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Ghazipur News: गो-आश्रय स्थलों में धूप से बचाव के इंतजाम नाकाफी
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गाजीपुर। छुट्टा गोवंश को संरक्षित करने के लिए जिले में बनाया गए आश्रय स्थल में धूप और गर्मी से बचने के लिए अब तक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। ऐसे में पशु धूप में रह रहे हैं। वहीं आश्रय स्थल में साफ-सफाई का भी वहीं हाल है। ऐसे में पशु पालन विभाग की ओर से लापरवाही साफ दिखाई दे रही हैं।
जिले में छुटा गोवंश को संरक्षित करने के लिए जिले में 57 गो-आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इसमें करीब आठ हजार 36 पशु संरक्षित है। तापमान में दिन प्रति दिन वृद्धि हो रही है। तेज धूप और गर्मी से लोग परेशान हैं। यही हाल पशुओं का भी है। ऐसे में पशुपालन विभाग द्वारा निर्देश जारी किया गया था, गोवंश को धूप एवं गर्मी से बचाने के लिए छायादार काऊ शेड, तिरपाल इत्यादि की व्यवस्था, गोवंश के लिए गर्म हवाओं एवं हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में दिन में तीन से चार बार स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाए तथा चरही की नियमित रूप से साफ-सफाई की जाए। ग्रीष्मकाल में संक्रमण तेजी से फैलता है, जिसको रोकने के लिए गोवंश के चारा खाने वाले स्थान की नियमित रूप से साफ-सफाई की जाए तथा गोवंश को बासी चारा न खिलाए, जिससे कि गोवंश की मृत्यु न होने पाए। शहर के आरटीआई मैदान के पास स्थित गो-आश्रय स्थल में धूप और गर्मी से बचाव के लिए व्यवस्था नदारद है। वहीं परिसर में हर तरफ गोबर फैला हुआ था। पशुओं को चारा देने के लिए नाद में भी गंदगी है। गो आश्रय स्थल में करीब 130 गोवंश संरक्षित हैं। गो आश्रय स्थल में तिरपाल की व्यवस्था नहीं होने से धूप में पशुओं रहना पड़ हैं। वही पशुओं को खाने के लिए 60 क्विंटल भूसा, 20 किलो चूनी सहित गुड़ आदि की व्यवस्था की गई है।
गो आश्रय में संरक्षित पशुओं को धूप और गर्मी से बचाव करने के लिए गो आश्रय स्थल संचालक को निर्देश दिया गया था कि पशुओं को धूप मेें न छोड़ें और तिरपाल की व्यवस्था करें, जल्द ही सभी गो आश्रय स्थलों पर धूप से बचने की व्यवस्था कराई जाएगी। - एसके रावत, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी।
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गोशाला का होगा विस्तारीकरण, तीन सौ गोवंश रहेंगे
बारा। गांव बारा में गोशाला का और विस्तारीकरण किया जा रहा है। पहले पशुओं को रखने के लिए केवल एक ही टिन शेड था। अब एक अन्य शेड तैयार किया जा रहा है। तैयार होने के बाद इसमें तीन सौ पशुओं को आश्रय दिया जाएगा। भदौरा ब्लाक के गांव बारा में शासन की ओर से गोशाला निर्माण किया गया है। गोशाला में करीब 20 पशु आश्रय लिए हैं। अभी तक गोशाला में केवल एक ही टिन शेड बना था। अब एक और टिन शेड डालकर फर्श का काम किया जा रहा है। इस गोशाला में करीब तीन सौ पशुओं को रखा जा सकेगा। पशुओं को पानी पीने के लिए सबमर्सिबल का काम भी शुरू कर दिया गया है। गोशाला के चारों तरफ तारकशी की जाएगी। गोशाला में किसी भी पशुओं को बांधना न पड़े। गोशाला के चारों तरफ तारकशी होने के बाद पशुओं का जहां मन चाहेगा वहां पर बैठेगा। बाहर से कोई वन्य जीव भी गोशाला के अंदर पशुओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। पशुओं की देखरेख कर रहे विजेंद्र राम ने बताया कि इस समय पशुओं को गेहूं के भूसे में चोकर मिलाकर खिलाया जा रहा है।
एक मॉडल के रूप में विकसित होगी गोशाला
