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इस्लाम दुनिया का सबसे बेहतर मजहब: मौलाना कादिरी
संवाददाता, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Mon, 23 Feb 2015 11:20 PM IST
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विश्वस्तर पर अगर मुस्लिम कौम का जायजा लिया जाए तो उनकी हालत अच्छी नहीं
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है। जिसका मुख्य कारण उनमें आपसी मतभेद और मसलकी विरोध है। हमारे दीनी
रहनुमाओं को चाहिए की ऐसे मौकों पर कौैम व मिल्लत में आपसी भाईचारा कायम
करने वाले विषयों पर ज्यादा से ज्यादा प्रकाश डालें, ताकि कौम के लोग एकजुट
हो सके।
यह बातें मौलाना सैय्यद मुहम्मद कादिरी रिजवी ने दिलदारनगर क्षेत्र के ग्राम देवैथा स्थित मदरसा दारुल उलूम साबिरिया रिजविया के प्रांगण में आयोजित ताजदार मदीना कांफ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया मुसलमानों की दुश्मन बनी हुई है जबकि मुसलिम कौम पूरी दुनिया में दबे कुचले व मजलूमों को इंसाफ और हक दिलाने के लिए आगे रही है। इसके पीछे खुद मुसलिमों में आपसी मतभेद ही मुख्य वजह है।
कौम को इस बीमारी से निजात हमारे दीनी रहबर ही दिला सकते हैं। आज के हालात को ध्यान में रखते हुए उन्हें कौम व मिल्लत में एक जुटता कायम करने पर ज्यादा जोर देना होगा। कारी नूर आलम बनारसी ने कहा कि मजहब ए इस्लाम से बेहतर दुनिया में कोई दूसरा मजहब नहीं है। इस मजहब ने अमन का संदेश दिया है। इस मजहब के मानने वाले अमन पसंद हैं, लेकिन दुनिया भर के इस्लाम विरोधी मिलकर मजहब को दहशतगर्दी की शिक्षा देने वाला मजहब और इस मजहब के संदेश पर अमल करने वाली मुसलिम कौम को दहशतगर्द साबित करने पर अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं।
लेकिन वो अपने इस नापाक इरादों में कभी कामयाब नहीं होंगे। जरूरत इस बात की है कि मुस्लिम कौमें अपने मतभेदों को भुलाकर एकजुट हों। जलसा के अध्यक्ष मौलाना हाजी रियाज अहमद खां ने कहा कि इस्लाम ही वो अकेला मजहब है जिसने नेकी करने और बुराई से दूर रहने की शिक्षा दी है। इस जलसा में उपस्थित शायरे इस्लाम जनाब एहसान शाकिर आजम गढ़ी , जनाब कोइल लखनवी, जनाब नसीम सहर गयावी ,नूर मुजस्सम कानपुरी ने नाते पाक का नजराना पेश करके जलसा गाह को मुअत्तर किए रखा। जलसे का आगाज हाफिज व कारी अबदुलबारी के तिलावत कलाम पाक से हुआ।
अध्यक्षता मौलाना अल्हाज रियाज अहमद शमसी कादरी ने और संचालन हसन रजा अतहर ने अंजाम दिया। खादिम ए मदरसा मौलाना हैदर अली खां ने मेहमानों का आभार व्यक्त किया। जलसा मौलाना गुलाम मुहम्मद नूरूल कादरी की सरपरस्ती ,हाफिज वकारी मौलाना उम्र नूरानी की क्यादत और हाफिज व कारी गुलाम मुहिउद्दीन की हिमायत में हुआ।
