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अब बच्चों की बारी...हर हाल में निभाएं अपनी जिम्मेदारी
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कोरोना संक्रमण से बचाव का एकमात्र उपाय टीकाकरण है। जिस तरह से लोगों ने स्वयं को टीका लगवाया, युवाओं और किशोरों को प्रोत्साहित किया। उसी क्रम में अब बारी है पांच से 11 साल के बच्चों की। ऐसे में अभिभावक वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू होने पर आगे आएं और उनका टीकाकरण कराकर जागरूक एवं जिम्मेदार बने।
पिछले दो साल में कोरोना महामारी के चलते सबकुछ जहां का तहां थम गया था, वहीं इसने अपनों से दूर भी कर दिया था। उम्मीद बन कर आई वैक्सीनेशन ने जहां संक्रमण को समाप्त करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं घरों में कैद रहने की विवशता को भी समाप्त किया। बुजुर्गों, युवाओं और किशोरों का टीकाकरण तो अभियान के रूप में शुरू हो गया। ऐसे में बच्चों के टीकाकरण की चिंता उनके परिजनों को सतानी शुरू कर दी थी। सरकार द्वारा पांच से 11 साल के बच्चों के वैक्सीनेशन की घोषणा के बाद लोगों के बीच से यह चिंता समाप्त हो गई। हालांकि अब तक इनके वैक्सीनेशन को लेकर कोई तिथि निर्धारित नहीं हो सकी है, लेकिन समाजसेवी, स्वयंसेवी संगठन के पदाधिकारी एवं ग्राम प्रधानों द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा जा रहा है, जिससे टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होने पर कोई बच्चा इससे वंचित न रह सके।
टीकाकरण में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करना हम सबकी जिम्मेदारी है। बच्चों के टीकाकरण की तिथि आते ही अभिभावक तत्काल निर्धारित उम्र के अपने बच्चों का वैक्सीनेशन कराएं, जिससे संक्रमण से उन्हें बचाया जा सके।- शिव बचन यादव, समाजसेवी
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जागरूकता काफी जरूरी होती है। इसके लिए प्रत्येक लोगों को जागरूक होना पड़ेगा। पांच से 11 साल के बच्चों का टीकाकरण शुरू होते ही अभिभावक अपने बच्चों को लेकर केंद्र पर पहुंचे और टीकाकरण कराएं। अनुराग सिंह, समाजसेवी
कोरोना वैक्सीनेशन की ही देन रही कि तीसरी लहर का ज्यादा प्रभाव जनपद में नहीं दिखाई पड़ा और सब लोग सुरक्षित रहे। ऐसे में अपनी जिम्मेदारी सबको समझनी पड़ेगी और बच्चों के वैक्सीनेशन के लिए आगे आना पड़ेगा। - मंसा राय, रामपुर उर्फ साधोपुर ग्राम प्रधान
कोरोना संक्रमण पर विजय का एकमात्र उपचार टीकाकरण है। ऐसे में अब बारी है बच्चों की। एक जिम्मेदार नागरिक के साथ एक जिम्मेदार माता-पिता की तरह अपने बच्चों का टीकाकरण अवश्य कराएं। - राधेश्याम राय पप्पू, डेढ़गांवा ग्राम प्रधान
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पिछले दो साल में कोरोना महामारी के चलते सबकुछ जहां का तहां थम गया था, वहीं इसने अपनों से दूर भी कर दिया था। उम्मीद बन कर आई वैक्सीनेशन ने जहां संक्रमण को समाप्त करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं घरों में कैद रहने की विवशता को भी समाप्त किया। बुजुर्गों, युवाओं और किशोरों का टीकाकरण तो अभियान के रूप में शुरू हो गया। ऐसे में बच्चों के टीकाकरण की चिंता उनके परिजनों को सतानी शुरू कर दी थी। सरकार द्वारा पांच से 11 साल के बच्चों के वैक्सीनेशन की घोषणा के बाद लोगों के बीच से यह चिंता समाप्त हो गई। हालांकि अब तक इनके वैक्सीनेशन को लेकर कोई तिथि निर्धारित नहीं हो सकी है, लेकिन समाजसेवी, स्वयंसेवी संगठन के पदाधिकारी एवं ग्राम प्रधानों द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा जा रहा है, जिससे टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होने पर कोई बच्चा इससे वंचित न रह सके।
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टीकाकरण में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करना हम सबकी जिम्मेदारी है। बच्चों के टीकाकरण की तिथि आते ही अभिभावक तत्काल निर्धारित उम्र के अपने बच्चों का वैक्सीनेशन कराएं, जिससे संक्रमण से उन्हें बचाया जा सके।- शिव बचन यादव, समाजसेवी
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जागरूकता काफी जरूरी होती है। इसके लिए प्रत्येक लोगों को जागरूक होना पड़ेगा। पांच से 11 साल के बच्चों का टीकाकरण शुरू होते ही अभिभावक अपने बच्चों को लेकर केंद्र पर पहुंचे और टीकाकरण कराएं। अनुराग सिंह, समाजसेवी
कोरोना वैक्सीनेशन की ही देन रही कि तीसरी लहर का ज्यादा प्रभाव जनपद में नहीं दिखाई पड़ा और सब लोग सुरक्षित रहे। ऐसे में अपनी जिम्मेदारी सबको समझनी पड़ेगी और बच्चों के वैक्सीनेशन के लिए आगे आना पड़ेगा। - मंसा राय, रामपुर उर्फ साधोपुर ग्राम प्रधान
कोरोना संक्रमण पर विजय का एकमात्र उपचार टीकाकरण है। ऐसे में अब बारी है बच्चों की। एक जिम्मेदार नागरिक के साथ एक जिम्मेदार माता-पिता की तरह अपने बच्चों का टीकाकरण अवश्य कराएं। - राधेश्याम राय पप्पू, डेढ़गांवा ग्राम प्रधान