षक के आकस्मिक निधन अथवा सेवाच्युत किए जाने से रिक्त हुआ है अथवा यह पद पहले से रिक्त है। जिला विद्यालय निरीक्षक डा. राय ने पूल टीचरों के चयन के लिए 19 एवं 20 जून की तिथि काउंसलिंग के लिए निर्धारित की है। पहले दिन सहायक अध्यापकों की और दूसरे दिन प्रवक्ताओं की काउंसिलिंग की जाएगी। काउंसलिंग करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति के अध्यक्ष वित्त एवं लेखाधिकारी दीपक कुमार सिंह होंगे। समिति के अन्य सदस्यों मेंराजकीय सिटी इंटर कालेज के प्रधानाचार्य हरेंद्र कुमार, राजकीय हाईस्कूल सौरी के प्रधानाचार्य रामअवतार यादव, राजकीय हाईस्कूल मखदूमपुर के प्रधानाचार्य सीपी सिंह और राजकीय हाईस्कूल कटरिया के प्रधानाचार्य सुधीर कुमार विश्वास शामिल होंगे। समिति के सदस्य रामअवतार यादव ने बताया कि पूल टीचरों का चयन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम-1921 (संशोधित ) की धारा-11 में दिए गए प्रविधानों के अनुसार किया जाएगा। यह नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से चयनित अभ्यर्थी के आने तक ही प्रभावी रहेगी। उन्होंने बताया की वर्तमान में राजकीय और एडेड माध्यमिक विद्यालयों में अधिकांश विषयों के शिक्षक नहीं हैं जो थोड़े बहुत शिक्षक उपलब्ध हैं, उन्हीं से शेष विषयों को पढ़वाकर कोरम पूरा किया जा रहा है। राजकीय विद्यालयों की हालत तो और दयनीय है। यहां एक या दो शिक्षकों के बल पर ही अधिकांश विद्यालय चल रहे हैं। यही कारण है कि राजकीय विद्यालयों से छात्र-छात्राओं का पलायन तेजी से हो रहा है। इसी पलायन को रोकने के लिए सरकार ने सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय पर रखने का फैसला लिया है।
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