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जलकुंभी से पटी गंगा
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sat, 09 Apr 2016 12:42 AM IST
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जलकुंभी से पटी गंगा
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नमामि गंगे के तहत गंगा की सफाई के प्रति केन्द्र सरकार संकल्पित है। बावजूद इसके गंगा सफाई की बात तो दूर लगातार गंगा प्रदूषित होती जा रही है। पिछले कुछ दिनों से गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ने के साथ ही जमानिया में बड़े पैमाने पर जलकुंभी आ गई है जिससे गंगा पर उसकी परत फैल गई है।
जलकुंभी के सड़न से जहां चारों तरफ बदबू फैली है वहीं मछुआरों और मल्लाहों का धंधा मंदा हो गया है। गंगा का अचानक जलस्तर कैसे बढ़ गया, इस बारे में कोई सटीक नहीं बता पा रहा है। गंगा में जलकुंभी की परत बिछ जाने मछली पकड़ने वालों, स्थानीय किसानों को नाव से गंगा पार पहुंचाने वालों को काफी दिक्कत हो रही है। वहीं पानी प्रदूषित होने के कारण स्नान से फंगल रोग और त्वचा रोग होने की आशंका जताई जा रही है। जलकुम्भी मीठे जल जैसे तालाबों, नदियों, नहरों, झीलों में विशेषकर वर्षा ऋतु में बहुतायत में उगता है।
नवरात्र शुरू होने के कारण बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान कर दर्शन पूजन करते हैं। जलकुंभी के चलते श्रद्धालुओं को स्नान करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में चिकित्सक डॉ रूद्रकांत सिंह के मुताबिक जिस नदी, तालाब आदि में जलकुंभी आ गई हो उसमें स्नान करने से शरीर पर फंगल इंफेक्शन हो सकता है।
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वहीं ऐसा पानी पीने से पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों के होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे पानी के संपर्क में आने से त्वचा रोग होने का भी खतरा रहता है। वहीं उन्होेंने यह भी बताया कि जलकुंभी में नाइट्रोजन की मात्रा दो प्रतिशत से ज्यादा होती है। ऐसे में जलकुंभी का इस्तेमाल कृषि में हरी खाद के रूप में किया जा सकता है।
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जलकुंभी के सड़न से जहां चारों तरफ बदबू फैली है वहीं मछुआरों और मल्लाहों का धंधा मंदा हो गया है। गंगा का अचानक जलस्तर कैसे बढ़ गया, इस बारे में कोई सटीक नहीं बता पा रहा है। गंगा में जलकुंभी की परत बिछ जाने मछली पकड़ने वालों, स्थानीय किसानों को नाव से गंगा पार पहुंचाने वालों को काफी दिक्कत हो रही है। वहीं पानी प्रदूषित होने के कारण स्नान से फंगल रोग और त्वचा रोग होने की आशंका जताई जा रही है। जलकुम्भी मीठे जल जैसे तालाबों, नदियों, नहरों, झीलों में विशेषकर वर्षा ऋतु में बहुतायत में उगता है।
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नवरात्र शुरू होने के कारण बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान कर दर्शन पूजन करते हैं। जलकुंभी के चलते श्रद्धालुओं को स्नान करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में चिकित्सक डॉ रूद्रकांत सिंह के मुताबिक जिस नदी, तालाब आदि में जलकुंभी आ गई हो उसमें स्नान करने से शरीर पर फंगल इंफेक्शन हो सकता है।
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वहीं ऐसा पानी पीने से पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों के होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे पानी के संपर्क में आने से त्वचा रोग होने का भी खतरा रहता है। वहीं उन्होेंने यह भी बताया कि जलकुंभी में नाइट्रोजन की मात्रा दो प्रतिशत से ज्यादा होती है। ऐसे में जलकुंभी का इस्तेमाल कृषि में हरी खाद के रूप में किया जा सकता है।