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ठंड-गलन के आगे फीकी रही धूप की चमक.
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सुहवल के पास कड़ाके की ठंड से बचने के लिए अलाव तापते राहगीर।
- फोटो : GHAZIPUR
गाजीपुर। कड़ाके की सर्दी के बीच पिछले कई दिनों से धूप जरूर निकल रही है, लेकिन कड़ाके की ठंड के आगे इसका कोई खास प्रभाव लोगों पर नहीं पड़ रहा है। पिछले दिनों की तरह सोमवार को भी धूप निकली, लेकिन ठंड और गलन के आगे इसकी चमक फीकी रही। काफी देर तक धूप में बैठने पर ही सर्दी से कुछ राहत मिल रही थी। ठंड के साथ ही गलन का प्रभाव इस कदर था कि शरीर को पूरी तहर से गर्म कपड़ा से ढकने के बाद भी शरीर पूरी तरह से ठंडा था।
कई दिनों से कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। इससे जन-जीवन पूरी तरह से बेहाल हो गया है। बीते दिनों की तरह कोहरा के बाद रविवार को भी सुबह करीब दस बजे से धूप निकली तो लोगों ने इसका आनंद लेकर ठंड से राहत पाई। हालांकि शाम ढलते ही एक बार फिर से लोग गलन और ठंड की गिरफ्त में आ गए। देर रात कोहरा गिरने का क्रम शुरु हो गया, जो सोमवार की सुबह साढ़े दस बजे तक जारी रहा। कोहरा की वजह से गलन के साथ सर्दी का भी जबरदस्त प्रभाव था। इससे सुबह लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। घना कोहरा देख कई अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। कड़ाके की ठंड के बीच राहत के लिए लोग ईश्वर से धूप की कामना करने लगे। दिन में करीब 11 बजे धूप निकलते ही सर्दी से बेहाल लोगों ने इसका सहारा लेना शुरु कर दिया, लेकिन गलन का प्रभाव इतना अधिक था कि इसके आगे सूर्य की चमक धीमी थी। काफी देर तक धूप के बीच रहने पर ही कुछ राहत मिल रही थी। शाम होते ही गलन का जबरदस्त प्रभाव हो गया। शरीर को पूरी तरह से गर्म कपड़ों से ढकने के बाद भी शरीर पूरी तरह से ठंडा था। ठंड से राहत के लिए शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अलाव का सहारा लेते हुए ठंड की दुहाई देते रहे।
धुंध के बीच रेंगते रहे वाहन
गाजीपुर। रविवार की रात करीब 11 बजे से कोहरा गिरने का क्रम शुरु हो गया था। कोहरे की चादर इतनी घनी थी कि काफी दूर की कौन कहे, काफी पास की वस्तु भी दिखाई नहीं दे रही थी। कुछ ही देर तक खुले आसमान के नीचे रहने पर कपड़ा कोहरे के प्रभाव से पूरी तरह से ठंडा हो जा रहा था। चार-पहिया और दो पहिया वाहन लाइन और इंडीकेटर के सहारे रेंगते रहे। कोहरा इतना जबरदस्त था कि दूसरे दिन सोमवार को नौ बजे भी वाहन चालक लाइट के सहारे धुंध को छांटते हुए धीमी चाल से आगे बढ़ते रहे।
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ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे बच्चे
गाजीपुर। बीते दिनों की अपेक्षा सोमवार की सुबह कोहरे का प्रभाव अधिक रहा। इसकी वजह से गलन के साथ ही ठंड में भी काफी इजाफा रहा। सुबह जागने के बाद जब लोग कमरा से बाहर निकले तो घना कोहरा देख उनकी चिंता इस बात से बढ़ गई कि लगता है कि आज धूप नहीं निकलेगी। खराब मौसम को देख कई लोगों ने बच्चों को स्कूल नही भेजा। वहीं जो बच्चे स्कूल गए, वह कोहरा और गलन के बीच ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे।
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कई दिनों से कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। इससे जन-जीवन पूरी तरह से बेहाल हो गया है। बीते दिनों की तरह कोहरा के बाद रविवार को भी सुबह करीब दस बजे से धूप निकली तो लोगों ने इसका आनंद लेकर ठंड से राहत पाई। हालांकि शाम ढलते ही एक बार फिर से लोग गलन और ठंड की गिरफ्त में आ गए। देर रात कोहरा गिरने का क्रम शुरु हो गया, जो सोमवार की सुबह साढ़े दस बजे तक जारी रहा। कोहरा की वजह से गलन के साथ सर्दी का भी जबरदस्त प्रभाव था। इससे सुबह लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। घना कोहरा देख कई अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। कड़ाके की ठंड के बीच राहत के लिए लोग ईश्वर से धूप की कामना करने लगे। दिन में करीब 11 बजे धूप निकलते ही सर्दी से बेहाल लोगों ने इसका सहारा लेना शुरु कर दिया, लेकिन गलन का प्रभाव इतना अधिक था कि इसके आगे सूर्य की चमक धीमी थी। काफी देर तक धूप के बीच रहने पर ही कुछ राहत मिल रही थी। शाम होते ही गलन का जबरदस्त प्रभाव हो गया। शरीर को पूरी तरह से गर्म कपड़ों से ढकने के बाद भी शरीर पूरी तरह से ठंडा था। ठंड से राहत के लिए शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अलाव का सहारा लेते हुए ठंड की दुहाई देते रहे।
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धुंध के बीच रेंगते रहे वाहन
गाजीपुर। रविवार की रात करीब 11 बजे से कोहरा गिरने का क्रम शुरु हो गया था। कोहरे की चादर इतनी घनी थी कि काफी दूर की कौन कहे, काफी पास की वस्तु भी दिखाई नहीं दे रही थी। कुछ ही देर तक खुले आसमान के नीचे रहने पर कपड़ा कोहरे के प्रभाव से पूरी तरह से ठंडा हो जा रहा था। चार-पहिया और दो पहिया वाहन लाइन और इंडीकेटर के सहारे रेंगते रहे। कोहरा इतना जबरदस्त था कि दूसरे दिन सोमवार को नौ बजे भी वाहन चालक लाइट के सहारे धुंध को छांटते हुए धीमी चाल से आगे बढ़ते रहे।
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ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे बच्चे
गाजीपुर। बीते दिनों की अपेक्षा सोमवार की सुबह कोहरे का प्रभाव अधिक रहा। इसकी वजह से गलन के साथ ही ठंड में भी काफी इजाफा रहा। सुबह जागने के बाद जब लोग कमरा से बाहर निकले तो घना कोहरा देख उनकी चिंता इस बात से बढ़ गई कि लगता है कि आज धूप नहीं निकलेगी। खराब मौसम को देख कई लोगों ने बच्चों को स्कूल नही भेजा। वहीं जो बच्चे स्कूल गए, वह कोहरा और गलन के बीच ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे।