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Ghazipur News: फॉरेंसिक एक्सपर्ट के बिना सात महीने से एमबीबीएस डॉक्टर के भरोसे हो रहे पोस्टमार्टम, 14 में से 8 कर्मी भी नहीं

Wed, 30 Sep 2026 12:22 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 12:22 AM IST
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Post-mortems have been conducted solely by MBBS doctors for seven months due to the absence of a forensic expert; even the support staff is understaffed, with only 6 out of 14 positions filled.
पोस्टमार्टम हाउस। संवाद
गाजीपुर। फॉरेंसिक एक्सपर्ट के बिना ही सात महीने से एमबीबीएस के भरोसे ही पोस्टमार्टम चल रहा है। मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद दिन हो या रात सीएचसी-पीएचसी के 61 डॉक्टरों की ही ड्यूटी लग रही है। फरवरी में आया शासनादेश जिम्मेदारों के पास फाइलों में बंद पड़ा हुआ है। यही नहीं पोस्टमार्टम हाउस पर 14 सृजित पद के सापेक्ष 8 कर्मियों के भरोसे ही चल रहा है।
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फॉरेंसिक एक्सपर्ट मौत के सही कारणों, समय और परिस्थितियों का वैज्ञानिक और कानूनी प्रमाण के साथ खुलासा करता है। वह मौत के कारणों में किस हथियार से, कितने बजे, जहर कौन सा इन बारीकियों को लिखते हैं। जबकि एमबीबीएस डॉक्टर सिर्फ मौत का कारण लिख देते हैं। फॉरेंसिक एक्सपर्ट द्वारा पोस्टमार्टम न होने से केस में रिपोर्ट कमजोर होने के कारण अपराधी छूट जाता है। यही नहीं बड़ी घटनाओं के खुलासे में भी फॉरेंसिक एक्सपर्ट द्वारा बनाई गई रिपोर्ट की अहम भूमिका होती है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि शासनादेश के सात माह बीत जाने के बावजूद अबतक फॉरेंसिक एक्सपर्ट के बिना ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जस की तस चल रही है।
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दो एमडी फॉरेंसिक समेत इन पदों पर कर्मचारी नहीं

पोस्टमार्टम प्रभारी मनीष कुमार ने बताया कि शासनादेश के मुताबिक पोस्टमार्टम हाउस पर एमडी फॉरेंसिक के दो पद सृजित हैं, जो शून्य हैं। यहां प्रशिक्षित फार्मासिस्ट फॉरेंसिक के दो पद है, लेकिन यहां तैनात एक फार्मासिस्ट प्रशिक्षण प्राप्त नहीं हैं। एक्सरे टेक्नीशियन के एक पद सृजित है, जिस पर एक कर्मी तैनात हैं। डाटा एंट्री ऑपरेटर का पद एक सृजित है, लेकिन तैनाती किसी की नहीं है। वीडियोग्राफर कम फोटोग्राफर का एक पद सृजित है, जिस पर पुलिस विभाग द्वारा एक कर्मी दिया गया है। वार्ड बॉय के दो पद सृजित है, जिस पर दो की तैनाती है। वहीं चौकीदार कम सफाई कर्मी के पांच सृजित पद में तीन कर्मियों की तैनाती है।
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ऐसे समझें अंतर

एमबीबीएस डॉक्टर

0 एमबीबीएस डॉक्टर के पास स्नातक स्तर पर फॉरेंसिक विषय का केवल बुनियादी ज्ञान दिया जाता है।

0 आमतौर पर जिला अस्पतालों या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सामान्य मेडिको-लीगल मामले (जैसे सामान्य दुर्घटना, संदिग्ध डूबना आदि) देखते हैं।

0 चोटों और अंगों की जांच सामान्य रूप से करते हैं और मृत्यु का प्राथमिक कारण बताते हैं।

फॉरेंसिक एक्सपर्ट

0 फॉरेंसिक एक्सपर्ट एमबीबीएस के बाद तीन वर्ष की पोस्ट-ग्रेजुएशन डिग्री धारक विशेषज्ञ होते हैं।

0 हत्या, संदिग्ध मौत, अत्यधिक सड़े-गले शव, हड्डी के अवशेष या जटिल और हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच करते हैं।

0 मृत्यु से पहले और मृत्यु के बाद की चोटों का सूक्ष्मता से अंतर स्पष्ट कर सकते हैं।

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बोले विधि विशेषज्ञ...

यहां फॉरेंसिक एक्सपर्ट नहीं है। ऐसे में एमबीबीएस डॉक्टरों द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामान्य तौर से मृत्यु का कारण दे दिया जाता है। उदाहरण अगर किसी की मौत जहर से हुई है तो विसरा सुरक्षित रखकर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया जाता है। वहीं, अगर किसी की मौत गोली से हुई है तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तो मौत का कारण गोली आती है, लेकिन गोली किस हथियार से चली है। इस स्थिति में गोली और अपराधी से बरामद तमंचा भी पुलिस विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजती है। रिपोर्ट कब आएगी कोई पता नहीं है। अगर फॉरेंसिक एक्सपर्ट रहते तो पुलिस द्वारा न्यायालय में 90 दिन में दाखिल किए जाने वाले चार्जशीट के साथ उनकी ओपिनियन भी आ जाती।- डॉ. जेबी सिंह, फौजदारी अधिवक्ता

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अभी संसाधनों का अभाव बना हुआ है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट होने से ओपिनियन बेहतर आएगा और आरोपी कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा। वजह वह इसके विशेषज्ञ होते हैं। हालांकि यहां एमबीबीएस द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी जाती है, जो सिर्फ मौत का कारण ही स्पष्ट कर पाते हैं।- अखिलेश राय, फौजदारी अधिवक्ता

शासनादेश है कि फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के नियमित संकाय के सदस्य ही पोस्टमार्टम कर सकते हैं। मेडिकल कॉलेज में नियमित दो पद सृजित हैं, लेकिन अबतक किसी ने आवेदन नहीं किया है। जहां तक एमबीबीएस छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की बात है तो फॉरेंसिक विभाग में संविदा पर ही सह आचार्य और सहायक आचार्य द्वारा पढ़ाई पूरी कराई जा रही है।-प्रो. आनंद मिश्रा, प्राचार्य महर्षि विश्वामित्र स्वशासी मेडिकल कॉलेज गाजीपुर


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पूरे प्रदेश में फॉरेंसिक के नियमित पद पर कमी बनी हुई है। संविदा कर्मी डॉक्टर ही मेडिको लीगल कर रहे हैं, ऐसे में जल्द ही इस समस्या का भी निस्तारण शासन स्तर से हो जाएगा।- डॉ. रामकुमार, प्रभारी सीएमओ गाजीपुर
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