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रेल की पटरियों पर लगता है मेला
संवाददाता/ अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Sun, 23 Aug 2015 11:17 PM IST
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रेल की सूनी पटरी पर चलने पर भी लोगों के मन में इस बात का खौफ बना रहता है कि कही ट्रेन न आ जाए, लेकिन जिले की एक ऐसी भी रेल पटरी है, जहां इंसान अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर बकरियों की जिंदगी के सौदे का मेला लगता है।
जी हां हम बात कर रहे हैं दिलदारनगर-ताड़ीघाट रेल लाइन पर विद्युत उपकेंद्र के निकट प्रत्येक रविवार को लगने वाले बकरियों के हाट मेले की। ट्रेनों के आने के दौरान हार्न देने पर मेला हट जाता है, लेकिन ट्रेन के गुजरने के बाद पुन: जान जोखिम में डालकर मेला सज जाता है। वहीं इस खतरनाक मेले की तरफ जीआरपी का ध्यान नहीं है।
पूर्व मध्य रेलवे दानापुर मंडल में पड़ने वाला ताड़ीघाट-दिलदारनगर रेल मार्ग पर ताड़ीघाट-दिलदारनगर पैसेंजर ट्रेन सुबह से शाम के बीच छह चक्कर लगाती है।
बावजूद इसके प्रत्येक रविवार को विद्युत उपकेंद्र के पास जान जोखिम में डालकर व्यापारियों द्वारा रेल लाइन पर ही बकरियों का मेला लगाया जाता है। मेला के निकट पहुंचते ही ट्रेन चालक लगातार हार्न को बजाने लगता है।
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हार्न सुन मेले में अफरा-तफरी मच जाती है। एक तरफ जहां ग्राहक इधर-उधर भागने लगते है, वहीं व्यापारी बकरियों को हटाने लगते है। ट्रेन जाने के बाद फिर से मेला लग जाता है। अगर ट्रेन का चालक लगातर हार्न न बजाए तो शायद कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
जिस स्थान पर यह खतरनाक मेला लगता है, उससे पांच सौ मीटर पर थाना और सात सौ मीटर पर रेलवे स्टेशन स्थित आरपीएफ का थाना और जीआरपी चौकी मौजूद है। बावजूद इसके इनकी तरफ से मेले के नाम पर मौत को दावत देने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है।
इस संबंध में आरपीएफ पोस्ट प्रभारी आरए प्रसाद ने बताया कि मीडिया द्वारा मुझे इस बात की जानकारी हुई है कि रेल की पटरी पर मेला लगता है। जल्द ही मेले को हटवाया जाएगा। कहा कि यह खतरे वाली बात है और इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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जी हां हम बात कर रहे हैं दिलदारनगर-ताड़ीघाट रेल लाइन पर विद्युत उपकेंद्र के निकट प्रत्येक रविवार को लगने वाले बकरियों के हाट मेले की। ट्रेनों के आने के दौरान हार्न देने पर मेला हट जाता है, लेकिन ट्रेन के गुजरने के बाद पुन: जान जोखिम में डालकर मेला सज जाता है। वहीं इस खतरनाक मेले की तरफ जीआरपी का ध्यान नहीं है।
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पूर्व मध्य रेलवे दानापुर मंडल में पड़ने वाला ताड़ीघाट-दिलदारनगर रेल मार्ग पर ताड़ीघाट-दिलदारनगर पैसेंजर ट्रेन सुबह से शाम के बीच छह चक्कर लगाती है।
बावजूद इसके प्रत्येक रविवार को विद्युत उपकेंद्र के पास जान जोखिम में डालकर व्यापारियों द्वारा रेल लाइन पर ही बकरियों का मेला लगाया जाता है। मेला के निकट पहुंचते ही ट्रेन चालक लगातार हार्न को बजाने लगता है।
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हार्न सुन मेले में अफरा-तफरी मच जाती है। एक तरफ जहां ग्राहक इधर-उधर भागने लगते है, वहीं व्यापारी बकरियों को हटाने लगते है। ट्रेन जाने के बाद फिर से मेला लग जाता है। अगर ट्रेन का चालक लगातर हार्न न बजाए तो शायद कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
जिस स्थान पर यह खतरनाक मेला लगता है, उससे पांच सौ मीटर पर थाना और सात सौ मीटर पर रेलवे स्टेशन स्थित आरपीएफ का थाना और जीआरपी चौकी मौजूद है। बावजूद इसके इनकी तरफ से मेले के नाम पर मौत को दावत देने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है।
इस संबंध में आरपीएफ पोस्ट प्रभारी आरए प्रसाद ने बताया कि मीडिया द्वारा मुझे इस बात की जानकारी हुई है कि रेल की पटरी पर मेला लगता है। जल्द ही मेले को हटवाया जाएगा। कहा कि यह खतरे वाली बात है और इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।