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प्राथमिक और माध्यमिक के बिना उच्च शिक्षा में सुधार नहीं
ब्यूरो अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Mon, 04 Jan 2016 11:35 PM IST
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से शिक्षा की नई नीति के संबंध में संगोष्ठी का आयोजन स्नातकोत्तर महाविद्यालय स्थित टेरी के सभागार में किया गया। इस अवसर शिक्षा की नई नीति के संबंध में शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने गहन मंथन किया।
संगोष्ठी में नई शिक्षा नीति के तहत सरकार की ओर से गठित समिति के सदस्य प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत ने कहा कि अध्यापक विद्यार्थी को मनुष्यत्व से देवत्व की ओर ले जाता है। उन्होंने गांधीजी की मां की उक्तियों को दोहराया कि प्रत्येक व्यक्ति अपना कर्तव्य करें तो दूसरे के अधिकारों का हनन नहीं होगा। डा. पीएन सिंह ने कहा कि प्राथमिक
और माध्यमिक शिक्षा के सुधार के बिना उच्च शिक्षा में सुधार नहीं होगा। राजनारायण सिंह ने कहा कि आज योग को समग्र रूप में जानने की आवश्यकता है। नीति परक ज्ञान जरूरी है। शिवकुमार ने कहा कि बेसिक शिक्षा प्रलोभन की
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नीतियों पर आधारित हो गई है। इससे गुणवत्ता का विकास नहीं हो पा रहा है। सेवाराम शर्मा ने कहा कि अपने प्रतिकूल कार्य को हमें दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए। अध्यापक का दायित्व बहुत बड़ा है। वह व्यक्ति को व्यक्तित्व में बदल देता है।
इस अवसर पर समिति के प्रो. राजपूत, पूर्व गृह सचिव सेवाराम शर्मा, कमेटी के सचिव डीके विश्वास, बेसिक शिक्षा के अतिरिक्त निदेशक विजय शंकर मिश्र एवं माध्यमिक शिक्षा के संयुक्त निदेशक प्रदीप सिंह, डा. अनिल कुमार सिंह, अजीत कुमार सिंह, बीडी मिश्र, डा. दूधनाथ सिंह, डा. बद्रीनाथ सिंह, बालेश्वर सिंह, डा. लवजी सिंह, डा. यशवंत सिंह, डा. ओमदेव सिंह, डा. जी सिंह, डा. सुजीत कुमार सिंह, अजीत कुमार सिंह, उपस्थित थे।
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संगोष्ठी में नई शिक्षा नीति के तहत सरकार की ओर से गठित समिति के सदस्य प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत ने कहा कि अध्यापक विद्यार्थी को मनुष्यत्व से देवत्व की ओर ले जाता है। उन्होंने गांधीजी की मां की उक्तियों को दोहराया कि प्रत्येक व्यक्ति अपना कर्तव्य करें तो दूसरे के अधिकारों का हनन नहीं होगा। डा. पीएन सिंह ने कहा कि प्राथमिक
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और माध्यमिक शिक्षा के सुधार के बिना उच्च शिक्षा में सुधार नहीं होगा। राजनारायण सिंह ने कहा कि आज योग को समग्र रूप में जानने की आवश्यकता है। नीति परक ज्ञान जरूरी है। शिवकुमार ने कहा कि बेसिक शिक्षा प्रलोभन की
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नीतियों पर आधारित हो गई है। इससे गुणवत्ता का विकास नहीं हो पा रहा है। सेवाराम शर्मा ने कहा कि अपने प्रतिकूल कार्य को हमें दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए। अध्यापक का दायित्व बहुत बड़ा है। वह व्यक्ति को व्यक्तित्व में बदल देता है।
इस अवसर पर समिति के प्रो. राजपूत, पूर्व गृह सचिव सेवाराम शर्मा, कमेटी के सचिव डीके विश्वास, बेसिक शिक्षा के अतिरिक्त निदेशक विजय शंकर मिश्र एवं माध्यमिक शिक्षा के संयुक्त निदेशक प्रदीप सिंह, डा. अनिल कुमार सिंह, अजीत कुमार सिंह, बीडी मिश्र, डा. दूधनाथ सिंह, डा. बद्रीनाथ सिंह, बालेश्वर सिंह, डा. लवजी सिंह, डा. यशवंत सिंह, डा. ओमदेव सिंह, डा. जी सिंह, डा. सुजीत कुमार सिंह, अजीत कुमार सिंह, उपस्थित थे।