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बदहाली पर आंसू बहा रहा कामाख्या वन पार्क
ब्यूरो,अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Wed, 22 Mar 2017 12:15 AM IST
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कामाख्या वन पार्क
- फोटो : अमर उजाला
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कामाख्या धाम मंदिर परिसर में बना कामाख्या वन पार्क आज बदहाली पर आंसू बहा रहा है। पार्क में लगे फूल-पौधे सूख गए हैं। चारों तरफ गंदगी फैली हुई है। कभी इस पार्क में सुकून के पल बिताने वाले लोग अराजक तत्वों, शराबियों, जुआड़ियों की वजह से पार्क से दूरी बना लिए है।
मां कामाख्या धाम मंदिर परिसर में वर्ष 2011 में वन विभाग द्वारा कामाख्या वन पार्क का निर्माण होने से लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। लोग इस बात से खुश हो गए कि फुर्सत के समय लोग पार्क में सुकून के पल बिताएंगे और हुआ भी ऐसा ही। एक तरफ जहां बड़े लोग पार्क टहलते थे, वहीं बच्चे भी खेल-कूद के साथ झूले का लाभ उठाने थे।
पार्क की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी की भी स्थापना की गई थी। वर्तमान समय में पार्क पूरी तरह से बदहाल हो गया है। एक तरफ जहां झूला गायब है। हर समय में अराजक तत्वों के मौजूद रहते है।
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पार्क में शराबियों और जुआड़ियों का अड्डा बन गया है। पार्क में शादी-विवाद के आयोजनों के दौरान लोगों द्वारा पुरवा-पत्तल सहित अन्य सामान इधर-उधर फेंका जाता है, जिससे चारों तरफ गंदगी फैली हुई है।
पार्क में लगाए गए फूल-पौधे सूख चुके है। अगर कोई व्यक्ति अराजक तत्वों का विरोध करता है तो वह उससे मारपीट पर उतारू हो जाते है। कभी पार्क में सुकून के पल बिताने वाले लोग, इसकी बदहाली की वजह से इससे दूरी बनाते हुए यह कहने लगे है कि लोग पार्क की कदर न समझते हुए इसे बदहाली की तरफ से ले जा रहे हैं।
बबुआ उपाध्याय, सुनील सिंह, धर्मेन्द्र कुशवाहा, जितेंद्र माली, रमेश यादव, मुन्ना यादव आदि ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए पार्क की दशा को सुधरवाकर पहले जैसे कराने की मांग की है, जिससे लोगों को इसका लाभ मिल सके।
इस संबंध में जिलावनाधिकारी (डीएफओ) डा. एस राजामोहन ने बताया कि पार्क जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। वहां से प्रस्ताव पास होते ही पार्क के निर्माण का कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।
उधर पार्क में अराजक तत्वों के प्रवेश करने और जुआ खेलने की बात मेरे संज्ञान में नहीं है, ऐसी शिकायत मिलती है तो पुलिस अधिकारियों से इस बारे में अवगत कराया जाएगा।
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मां कामाख्या धाम मंदिर परिसर में वर्ष 2011 में वन विभाग द्वारा कामाख्या वन पार्क का निर्माण होने से लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। लोग इस बात से खुश हो गए कि फुर्सत के समय लोग पार्क में सुकून के पल बिताएंगे और हुआ भी ऐसा ही। एक तरफ जहां बड़े लोग पार्क टहलते थे, वहीं बच्चे भी खेल-कूद के साथ झूले का लाभ उठाने थे।
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पार्क की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी की भी स्थापना की गई थी। वर्तमान समय में पार्क पूरी तरह से बदहाल हो गया है। एक तरफ जहां झूला गायब है। हर समय में अराजक तत्वों के मौजूद रहते है।
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पार्क में शराबियों और जुआड़ियों का अड्डा बन गया है। पार्क में शादी-विवाद के आयोजनों के दौरान लोगों द्वारा पुरवा-पत्तल सहित अन्य सामान इधर-उधर फेंका जाता है, जिससे चारों तरफ गंदगी फैली हुई है।
पार्क में लगाए गए फूल-पौधे सूख चुके है। अगर कोई व्यक्ति अराजक तत्वों का विरोध करता है तो वह उससे मारपीट पर उतारू हो जाते है। कभी पार्क में सुकून के पल बिताने वाले लोग, इसकी बदहाली की वजह से इससे दूरी बनाते हुए यह कहने लगे है कि लोग पार्क की कदर न समझते हुए इसे बदहाली की तरफ से ले जा रहे हैं।
बबुआ उपाध्याय, सुनील सिंह, धर्मेन्द्र कुशवाहा, जितेंद्र माली, रमेश यादव, मुन्ना यादव आदि ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए पार्क की दशा को सुधरवाकर पहले जैसे कराने की मांग की है, जिससे लोगों को इसका लाभ मिल सके।
इस संबंध में जिलावनाधिकारी (डीएफओ) डा. एस राजामोहन ने बताया कि पार्क जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। वहां से प्रस्ताव पास होते ही पार्क के निर्माण का कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।
उधर पार्क में अराजक तत्वों के प्रवेश करने और जुआ खेलने की बात मेरे संज्ञान में नहीं है, ऐसी शिकायत मिलती है तो पुलिस अधिकारियों से इस बारे में अवगत कराया जाएगा।