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Ghazipur News: जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन को अधिवक्ताओं ने दिया समर्थन
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सैदपुर तहसील में पत्रक देने पहुंचे दी बार एसोसिएशन के अधिवक्ता। स्रोत- बार एसोसिएशन
औड़िहार। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों द्वारा किए जा रहे धरना प्रदर्शन को शुक्रवार को सैदपुर तहसील के दी बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने अपना समर्थन दिया। नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों का धरना काफी तटस्थ रूप से जारी है।
अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित सात सूत्री ज्ञापन सैदपुर नायब तहसीलदार विश्राम यादव को सौंपा। इस दौरान अधिवक्ता केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय तक पहुंचे।
इस मामले में केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से सात सवाल पूछे। जिसमें पूछा कि क्या नीट पेपर मामले में जिम्मेदारी तय की गई है। अब तक दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई। प्रधानमंत्री युवाओं से सीधा आमने-सामने संवाद क्यों नहीं कर पा रहे हैं। इस प्रश्न पर सरकार की जवाबदेही क्या है।
सरकार देश के नौजवानों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार क्यों कर रही है। देश के युवा आंदोलन पर सरकार ने एनएसए क्यों लगाया हुआ है। देश के छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज क्यों हो रहा है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्या सुनने के बजाय उनका दमन कर रही है।
पूरे देश में सड़क से लेकर संसद तक लोग संघर्ष कर रहे हैं, जिसे हमारा भी समर्थन है। संसद में चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाना चाहिए।
छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में संगठन के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष उमाशंकर सिंह यादव, रामानंद यादव, प्रेम नारायण यादव, अवनीश चंद्र पाल आदि मौजूद रहे।
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अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित सात सूत्री ज्ञापन सैदपुर नायब तहसीलदार विश्राम यादव को सौंपा। इस दौरान अधिवक्ता केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय तक पहुंचे।
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इस मामले में केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से सात सवाल पूछे। जिसमें पूछा कि क्या नीट पेपर मामले में जिम्मेदारी तय की गई है। अब तक दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई। प्रधानमंत्री युवाओं से सीधा आमने-सामने संवाद क्यों नहीं कर पा रहे हैं। इस प्रश्न पर सरकार की जवाबदेही क्या है।
सरकार देश के नौजवानों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार क्यों कर रही है। देश के युवा आंदोलन पर सरकार ने एनएसए क्यों लगाया हुआ है। देश के छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज क्यों हो रहा है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्या सुनने के बजाय उनका दमन कर रही है।
पूरे देश में सड़क से लेकर संसद तक लोग संघर्ष कर रहे हैं, जिसे हमारा भी समर्थन है। संसद में चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाना चाहिए।
छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में संगठन के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष उमाशंकर सिंह यादव, रामानंद यादव, प्रेम नारायण यादव, अवनीश चंद्र पाल आदि मौजूद रहे।