UP: सांसद ने गाजीपुर-मऊ रेल लाइन परियोजना पुनः शुरू करने की उठाई मांग, बोलीं विकास में साबित होगी मील का पत्थर
राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने गाजीपुर-मऊ रेल लाइन परियोजना पुनः शुरू करने की मांग उठाई। साथ ही गाजीपुर की व्यस्त रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज व अंडर पास बनाने की मांग की।
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राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने सदन में गाजीपुर की प्रमुख और अत्यधिक व्यस्त रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज अथवा अंडरपास निर्माण और गाजीपुर-मऊ रेल लाइन विस्तारीकरण परियोजना को पुनः चालू कराने की मांग उठाई है।
राज्यसभा सांसद ने सदन को अवगत कराया कि दिलदारनगर, भदौरा, दुल्लहपुर, सैदपुर, सहेड़ी, महराजगंज बाजार और फुल्लनपुर जैसी प्रमुख रेलवे क्रॉसिंगों पर प्रतिदिन हजारों वाहन और पैदल यात्री आवाजाही करते हैं। रेलवे फाटक बंद होने के कारण इन स्थानों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे न केवल लोगों का कीमती समय बर्बाद होता है बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इन क्रॉसिंगों पर ओवरब्रिज या अंडरपास का निर्माण होने से ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी और आमजन की यात्रा सुगम होगी।
इसके साथ ही डॉ. संगीता बलवंत ने गाजीपुर-मऊ रेल लाइन विस्तारीकरण परियोजना को पुनः प्रारंभ कराने की मांग भी सदन में रखी। उन्होंने बताया कि गाजीपुर का दिलदारनगर-ताड़ीघाट रेल मार्ग अंग्रेजी शासन काल में लगभग वर्ष 1880 में बनाया गया था, जहां ताड़ीघाट रेलवे स्टेशन दो वर्ष पूर्व तक सक्रिय था। पूर्ववर्ती सरकारों के समय ताड़ीघाट स्टेशन से गाजीपुर सिटी और मऊ तक रेल लाइन विस्तार तथा गंगा नदी पर पुल निर्माण का प्रस्ताव तो बना, लेकिन इसे कभी धरातल पर नहीं उतारा गया।
राज्यसभा सांसद ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में तत्कालीन रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के प्रस्ताव पर ताड़ीघाट से गाजीपुर सिटी तक रेल मार्ग विस्तार और गंगा नदी पर डबल डेकर रेल-सह-रोड ब्रिज परियोजना की आधारशिला 14 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई। कुछ ही वर्षों में ताड़ीघाट से गाजीपुर सिटी तक रेल मार्ग और गंगा नदी पर पुल का निर्माण पूरा कर लिया गया, लेकिन अब जानकारी मिली है कि गाजीपुर सिटी से मऊ तक प्रस्तावित रेल लाइन, जो दिल्ली-हावड़ा लाइन को वाराणसी-मऊ-छपरा लाइन से जोड़ने वाली थी, उसे बंद कर दिया गया है।
डॉ. संगीता बलवंत ने गाजीपुर सिटी से मऊ तक रेल मार्ग विस्तारीकरण परियोजना को पुनः प्रारंभ करने की पुरजोर मांग करते हुए कहा कि यह परियोजना पूर्वांचल और जनपद गाजीपुर के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इससे शिक्षा, उद्योग और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश देश के विभिन्न रेल जोनों से सीधे जुड़ेगा। इस परियोजना का लाभ उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य बिहार को भी मिलेगा।