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ठंड से होमगार्ड, सदमे में पिता की गई जान
ब्यूरो/अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Fri, 30 Oct 2015 10:48 PM IST
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कासिमाबाद से पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटे पहाड़पुर उतरौली निवासी होमगार्ड इरशाद अहमद की गुरुवार की रात ठंड लगने से मौत हो गई। पुलिस ने शव कब्जे में ले लिया। जवान बेटे की मौत के सदमे में पिता मसीउद्दीन की भी शुक्रवार की सुबह सांसें थम गईं। दो मौतों से गांव में मातम है।
करंडा थानाक्षेत्र के पहाड़पुर उतरौली निवासी होमगार्ड इरशाद अहमद (25) पंचायत चुनाव की ड्यूटी में गुरुवार को कासिमाबाद गए थे। मतदान संपन्न होने के बाद वह गुरुवार की रात घर लौटे। बारिश में भीगने और ठंड से हालत बिगड़ गई। परिवार के लोग अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। जवान बेटे की मौत से पिता मसीउद्दीन बेसुध हो गए। पूरी रात वह बेटे की मौत के गम में डूबे रहे।
मसीउद्दीन बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके और शुक्रवार की सुबह नौ बजे उनकी भी मौत हो गई। पहले बेटे और बाद में पति की मौत से नजमा की हालत भी बिगड़ गई। परिवार के लोग परेशान हैं कि कहीं नजमा को भी कुछ न हो जाए। पुलिस ने इरशाद का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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उधर, पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद होमगार्डों में इस बात को गुस्सा है कि चुनाव ड्यूटी में जाने के लिए वाहन की व्यवस्था की जाती है, लेकिन वापसी के लिए होमगार्डों को वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाता है। चुनाव ड्यूटी के लिए होमगार्डों को 225 रुपये मिलते हैं। ड्यूटी के बाद साधन न मिलने से होमगार्डों को भटकना पड़ा। पैसा खर्च कर उन्हें घर आना पड़ा। उनका कहना है कि इरशाद बारिश में भीग गए थे। इसी कारण उन्हें ठंड लग गई।
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करंडा थानाक्षेत्र के पहाड़पुर उतरौली निवासी होमगार्ड इरशाद अहमद (25) पंचायत चुनाव की ड्यूटी में गुरुवार को कासिमाबाद गए थे। मतदान संपन्न होने के बाद वह गुरुवार की रात घर लौटे। बारिश में भीगने और ठंड से हालत बिगड़ गई। परिवार के लोग अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। जवान बेटे की मौत से पिता मसीउद्दीन बेसुध हो गए। पूरी रात वह बेटे की मौत के गम में डूबे रहे।
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मसीउद्दीन बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके और शुक्रवार की सुबह नौ बजे उनकी भी मौत हो गई। पहले बेटे और बाद में पति की मौत से नजमा की हालत भी बिगड़ गई। परिवार के लोग परेशान हैं कि कहीं नजमा को भी कुछ न हो जाए। पुलिस ने इरशाद का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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उधर, पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद होमगार्डों में इस बात को गुस्सा है कि चुनाव ड्यूटी में जाने के लिए वाहन की व्यवस्था की जाती है, लेकिन वापसी के लिए होमगार्डों को वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाता है। चुनाव ड्यूटी के लिए होमगार्डों को 225 रुपये मिलते हैं। ड्यूटी के बाद साधन न मिलने से होमगार्डों को भटकना पड़ा। पैसा खर्च कर उन्हें घर आना पड़ा। उनका कहना है कि इरशाद बारिश में भीग गए थे। इसी कारण उन्हें ठंड लग गई।