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घटा खेती का रकबा, पानी हुआ कम
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sat, 23 Apr 2016 12:35 AM IST
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सूख रही बेसो नदी
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जंगल कट रहे हैं। दोहन से जल का स्तर घट रहा है। जमीन पर अट्टालिकाएं खड़ी की जा रही हैं। धरा का समीकरण और संतुलन बदलने लगा है। खेती का घटते रकबे से कृषि उत्पाद का संकट पैदा हो गया है। धरती का स्वास्थ्य सुधारने पर चिंतन बहुत हो रहा है लेकिन गोष्ठियों के विचार जमीनी हकीकत नहीं बन पा रहे हैं।
पिछले दो वर्षों से फरवरी और मार्च में बारिश और ओलावृद्धि हो रही है। इसके विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन का परिणाम बता रहे हैं। असमय वर्षा और मौसम में परिवर्तन से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। बढ़ती आबादी और शहरीकरण के चलते कृषि का रकबा कम हो रहा है। गाजीपुर ही नहीं बल्कि सैदपुर, जमानिया, मुहम्मदाबाद आदि कसबों में भी प्रापर्टी डीलर कृषि भूमि की प्लाटिंग करने लगे हैं।
जिला मुख्यालय के समीप महाराजगंज में कालोनियां बसने लगी हैं। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पांच वर्षों में कृषि भूमि में लगभग 10 फीसदी की कमी आई है। जमानिया पंप कैनाल से 41725 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती थी लेकिन इसमें दो साल में 3500 हेक्टेयर की कमी आई है।
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जोत की घटत को कम करने के लिए सरकार बीहड़ इलाके का सुधार कर रही है लेकिन वह नाकाफी है। कृषि विभाग के भूमि संरक्षण अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि मगही नदी से सटे के जखनिया, सादात और मनिहारी के क्षेत्रों 370 हेक्टेयर में किसान एक फसल काटते थे।
इस क्षेत्र में कृषि का रकबा 475 हेक्टेयर हो गया है। जमानिया के बहादुरपुर गांव के पास नहर के पानी का निकासी नहीं होने से 215 हेक्टेयर खेती डूब गई तो ड्रेन बनने के कारण 450 हेक्टेयर का एरिया खेती के लिए बढ़ा है। हरपुरताजपुर गांव के पास ड्रेन बनने से 350 हेक्टेयर के एरिया में वृद्घि हुई है।
गांवों के अधिकांश तालाब, पोखरे सूख गए हैं। लगातार जल दोहन से भूजल का स्तर भी गिरा है। जमीन में पालीथिन दबने के कारण भूजल रिचार्ज होने में बाधा उत्पन्न हो रही है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता दिनेश सिंह ने ने बताया कि अन्य वर्षों की अपेक्षा इस साल जलस्तर न्यूनतम स्तर पर है। गंगा की सहायक नदियों में पानी कम हो गया है। सादात में उदंती नदी सूख गई है और बेसो नदी में घुटने भर पानी बचा है। गंगा में रेत के टीले दिखने लगे हैं।
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पिछले दो वर्षों से फरवरी और मार्च में बारिश और ओलावृद्धि हो रही है। इसके विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन का परिणाम बता रहे हैं। असमय वर्षा और मौसम में परिवर्तन से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। बढ़ती आबादी और शहरीकरण के चलते कृषि का रकबा कम हो रहा है। गाजीपुर ही नहीं बल्कि सैदपुर, जमानिया, मुहम्मदाबाद आदि कसबों में भी प्रापर्टी डीलर कृषि भूमि की प्लाटिंग करने लगे हैं।
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जिला मुख्यालय के समीप महाराजगंज में कालोनियां बसने लगी हैं। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पांच वर्षों में कृषि भूमि में लगभग 10 फीसदी की कमी आई है। जमानिया पंप कैनाल से 41725 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती थी लेकिन इसमें दो साल में 3500 हेक्टेयर की कमी आई है।
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जोत की घटत को कम करने के लिए सरकार बीहड़ इलाके का सुधार कर रही है लेकिन वह नाकाफी है। कृषि विभाग के भूमि संरक्षण अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि मगही नदी से सटे के जखनिया, सादात और मनिहारी के क्षेत्रों 370 हेक्टेयर में किसान एक फसल काटते थे।
इस क्षेत्र में कृषि का रकबा 475 हेक्टेयर हो गया है। जमानिया के बहादुरपुर गांव के पास नहर के पानी का निकासी नहीं होने से 215 हेक्टेयर खेती डूब गई तो ड्रेन बनने के कारण 450 हेक्टेयर का एरिया खेती के लिए बढ़ा है। हरपुरताजपुर गांव के पास ड्रेन बनने से 350 हेक्टेयर के एरिया में वृद्घि हुई है।
गांवों के अधिकांश तालाब, पोखरे सूख गए हैं। लगातार जल दोहन से भूजल का स्तर भी गिरा है। जमीन में पालीथिन दबने के कारण भूजल रिचार्ज होने में बाधा उत्पन्न हो रही है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता दिनेश सिंह ने ने बताया कि अन्य वर्षों की अपेक्षा इस साल जलस्तर न्यूनतम स्तर पर है। गंगा की सहायक नदियों में पानी कम हो गया है। सादात में उदंती नदी सूख गई है और बेसो नदी में घुटने भर पानी बचा है। गंगा में रेत के टीले दिखने लगे हैं।