बारा। खंड विकास अधिकारी भदौरा राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि विभाग की ओर से गोशाला को एक मॉडल गोशाला के रूप में तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। गोशाला में एक टिन शेड के फर्श का निर्माण कार्य चल रहा है। पूरा होने के बाद ढाई से तीन सौ पशुओं को गोशाला में रखा जा सकता है।
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जिले में छुटा गोवंश को संरक्षित करने के लिए जिले में 57 गो-आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इसमें करीब आठ हजार 36 पशु संरक्षित है। तापमान में दिन प्रति दिन वृद्धि हो रही है। तेज धूप और गर्मी से लोग परेशान हैं। यही हाल पशुओं का भी है। ऐसे में पशुपालन विभाग द्वारा निर्देश जारी किया गया था, गोवंश को धूप एवं गर्मी से बचाने के लिए छायादार काऊ शेड, तिरपाल इत्यादि की व्यवस्था, गोवंश के लिए गर्म हवाओं एवं हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में दिन में तीन से चार बार स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाए तथा चरही की नियमित रूप से साफ-सफाई की जाए। ग्रीष्मकाल में संक्रमण तेजी से फैलता है, जिसको रोकने के लिए गोवंश के चारा खाने वाले स्थान की नियमित रूप से साफ-सफाई की जाए तथा गोवंश को बासी चारा न खिलाए, जिससे कि गोवंश की मृत्यु न होने पाए। शहर के आरटीआई मैदान के पास स्थित गो-आश्रय स्थल में धूप और गर्मी से बचाव के लिए व्यवस्था नदारद है। वहीं परिसर में हर तरफ गोबर फैला हुआ था। पशुओं को चारा देने के लिए नाद में भी गंदगी है। गो आश्रय स्थल में करीब 130 गोवंश संरक्षित हैं। गो आश्रय स्थल में तिरपाल की व्यवस्था नहीं होने से धूप में पशुओं रहना पड़ हैं। वही पशुओं को खाने के लिए 60 क्विंटल भूसा, 20 किलो चूनी सहित गुड़ आदि की व्यवस्था की गई है।
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गो आश्रय में संरक्षित पशुओं को धूप और गर्मी से बचाव करने के लिए गो आश्रय स्थल संचालक को निर्देश दिया गया था कि पशुओं को धूप मेें न छोड़ें और तिरपाल की व्यवस्था करें, जल्द ही सभी गो आश्रय स्थलों पर धूप से बचने की व्यवस्था कराई जाएगी। - एसके रावत, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी।
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गोशाला का होगा विस्तारीकरण, तीन सौ गोवंश रहेंगे
बारा। गांव बारा में गोशाला का और विस्तारीकरण किया जा रहा है। पहले पशुओं को रखने के लिए केवल एक ही टिन शेड था। अब एक अन्य शेड तैयार किया जा रहा है। तैयार होने के बाद इसमें तीन सौ पशुओं को आश्रय दिया जाएगा। भदौरा ब्लाक के गांव बारा में शासन की ओर से गोशाला निर्माण किया गया है। गोशाला में करीब 20 पशु आश्रय लिए हैं। अभी तक गोशाला में केवल एक ही टिन शेड बना था। अब एक और टिन शेड डालकर फर्श का काम किया जा रहा है। इस गोशाला में करीब तीन सौ पशुओं को रखा जा सकेगा। पशुओं को पानी पीने के लिए सबमर्सिबल का काम भी शुरू कर दिया गया है। गोशाला के चारों तरफ तारकशी की जाएगी। गोशाला में किसी भी पशुओं को बांधना न पड़े। गोशाला के चारों तरफ तारकशी होने के बाद पशुओं का जहां मन चाहेगा वहां पर बैठेगा। बाहर से कोई वन्य जीव भी गोशाला के अंदर पशुओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। पशुओं की देखरेख कर रहे विजेंद्र राम ने बताया कि इस समय पशुओं को गेहूं के भूसे में चोकर मिलाकर खिलाया जा रहा है।
एक मॉडल के रूप में विकसित होगी गोशाला
बारा। खंड विकास अधिकारी भदौरा राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि विभाग की ओर से गोशाला को एक मॉडल गोशाला के रूप में तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। गोशाला में एक टिन शेड के फर्श का निर्माण कार्य चल रहा है। पूरा होने के बाद ढाई से तीन सौ पशुओं को गोशाला में रखा जा सकता है।