{"_id":"61bb6ba4218d7708837aa9d1","slug":"mantra-application-will-keep-records-safe-ghazipur-news-vns6282738131","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिकार्ड को सुरक्षित रखेगा मंत्र एप्लीकेशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिकार्ड को सुरक्षित रखेगा मंत्र एप्लीकेशन
विज्ञापन
पहले संस्थागत प्रसव का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में दिक्कत आती थी लेकिन मंत्र एप्लीकेशन के माध्यम से प्रसव का ऑनलाइन डाटा फीडिंग, रियल टाइम मानीटरिंग, महिलाओं के उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) की जांच के साथ समय पर सही उपचार किया जा सकेगा। ये बातें एसीएमओ डॉ. केके वर्मा ने बुधवार को सीएमओ कार्यालय में प्रशिक्षण कार्यशाला में मंत्र एप का शुभारंभ करते कहीं।
कार्यशाला में स्टाफ नर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण लेने वाले स्टाफ नर्स, नर्स मेंटर एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीण इलाके की एएनएम को एप्लीकेशन के माध्यम से ऑनलाइन करने की जानकारी देंगे। प्रशिक्षक और यूनिसेफ के जोनल कोऑर्डिनेटर मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इस एप पर ऑनलाइन डाटा फीडिंग हो जाने से कमजोर बच्चे, कम वजन के बच्चों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर उनका समय से इलाज किया जा सकता है, जिससे आने वाले समय में कुपोषण में कमी के साथ ही साथ मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता रामप्रवेश सिंह ने बताया कि अब आने वाले समय में सभी स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों पर स्टाफ नर्स और एएनएम के द्वारा प्रसव के बाद डाटा को इस एप के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा, जिससे शासन द्वारा मिलने वाला लाभ का भुगतान और सही समय में सही उपचार भी प्रदान किया जा सके। इस वर्कशॉप में यूनिसेफ के डीएमसी अजय उपाध्याय, यूपीटीएसयू से प्रतिनिधि एवं स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
विज्ञापन
कार्यशाला में स्टाफ नर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण लेने वाले स्टाफ नर्स, नर्स मेंटर एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीण इलाके की एएनएम को एप्लीकेशन के माध्यम से ऑनलाइन करने की जानकारी देंगे। प्रशिक्षक और यूनिसेफ के जोनल कोऑर्डिनेटर मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इस एप पर ऑनलाइन डाटा फीडिंग हो जाने से कमजोर बच्चे, कम वजन के बच्चों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर उनका समय से इलाज किया जा सकता है, जिससे आने वाले समय में कुपोषण में कमी के साथ ही साथ मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता रामप्रवेश सिंह ने बताया कि अब आने वाले समय में सभी स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों पर स्टाफ नर्स और एएनएम के द्वारा प्रसव के बाद डाटा को इस एप के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा, जिससे शासन द्वारा मिलने वाला लाभ का भुगतान और सही समय में सही उपचार भी प्रदान किया जा सके। इस वर्कशॉप में यूनिसेफ के डीएमसी अजय उपाध्याय, यूपीटीएसयू से प्रतिनिधि एवं स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
विज्ञापन