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अनुसुइया के पद गहि सीता...
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Thu, 06 Oct 2016 11:31 PM IST
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मुहम्मदाबाद के रामलीला में सीता विवाह का मंचन करते कलाकार।
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अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से शहर के वेदपुरवा मुहल्ला अर्बन बैंक स्थित राजा शंभूनाथ के बाग में जयंत नेत्रभंग, श्रृषि अत्रि मिलन, माता अनुसूइया संवाद लीला का मंचन बुधवार की रात किया गया। इसे देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।मंचन के दौरान श्रीराम जंगल-पर्वतों को पार करते हुए भारद्वाज मुनि के आश्रम पर पहुंचते हैं। जहां भारद्वाज मुनि उन्हे बड़े आदर भाव के साथ आश्रम में ले जाते है।
थोड़ी देर श्रीराम विश्राम करने के बाद आगे चलते हैं और कुछ देर चित्रकुट पहुचते हैं, जहां पर अत्रि श्रृषि श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीता को देखकर उन्हे अपने आश्रम स्थित एक शिला पर आसन लगाकर बैठाते हैं। श्रीराम बाग से फूल चुनकर लाते हैं और सीता जी को गहने बनाकर पहनाते हैं। इतने में इंद्र के पुत्र कौवे का रूप बनाकर सीता जी के चरण में चोंच मारकर भागता है। सीता के पैर में खून देखकर राम जी तरकश लेकर कौवा का पीछा करते है।
घबराकर वह ब्रह्मा, विष्णु, महेश के शरण में जाता है। लेकिन वहां भी उसे निराशा हाथ लगती है। वह निराश होकर लौटता है रास्ते में देवर्षि नारद से भेंट हो जाती है। सारी बातों को सुनकर देवर्षि जयंत को समझाकर श्रीराम के चरणों में क्षमा याचना के लिए भेजते हैं। श्रीराम उसके अपराधों को क्षमा करते हुए उसको एक आंख का काना बनाकर छोड़ देते हैं। उधर श्रृषि पत्नि अनुसूइया सीता जी को अपने साथ-साथ आश्रम के अंदर लाती है।
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उनके आदर-सम्मान को देखते हुए श्रृषि पत्नी अनुसूइया नारी व्रत धर्म के बारे में सीता जी को समझाती हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, उपाध्यक्ष विनय सिंह, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी बच्चा, उप मंत्री लव कुमार त्रिवेदी, प्रबंधक जैमिनी दत्त त्रिवेदी, सहायक प्रबंधक शिवपूजन तिवारी, कृष्ण बिहारी त्रिवेदी, कोषाध्यक्ष अभय कुमार अग्रवाल, रामनरायण पांडेय आदि का सहयोग रहा।
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थोड़ी देर श्रीराम विश्राम करने के बाद आगे चलते हैं और कुछ देर चित्रकुट पहुचते हैं, जहां पर अत्रि श्रृषि श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीता को देखकर उन्हे अपने आश्रम स्थित एक शिला पर आसन लगाकर बैठाते हैं। श्रीराम बाग से फूल चुनकर लाते हैं और सीता जी को गहने बनाकर पहनाते हैं। इतने में इंद्र के पुत्र कौवे का रूप बनाकर सीता जी के चरण में चोंच मारकर भागता है। सीता के पैर में खून देखकर राम जी तरकश लेकर कौवा का पीछा करते है।
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घबराकर वह ब्रह्मा, विष्णु, महेश के शरण में जाता है। लेकिन वहां भी उसे निराशा हाथ लगती है। वह निराश होकर लौटता है रास्ते में देवर्षि नारद से भेंट हो जाती है। सारी बातों को सुनकर देवर्षि जयंत को समझाकर श्रीराम के चरणों में क्षमा याचना के लिए भेजते हैं। श्रीराम उसके अपराधों को क्षमा करते हुए उसको एक आंख का काना बनाकर छोड़ देते हैं। उधर श्रृषि पत्नि अनुसूइया सीता जी को अपने साथ-साथ आश्रम के अंदर लाती है।
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उनके आदर-सम्मान को देखते हुए श्रृषि पत्नी अनुसूइया नारी व्रत धर्म के बारे में सीता जी को समझाती हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, उपाध्यक्ष विनय सिंह, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी बच्चा, उप मंत्री लव कुमार त्रिवेदी, प्रबंधक जैमिनी दत्त त्रिवेदी, सहायक प्रबंधक शिवपूजन तिवारी, कृष्ण बिहारी त्रिवेदी, कोषाध्यक्ष अभय कुमार अग्रवाल, रामनरायण पांडेय आदि का सहयोग रहा।