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टीके में पुरुषों ने मारी बाजी, महिलाएं रहीं पीछे
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गाजीपुर। कोरोना महामारी से बचाव का एक मात्र उपाय टीकाकरण है। ऐसे में जब स्वास्थ्य के सुरक्षा की बात हो तो वहां भय और भ्रांति को तोड़कर लोग आगे आए और पूरे उत्साह के साथ टीकाकरण कराया। कोरोना टीकाकरण अभियान में जहां पुरुषों ने बाजी मार ली है, वहीं महिलाएं पीछे हैं। स्थिति यह है कि अब तक 2809349 पुरुष तो 2697071 महिलाओं का टीकाकरण हुआ है। आंकड़ों को देखा जाए तो पुरुषों ने बाजी तो जरूर मारी है, लेकिन महिलाएं भी भय के माहौल को दरकिनार कर कोरोना का टीका लगवाकर अपने आप सुरक्षित किया है।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों एव फ्रंटलाइन वर्करों का टीकाकरण शुुरू हुआ। स्वास्थ्य कर्मियों के बाद 45 वर्ष से 60 वर्ष के आयु वर्ग और बीमार मरीजों का टीकाकरण शुरू किया गया था। हालांकि मन में भय और भ्रांति के बीच उस दौरान टीकाकरण को रफ्तार नहीं मिल सकी। ऐसे में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों का जब टीकाकरण जब शुरू हुआ तो केंद्रों पर भीड़ लगनी शुरू हो गई। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने महिलाओं के लिए अलग केंद्र बनाया, लेकिन वहां भी रफ्तार धीमी ही देखी गई। जब विभाग की ओर से गांव में शिविर का आयोजन कर टीकाकरण अभियान को रफ्तार देने का प्रयास किया गया। इसका परिणाम भी बेहतर रहा, लेकिन पुरुषों को महिलाएं टीकाकरण अभियान में पीछे नहीं कर सकी। आंकड़ों को देखा जाए तो 2809349 पुरुष और 2697071 महिलाओं का टीकाकरण हुआ है। अभी भी एक लाख 12 हजार 278 का लंबा फासला है। इस संबंध में एसीएमओ डा. उमेश कुमार ने बताया कि टीकाकरण अभियान के दौरान महिलाओं ने रूचि कम दिखाई। जबकि पुरुषों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। जागरूक करने पर महिलाओं द्वारा टीकाकरण कराया गया। वैसे कहा जा सकता है भय और भ्रांति को तोड़कर महिलाओं ने भी टीका लगवाकर अपने आप को सुरक्षित कर लिया है।
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कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों एव फ्रंटलाइन वर्करों का टीकाकरण शुुरू हुआ। स्वास्थ्य कर्मियों के बाद 45 वर्ष से 60 वर्ष के आयु वर्ग और बीमार मरीजों का टीकाकरण शुरू किया गया था। हालांकि मन में भय और भ्रांति के बीच उस दौरान टीकाकरण को रफ्तार नहीं मिल सकी। ऐसे में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों का जब टीकाकरण जब शुरू हुआ तो केंद्रों पर भीड़ लगनी शुरू हो गई। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने महिलाओं के लिए अलग केंद्र बनाया, लेकिन वहां भी रफ्तार धीमी ही देखी गई। जब विभाग की ओर से गांव में शिविर का आयोजन कर टीकाकरण अभियान को रफ्तार देने का प्रयास किया गया। इसका परिणाम भी बेहतर रहा, लेकिन पुरुषों को महिलाएं टीकाकरण अभियान में पीछे नहीं कर सकी। आंकड़ों को देखा जाए तो 2809349 पुरुष और 2697071 महिलाओं का टीकाकरण हुआ है। अभी भी एक लाख 12 हजार 278 का लंबा फासला है। इस संबंध में एसीएमओ डा. उमेश कुमार ने बताया कि टीकाकरण अभियान के दौरान महिलाओं ने रूचि कम दिखाई। जबकि पुरुषों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। जागरूक करने पर महिलाओं द्वारा टीकाकरण कराया गया। वैसे कहा जा सकता है भय और भ्रांति को तोड़कर महिलाओं ने भी टीका लगवाकर अपने आप को सुरक्षित कर लिया है।
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