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मनरेगा में महज 3587 मजदूरों को मिला काम
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मनरेगा में महज 3587 मजदूरों को मिला काम
पिचले साल की तुलना
चुनाव के चलते ठप हुआ गांवों का विकास
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जिले में मनरेगा के तहत चालू वित्त वर्ष में 60 लाख मानव दिवस सृजित किए गए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 22 लाख कम किंतु लक्ष्य से पांच लाख अधिक हैं। इस साल 55 लाख मानव दिवस काम देने का लक्ष्य था। इस दौरान महज इसके तहत 3587 मनरेगा मजदूरों को ही काम मिला है। मगर चुनाव के चलते गांवों में मस्टर रोल नहीं तैयार हो रहे हैं और न ही नया काम हो रहा है।
पिछले साल कोरोना के चलते तमाम मजदूर परदेश से गांव लौट आए थे। तब 46 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य था लेकिन 82 लाख मानव दिवस का सृजन किया गया। मनरेगा के तहत होने वाले नाली, चकरोड, तालाब, गो आश्रय स्थल, वृक्षारोपण और समतलीकरण के काम कुछ ब्लॉकों में बेहतर तरीके से हुआ। जिसमें सैदपुर, सादात, मनिहारी, मरदह ब्लॉक में काम की अच्छी स्थिति रही। वहीं, रेवतीपुर, भदौरा, जमानियां और सदर ब्लॉक में काम बाढ़ जैसी प्राकृतिक अपदाओं से प्रभावित रहा। अधिकारियों का कहना है कि गंगा से सटे और बाढ़ प्रभावित ब्लॉकों में काम की स्थिति धीमी है, क्योंकि वहां दो से तीन महीने तक बाढ़ का पानी लगा होने से मनरेगा के काम में तेजी नहीं आ पाता। ऐसा बाढ़ वाले साल में हमेशा होता रहा है।
कोरोना, बाढ़ और बेरोजगारी की दशा में लक्ष्य से ज्यादा मानव श्रम सृजित होने का लाभ मजदूर वर्ग को सीधे डीबीटी के जरिए मिला है। जनपद के 3587 श्रमिकों को सीधे लाभ मिल रहा है। हालांकि यह आंकड़ा उस स्थिति में पर्याप्त नहीं जब जिले में पंजीकृत मजदूर 2 लाख 16 हजार हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के साथ कोरोना भी अपने खात्मे की ओर है। इन दोनों स्थितियों में मनरेगा के तहत होने वाले काम भी बढ़ेंगे। जिसका लाभ अधिक से अधिक मजदूरों को मिलेगा।
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फिलहाल, चुनाव के चलते जनपद में 33 गोशाला के निर्माण का काम प्रभावित है। इसमें से 12 पूरा होने की कगार पर है जो गति नहीं पकड़ रहा। उम्मीद है कि ऐसे सभी काम चुनाव बाद गति पकड़ेगा। जिसका लाभ मनरेगा श्रमिकों को मिलेगा।
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बाढ़ जैसी वि भिषिका के बाद कोरोना और चुनाव में मनरेगा के काम प्रभावित हुए हैं। फिर भी लक्ष्य से अधिक मानव दिवस सृजित किया गया है। कई कार्य अधर में है जिनका काम चुनाव बाद तेज होगा। जिसका लाभ मनरेगा मजदूरों को मिलेगा।
गोपाल कृष्ण चौधरी, डी सी मनरेगा
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पिचले साल की तुलना
चुनाव के चलते ठप हुआ गांवों का विकास
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जिले में मनरेगा के तहत चालू वित्त वर्ष में 60 लाख मानव दिवस सृजित किए गए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 22 लाख कम किंतु लक्ष्य से पांच लाख अधिक हैं। इस साल 55 लाख मानव दिवस काम देने का लक्ष्य था। इस दौरान महज इसके तहत 3587 मनरेगा मजदूरों को ही काम मिला है। मगर चुनाव के चलते गांवों में मस्टर रोल नहीं तैयार हो रहे हैं और न ही नया काम हो रहा है।
पिछले साल कोरोना के चलते तमाम मजदूर परदेश से गांव लौट आए थे। तब 46 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य था लेकिन 82 लाख मानव दिवस का सृजन किया गया। मनरेगा के तहत होने वाले नाली, चकरोड, तालाब, गो आश्रय स्थल, वृक्षारोपण और समतलीकरण के काम कुछ ब्लॉकों में बेहतर तरीके से हुआ। जिसमें सैदपुर, सादात, मनिहारी, मरदह ब्लॉक में काम की अच्छी स्थिति रही। वहीं, रेवतीपुर, भदौरा, जमानियां और सदर ब्लॉक में काम बाढ़ जैसी प्राकृतिक अपदाओं से प्रभावित रहा। अधिकारियों का कहना है कि गंगा से सटे और बाढ़ प्रभावित ब्लॉकों में काम की स्थिति धीमी है, क्योंकि वहां दो से तीन महीने तक बाढ़ का पानी लगा होने से मनरेगा के काम में तेजी नहीं आ पाता। ऐसा बाढ़ वाले साल में हमेशा होता रहा है।
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कोरोना, बाढ़ और बेरोजगारी की दशा में लक्ष्य से ज्यादा मानव श्रम सृजित होने का लाभ मजदूर वर्ग को सीधे डीबीटी के जरिए मिला है। जनपद के 3587 श्रमिकों को सीधे लाभ मिल रहा है। हालांकि यह आंकड़ा उस स्थिति में पर्याप्त नहीं जब जिले में पंजीकृत मजदूर 2 लाख 16 हजार हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के साथ कोरोना भी अपने खात्मे की ओर है। इन दोनों स्थितियों में मनरेगा के तहत होने वाले काम भी बढ़ेंगे। जिसका लाभ अधिक से अधिक मजदूरों को मिलेगा।
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फिलहाल, चुनाव के चलते जनपद में 33 गोशाला के निर्माण का काम प्रभावित है। इसमें से 12 पूरा होने की कगार पर है जो गति नहीं पकड़ रहा। उम्मीद है कि ऐसे सभी काम चुनाव बाद गति पकड़ेगा। जिसका लाभ मनरेगा श्रमिकों को मिलेगा।
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बाढ़ जैसी वि भिषिका के बाद कोरोना और चुनाव में मनरेगा के काम प्रभावित हुए हैं। फिर भी लक्ष्य से अधिक मानव दिवस सृजित किया गया है। कई कार्य अधर में है जिनका काम चुनाव बाद तेज होगा। जिसका लाभ मनरेगा मजदूरों को मिलेगा।
गोपाल कृष्ण चौधरी, डी सी मनरेगा