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हृषीकेश के लेखन को भुला पाना संभव नहीं ..

Wed, 10 Nov 2021 11:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 11:42 PM IST
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It is not possible to forget the writings of Hrishikesh.
वरिष्ठ साहित्यकार हृषीकेश की पुण्यतिथि समाज और साहित्यकार विषयक गोष्ठी के रूप में बुधवार को भारद्वाज भवन पर मनाई गई। इस अवसर पर विषय प्रवर्तन करते हुए भाकपा के जिला सचिव अमेरिका सिंह यादव ने कहा कि साहित्य वही अमर होता है जो समाज से सरोकार रखता है। समाज की पीड़ा को उकेरता है। आम जन के दर्द की आवाज बन जाता है और समाधान भी सुझाता है। हृषीकेश इसी श्रेणी के साहित्यकार, कथाकार थे। उन्होंने जीवन भर सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनके लेखन को भुला पाना संभव नहीं है।
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मुख्य वक्ता डॉ. रामबदन सिंह ने कहा कि कहानी, कल्पना, ज्ञानोदय, विकल्प, नई कहानी जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित उनके लेख एवं रचनाओं ने उनकी कलम का लोहा मनवाया। कत्लेआम, सपने, मिस सोलोमन का जहन्नुम, पोस्टकार्ड, शिविर, आर्केस्ट्रा जैसी कहानियां बेहद लोकप्रिय हुईं। कमलेश्वर के उपन्यास कितने पाकिस्तान की समीक्षा साहित्य जगत में काफी चर्चित हुई। उन्होंने कहा कि वह मात्र लेखक ही नहीं रहे बल्कि मार्क्सवादी दर्शन के समर्थक भी थे। सच्चा साहित्यकार, पत्रकार समाज के यथार्थ का चित्रण करता है एवं सत्ता से प्रश्न करता है। ऐसे ही हृषीकेश थे। उन्हें याद करने से हम सभी को प्रेरणा मिलती है। इस अवसर पर काजी फ़रीद, डॉ. इक़बाल अंसारी, ईश्वरलाल गुप्ता, डॉ. पियूषकांत सिंह, अनूप कुमार, विकास यादव ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किया। अध्यक्षता सुरजीत बहादुर ने की।
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