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यूपीः 28 साल पहले शिक्षक के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट मामले में तत्कालीन एसओ समेत पांच दोषी
Thu, 24 Oct 2019 11:19 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Thu, 24 Oct 2019 11:19 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के गाजीपुर जिले के शिक्षक के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट मामले में तत्कालीन एसओ समेत पांच दोषी पाए गए हैं। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम दुर्गेश ने मरदह थाना क्षेत्र में ग्राम घरिहा के शिक्षक कुबेरनाथ सिंह के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट मामले की अपील की सुनवाई करते हुए 1991 में तत्कालीन थानाध्यक्ष रहे मंसूर अहमद काजी सहित पांच को दोषी करार दिया।
सभी अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में अदालत ने जेल भेज दिया। सजा पर सुनवाई के लिए 25 अक्तूबर की तिथि नियत की गई है। प्रकरण के मुताबिक मरदह थाने के ग्राम घरिहां में 14 अप्रैल 1991 को तत्कालीन थानाध्यक्ष मंसूर अहमद काजी, एसआई सुदामा यादव, एसआई मुन्नीलाल एवं अन्य पुलिस कर्मी पारसनाथ सिंह और अनिल सिंह के भूमि विवाद में गांव आए थे।
वे गालियां दे रहे थे जिसका विरोध राष्ट्रपति से पुरस्कृत रिटायर्ड प्रिंसिपल कुबेरनाथ सिंह ने किया। इस पर पारसनाथ सिंह आदि के साथ थानाध्यक्ष एमए काजी सहित पुलिसकर्मी उन्हें जीप में बैठाकर थाने ले गए। रास्ते में उनकी पिटाई भी की जिससे उनका हाथ भी टूट गया।
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इस संबंध में कुबेरनाथ सिंह ने जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की और प्रदेश सरकार से गुहार लगाई। इस मामले कोर्ट ने सात सिपाहियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। इसी बीच कुबेरनाथ सिंह का निधन हो गया। उसके बाद उनके पुत्र बीएचयू के एजुकेशन फैकल्टी के पूर्व डीन और जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा बिहार के कुलपति हरिकेश सिंह ने शासन में इसकी शिकायत की।
सीबीसीआईडी जांच के बाद थानाध्यक्ष मरदह काजी एवं गांव के पारसनाथ सिंह सहित 15 लोगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत हुआ। विचारण के दौरान तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट देवेंद्र गोस्वामी की अदालत में अभियोजन की ओर से 12 गवाह पेश किए गए और बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए गए।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 30 अक्तूबर 2014 को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इस निर्णय के विरुद्ध अपील प्रो. हरिकेश सिंह ने सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में प्रस्तुत की। अभियोजन के अधिवक्ता संजय कुमार राय और बचाव पक्ष के अधिवक्ता को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की अदालत ने एमए काजी, कांस्टेबल श्याम नारायण सिंह और घरिहा गांव के पारसनाथ सिंह, सुरेश सिंह और पीयूषकांत सिंह को दोषी पाते हुए न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया।
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सभी अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में अदालत ने जेल भेज दिया। सजा पर सुनवाई के लिए 25 अक्तूबर की तिथि नियत की गई है। प्रकरण के मुताबिक मरदह थाने के ग्राम घरिहां में 14 अप्रैल 1991 को तत्कालीन थानाध्यक्ष मंसूर अहमद काजी, एसआई सुदामा यादव, एसआई मुन्नीलाल एवं अन्य पुलिस कर्मी पारसनाथ सिंह और अनिल सिंह के भूमि विवाद में गांव आए थे।
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वे गालियां दे रहे थे जिसका विरोध राष्ट्रपति से पुरस्कृत रिटायर्ड प्रिंसिपल कुबेरनाथ सिंह ने किया। इस पर पारसनाथ सिंह आदि के साथ थानाध्यक्ष एमए काजी सहित पुलिसकर्मी उन्हें जीप में बैठाकर थाने ले गए। रास्ते में उनकी पिटाई भी की जिससे उनका हाथ भी टूट गया।
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इस संबंध में कुबेरनाथ सिंह ने जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की और प्रदेश सरकार से गुहार लगाई। इस मामले कोर्ट ने सात सिपाहियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। इसी बीच कुबेरनाथ सिंह का निधन हो गया। उसके बाद उनके पुत्र बीएचयू के एजुकेशन फैकल्टी के पूर्व डीन और जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा बिहार के कुलपति हरिकेश सिंह ने शासन में इसकी शिकायत की।
सीबीसीआईडी जांच के बाद थानाध्यक्ष मरदह काजी एवं गांव के पारसनाथ सिंह सहित 15 लोगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत हुआ। विचारण के दौरान तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट देवेंद्र गोस्वामी की अदालत में अभियोजन की ओर से 12 गवाह पेश किए गए और बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए गए।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 30 अक्तूबर 2014 को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इस निर्णय के विरुद्ध अपील प्रो. हरिकेश सिंह ने सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में प्रस्तुत की। अभियोजन के अधिवक्ता संजय कुमार राय और बचाव पक्ष के अधिवक्ता को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की अदालत ने एमए काजी, कांस्टेबल श्याम नारायण सिंह और घरिहा गांव के पारसनाथ सिंह, सुरेश सिंह और पीयूषकांत सिंह को दोषी पाते हुए न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया।