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गम और गुस्से के सागर में डूबा देऊपुर पाही

Mon, 19 Sep 2016 11:22 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर Updated Mon, 19 Sep 2016 11:22 PM IST
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Immersed in a sea of sorrow and anger Deupur pye
उड़ी आतंकी हमले में शहीद मरदह के देउपुर पाही निवासी हरेंद्र यादव के रोते बिलखते परिवार के लोग । 

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जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में एलओसी के निकट सेना के बेस कैंप में रविवार को तड़के हुए आंतकी हमले में सेना के 20 जवान शहीद हो गए। जिनमें जिले के मरदह ब्लॉक के ग्रामसभा गांई के देऊपुर पाही का लाल हरेंद्र यादव भी शामिल है। हरेंद्र के शहीद होने की खबर मिलते ही परिवार में जहां मातम छा गया, वहीं गांव में गम की चादर तन गई है। परिवार के लोग रो-रो कर बेहाल हैं। जबकि ग्रामीण तथा शुभचिंतक परिजनों को सांत्वना देने में जुटे हैं। ऐसा गांव में हरेंद्र के शहीद होने की सूचना के बाद से बदस्तूर जारी है।

शहीदों की धरती गाजीपुर में शहादत की श्रृंखला में रविवार को एक और नाम जुड़ गया। तड़के सुबह जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना के बेस कैंप पर आतंकवादियों ने एकाएक हमला बोल दिया। हमले में सेना के कुल 20 जवान शहीद हो गए हैं। शहीदों में मरदह विकास खंड के गांई ग्रामसभा (देऊपुर पाही) निवासी केदार यादव के पुत्र हरेंद्र यादव (28) भी शामिल हैं। रविवार की शाम करीब छह बजे जैसे ही आर्मी अफसरों ने हरेंद्र के शहीद होने की खबर मोबाइल पर उनके परिवारीजनों को दी, वैसे ही पूरे परिवार में मातम छा गया। पिता केदार यादव, मां प्रभावती देवी, पत्नी  निर्मला देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। अपने बहादुर बेटे को खोने का गम पिता की आंखों में साफ दिख रहा था। हरेंद्र के दो बच्चे हैं। बड़ा रोहित (4) और राज (2)। छह भाइयों में हरेंद्र पांचवें नंबर पर थे। एक बड़ी बहन सविता की शादी पहले ही हो चुकी है। पूरे परिवार में एक हरेंद्र ही सरकारी नौकरी करते थे। हरेंद्र के दो भाई मुंबई में प्राइवेट नौकरी करते हैं, जबकि तीन भाई घर पर रहते हैं। गांव के लोग वीर शहीद के परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। यह सिलसिला सुबह से देर रात तक जारी था। छोटे भाई नरेंद्र ने बताया कि हरेंद्र दिसंबर 2007 में रायबरेली में भर्ती हुए थे। उनकी शादी जून 2011 में कोड़री गांव में विजय नारायण की पुत्री के साथ हुई थी। हरेंद्र के शहीद होने के बाद परिवार में रोना-धोना जारी है। एक तरफ पत्नी तो दूसरी तरफ बेटे की याद में मां अपना सुधबुध खो
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बैठीं हैं।

 
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