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मात्र 40 फीसदी रोपाई, उसे भी बचाना पड़ रहा भारी

Mon, 25 Jul 2022 11:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 25 Jul 2022 11:36 PM IST
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Only 40 percent transplanting, he also has to save heavily
जनपद में इस बार एक लाख 49 हजार हेक्टेयर खेत में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने और बिजली की अघोषित कटौती से किसान धान की रोपाई से मुंह मोड़ने लगे हैं। इसी का परिणाम है कि पूरे जनपद में महज 40 फीसदी ही धान की रोपाई हो सकी है।
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इस बार कृषि विभाग द्वारा एक लाख 49 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके सापेक्ष अब तक मात्र चालीस फीसदी अर्थात 60 हजार हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो सकी है। हालत यह है कि जिन किसानों ने धान की रोपाई कर ली है, उनके सामने अपनी फसल को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। क्योंकि एक तरफ बिजली की आंख मिचौली जारी है तो दूसरी तरफ नहरों में पानी नदारद है। ऐसे में किसान किसी तरह प्राइवेट पंपिंग सेट के सहारे अपनी फसलों को बचाने में लगे हुए हैं। इसके लिए उन्हें काफी क्षति भी उठानी पड़ रही है। क्योंकि पचास से सौ रुपये प्रति घंटे के हिसाब से उन्हें सिंचाई के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है।
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इस बार जनपद में एक लाख 49 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन पानी न मिलने के कारण अभी तक मात्र चालीस फीसदी ही धान की रोपाई हो सकी है। लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त व्यवस्था या पानी बरसने के बाद इसमें बढ़ोत्तरी हो सकती है।
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मृत्युंजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी, गाजीपुर
किसान बोले, फसलों को बचाना हो रहा है मुश्किल
मौधा। क्षेत्र के किसान आकाश सिंह ने बताया कि फसलों के लिए बारिश का होना बहुत आवश्यक होता है। क्योंकि बारिश होने से फसलों में होने वाली बीमारियां समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने सात बीघे खेत में धान की रोपाई की है। बारिश न होने के कारण इसमें लगातार पानी चलाना पड़ रहा है। अब तक डीजल पर आठ हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। बताया कि फसल को बचाने में बड़ी मशक्कत झेलनी पड़ रही है।
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