इस मौके पर बतौरे खास मेहमानों में मौलाना नौशाद खां, मौलाना हैदर अली,मौलाना हुसैन, मौलाना कलीमुद्दीन शमसी,मौलाना सय्यद अकमल , मौलाना अतीकुर्रहमान ,हाफिज व कारी नूर मुहम्मद, मौलाना अबदुर्रहीम मिस्बाही, मौलाना जलालुद्दीन,सूफी सलाहुद्दीन, मौलाना नदीमुद्दीन शमसी मिस्बाही, हाफिज व कारी आसिफ मौलाना मकसूदुल हक, मौलाना इरफान,मौलाना फहीम अख्तर,मौलाना साबिर,हाफिज साजिद आदि उपस्थित थे।
यह बातें मौलाना सैय्यद मुहम्मद कादिरी रिजवी ने दिलदारनगर क्षेत्र के ग्राम देवैथा स्थित मदरसा दारुल उलूम साबिरिया रिजविया के प्रांगण में आयोजित ताजदार मदीना कांफ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया मुसलमानों की दुश्मन बनी हुई है जबकि मुसलिम कौम पूरी दुनिया में दबे कुचले व मजलूमों को इंसाफ और हक दिलाने के लिए आगे रही है। इसके पीछे खुद मुसलिमों में आपसी मतभेद ही मुख्य वजह है।
कौम को इस बीमारी से निजात हमारे दीनी रहबर ही दिला सकते हैं। आज के हालात को ध्यान में रखते हुए उन्हें कौम व मिल्लत में एक जुटता कायम करने पर ज्यादा जोर देना होगा। कारी नूर आलम बनारसी ने कहा कि मजहब ए इस्लाम से बेहतर दुनिया में कोई दूसरा मजहब नहीं है। इस मजहब ने अमन का संदेश दिया है। इस मजहब के मानने वाले अमन पसंद हैं, लेकिन दुनिया भर के इस्लाम विरोधी मिलकर मजहब को दहशतगर्दी की शिक्षा देने वाला मजहब और इस मजहब के संदेश पर अमल करने वाली मुसलिम कौम को दहशतगर्द साबित करने पर अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं।
लेकिन वो अपने इस नापाक इरादों में कभी कामयाब नहीं होंगे। जरूरत इस बात की है कि मुस्लिम कौमें अपने मतभेदों को भुलाकर एकजुट हों। जलसा के अध्यक्ष मौलाना हाजी रियाज अहमद खां ने कहा कि इस्लाम ही वो अकेला मजहब है जिसने नेकी करने और बुराई से दूर रहने की शिक्षा दी है। इस जलसा में उपस्थित शायरे इस्लाम जनाब एहसान शाकिर आजम गढ़ी , जनाब कोइल लखनवी, जनाब नसीम सहर गयावी ,नूर मुजस्सम कानपुरी ने नाते पाक का नजराना पेश करके जलसा गाह को मुअत्तर किए रखा। जलसे का आगाज हाफिज व कारी अबदुलबारी के तिलावत कलाम पाक से हुआ।
अध्यक्षता मौलाना अल्हाज रियाज अहमद शमसी कादरी ने और संचालन हसन रजा अतहर ने अंजाम दिया। खादिम ए मदरसा मौलाना हैदर अली खां ने मेहमानों का आभार व्यक्त किया। जलसा मौलाना गुलाम मुहम्मद नूरूल कादरी की सरपरस्ती ,हाफिज वकारी मौलाना उम्र नूरानी की क्यादत और हाफिज व कारी गुलाम मुहिउद्दीन की हिमायत में हुआ।
इस मौके पर बतौरे खास मेहमानों में मौलाना नौशाद खां, मौलाना हैदर अली,मौलाना हुसैन, मौलाना कलीमुद्दीन शमसी,मौलाना सय्यद अकमल , मौलाना अतीकुर्रहमान ,हाफिज व कारी नूर मुहम्मद, मौलाना अबदुर्रहीम मिस्बाही, मौलाना जलालुद्दीन,सूफी सलाहुद्दीन, मौलाना नदीमुद्दीन शमसी मिस्बाही, हाफिज व कारी आसिफ मौलाना मकसूदुल हक, मौलाना इरफान,मौलाना फहीम अख्तर,मौलाना साबिर,हाफिज साजिद आदि उपस्थित थे।