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करवा चौथ आज, सुहागिनें रखेंगी व्रत
ब्यूरो/अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Thu, 29 Oct 2015 11:05 PM IST
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पति की दीर्घायु की कामना को लेकर शुक्रवार को सुहागिनें करवा चौथ का व्रत रखेंगी। इस पर्व को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। गुरुवार को शहर के बाजारों में जहां पूजा सामग्री की खरीददारी होती रही, वहीं सर्राफा
बाजार भी गुलजार दिखे। सजने-संवरने के क्रम में शहर के ब्यूटीपार्लरों में महिलाएं मेहंदी रचाने के लिए पहुंचीं। इस पर्व पर निर्जला व्रत रहकर सुहागिन महिलाएं पूजा-पाठ करती हैं तथा शाम को शृंगार कर चलनी में पति की दीदार
कर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। ऐसी मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत महापुण्य दायक होता है। इस व्रत को करने से महिलाओं के पति की आयु जहां लंबी होती है, वहीं उसे सुख-समृद्धि भी मिलती है। पांडवों की रक्षा के लिए इस ब्रत
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को द्रोपदी ने भी रखा था। चंद्रमा निकलने के साथ ही चलनी से पति का दर्शन किया जाता है। बाद में पति के हाथ से ही खाकर व्रत का पारण किया जाता है। पर्व से एक दिन पूर्व गुरुवार को महिलाओं ने पूजा-पाठ की सामग्री के
साथ ही कपड़ों सहित सूप, चलनी, कुशा, मिट्टी के बर्तन समेत रोली, चंदन आदि पूजा सामग्री की खरीदारी की। मिश्रबाजार से लेकर टाऊनहाल तक पर्व से संबंधित कई दूकानें सजाई गई थी। शृंगार की दूकानों पर भी चूड़ी, कंगन,
बिंदी और प्रसाधनों की खरीद का क्रम बना रहा। पर्व के चलते सर्राफा बाजार भी गुलजार रहा। शृंगार के क्रम में गहनों की बड़ी भूमिका होती है। इस मौके पर महिलाओं ने नए फैशन और डिजाइनर गहनों की खरीदारी की। वहीं पुरुषों ने अपनी पत्नियों को उपहार में देने के लिए आभूषण की खरीदारी की।
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बाजार भी गुलजार दिखे। सजने-संवरने के क्रम में शहर के ब्यूटीपार्लरों में महिलाएं मेहंदी रचाने के लिए पहुंचीं। इस पर्व पर निर्जला व्रत रहकर सुहागिन महिलाएं पूजा-पाठ करती हैं तथा शाम को शृंगार कर चलनी में पति की दीदार
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कर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। ऐसी मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत महापुण्य दायक होता है। इस व्रत को करने से महिलाओं के पति की आयु जहां लंबी होती है, वहीं उसे सुख-समृद्धि भी मिलती है। पांडवों की रक्षा के लिए इस ब्रत
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को द्रोपदी ने भी रखा था। चंद्रमा निकलने के साथ ही चलनी से पति का दर्शन किया जाता है। बाद में पति के हाथ से ही खाकर व्रत का पारण किया जाता है। पर्व से एक दिन पूर्व गुरुवार को महिलाओं ने पूजा-पाठ की सामग्री के
साथ ही कपड़ों सहित सूप, चलनी, कुशा, मिट्टी के बर्तन समेत रोली, चंदन आदि पूजा सामग्री की खरीदारी की। मिश्रबाजार से लेकर टाऊनहाल तक पर्व से संबंधित कई दूकानें सजाई गई थी। शृंगार की दूकानों पर भी चूड़ी, कंगन,
बिंदी और प्रसाधनों की खरीद का क्रम बना रहा। पर्व के चलते सर्राफा बाजार भी गुलजार रहा। शृंगार के क्रम में गहनों की बड़ी भूमिका होती है। इस मौके पर महिलाओं ने नए फैशन और डिजाइनर गहनों की खरीदारी की। वहीं पुरुषों ने अपनी पत्नियों को उपहार में देने के लिए आभूषण की खरीदारी की।