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Ghazipur News: अनदेखी के कारण ऑक्सीजन प्लांट की थम रहीं सांसें
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गाजीपुर शहर के गोराबाजार स्थित सीएमओ कार्यालय परिसर में स्थापित लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) टैंक शोपीस बना हुआ है। स्थिति यह है कि एक वर्ष बाद भी संचालन की जगह मशीन और टैंक धूल फांक रही है। प्लांट के आस-पास जंगली घास भी उग आए हैं और रख- रखाव के अभाव में धीरे- धीरे खराब हो रहे हैं।
कोरोना संक्रमण काल में ऑक्सीजन की महत्ता पता चली थी। ऑक्सीजन सिलिंडर की किल्लत से कई मरीजों की सांसों पर संकट आ गया था। शासन के निर्देश पर गोराबाजार स्थित 200 बेड के पुरुष अस्पताल, महिला अस्पताल सहित अन्य सीएचसी पर प्लांट स्थापित कराया गया था, जिससे मरीजों को दिक्कत का सामना न करना पड़े।
फाउंडेशन बनाकर प्लांट स्थापित तो करा दिया गया, लेकिन अब तक संचालन तो दूर कक्ष का निर्माण भी नहीं कराया गया। इस संबंध में महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि जिस संस्था द्वारा प्लांट स्थापित कराया गया है, उन्हें संचालन का निर्देश दिया गया है।
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एक लीटर लिक्विड से 870 लीटर मिलेगा गैसीय ऑक्सीजन
टैंक से लिक्विड ऑक्सीजन पाइप के सहारे वहां लगे संयंत्रों में पहुंचेगी, जहां से वह गैसीय ऑक्सीजन के रूप में परिवर्तित होगी। इसके बाद कॉपर पाइप लाइन से गैसीय ऑक्सीजन की सप्लाई जिला और महिला अस्पतालों को होगी, जिससे मरीजों को ऑक्सीजन की किल्लत का सामना न करना पड़े। इससे ऑक्सीजन की किल्लत को दूर होगी और लिक्विड ऑक्सीजन के एक लीटर से 870 लीटर गैसीय ऑक्सीजन मिलेगा।
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कोरोना संक्रमण काल में ऑक्सीजन की महत्ता पता चली थी। ऑक्सीजन सिलिंडर की किल्लत से कई मरीजों की सांसों पर संकट आ गया था। शासन के निर्देश पर गोराबाजार स्थित 200 बेड के पुरुष अस्पताल, महिला अस्पताल सहित अन्य सीएचसी पर प्लांट स्थापित कराया गया था, जिससे मरीजों को दिक्कत का सामना न करना पड़े।
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फाउंडेशन बनाकर प्लांट स्थापित तो करा दिया गया, लेकिन अब तक संचालन तो दूर कक्ष का निर्माण भी नहीं कराया गया। इस संबंध में महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि जिस संस्था द्वारा प्लांट स्थापित कराया गया है, उन्हें संचालन का निर्देश दिया गया है।
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एक लीटर लिक्विड से 870 लीटर मिलेगा गैसीय ऑक्सीजन
टैंक से लिक्विड ऑक्सीजन पाइप के सहारे वहां लगे संयंत्रों में पहुंचेगी, जहां से वह गैसीय ऑक्सीजन के रूप में परिवर्तित होगी। इसके बाद कॉपर पाइप लाइन से गैसीय ऑक्सीजन की सप्लाई जिला और महिला अस्पतालों को होगी, जिससे मरीजों को ऑक्सीजन की किल्लत का सामना न करना पड़े। इससे ऑक्सीजन की किल्लत को दूर होगी और लिक्विड ऑक्सीजन के एक लीटर से 870 लीटर गैसीय ऑक्सीजन मिलेगा।