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Ghazipur News: कोल्ड डायरिया और निमोनिया के बढ़े मरीज
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कंपकपाने वाली ठंड में कोल्ड डायरिया और निमोनिया से बीमार पड़ने वाले मरीजों की संख्या मेें लगातार वृद्धि होती जा रही है। यही नहीं सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित भी ओपीडी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि प्रतिदिन 20 से 25 कोल्ड डायरिया के मरीज उपचार करा रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर एहतियात बरतने एवं जरूरत पड़ने पर घर से बाहर निकलने की सलाह दी है।
न्यूनतम तापमान गिरने से ठंड ने जनपद को चपेट में ले लिया है। कोहरा, सर्द हवा और गलन एक साथ लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। धूप भी लोगों को राहत नहीं पहुंचा पा रहे हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही लोगों के लिए कष्टकारी हो जा रही है। खान-पान और संयमित भोजन न करने की स्थिति में और ठंड लगने से लोग कोल्ड डायरिया के चपेट में आ रहे हैं।
प्रतिदिन 20 से 25 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि पांच से छह मरीज वार्ड में भर्ती हो रहे हैं। यहीं नहीं निमोनिया से जहां बच्चे अधिक प्रभावित हैं, बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों की थोड़ी लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है। कोल्ड डायरिया में ठंड लगने के कारण दस्त और उल्टी हो रही है, जबकि निमोनिया में सर्दी जुकाम से बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। शुरुआती दौर में बीमार बच्चे को डॉक्टर को नहीं दिखाने पर तबीयत ज्यादा बिगड़ रही है।
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रूम हीटर से बच्चों को रखें दूर
गाजीपुर। सीएमएस डा. राजेश सिंह ने बताया कि बच्चे को रूम हीटर से दूर रखें। कुछ लोग कमरे को गर्म करने के लिए रूम हीटर या अंगेठी जला देते हैं। जब कमरे में हानिकारक गैस या धुंआ भर जाता है तो बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होने वाली लगती है, उनका दम घुटने लगता है। कभी कभी ऐसे बच्चों को डॉक्टर के पास भी ले जाना पड़ जाता है। ज्यादा समय तक धुंआ के बीच रहने वाले बच्चे अस्थमा हो सकता है। कमरा गर्म करने के लिए कुछ देर के लिए रूम हीटर चलाते हैं तो उस दौरान बच्चे के साथ अंदर न रहे। बच्चों के फेफड़े में धुंआ जाने से दिक्कत बढ़ जाती है।
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न्यूनतम तापमान गिरने से ठंड ने जनपद को चपेट में ले लिया है। कोहरा, सर्द हवा और गलन एक साथ लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। धूप भी लोगों को राहत नहीं पहुंचा पा रहे हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही लोगों के लिए कष्टकारी हो जा रही है। खान-पान और संयमित भोजन न करने की स्थिति में और ठंड लगने से लोग कोल्ड डायरिया के चपेट में आ रहे हैं।
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प्रतिदिन 20 से 25 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि पांच से छह मरीज वार्ड में भर्ती हो रहे हैं। यहीं नहीं निमोनिया से जहां बच्चे अधिक प्रभावित हैं, बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों की थोड़ी लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है। कोल्ड डायरिया में ठंड लगने के कारण दस्त और उल्टी हो रही है, जबकि निमोनिया में सर्दी जुकाम से बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। शुरुआती दौर में बीमार बच्चे को डॉक्टर को नहीं दिखाने पर तबीयत ज्यादा बिगड़ रही है।
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रूम हीटर से बच्चों को रखें दूर
गाजीपुर। सीएमएस डा. राजेश सिंह ने बताया कि बच्चे को रूम हीटर से दूर रखें। कुछ लोग कमरे को गर्म करने के लिए रूम हीटर या अंगेठी जला देते हैं। जब कमरे में हानिकारक गैस या धुंआ भर जाता है तो बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होने वाली लगती है, उनका दम घुटने लगता है। कभी कभी ऐसे बच्चों को डॉक्टर के पास भी ले जाना पड़ जाता है। ज्यादा समय तक धुंआ के बीच रहने वाले बच्चे अस्थमा हो सकता है। कमरा गर्म करने के लिए कुछ देर के लिए रूम हीटर चलाते हैं तो उस दौरान बच्चे के साथ अंदर न रहे। बच्चों के फेफड़े में धुंआ जाने से दिक्कत बढ़ जाती है।