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Ghazipur News: 40 साल बाद इतिहास दोहराया, बशर के बाद लगातार दूसरी बार सांसद बने अफजाल

Wed, 05 Jun 2024 01:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jun 2024 01:58 AM IST
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History repeated after 40 years, Afzal became MP for the second consecutive time after Bashar
गाजीपुर। गाजीपुर सीट पर 40 साल बाद इतिहास दोहराया गया। इस सीट से 1980-84 में कांग्रेस के जैनुल बशर की लगातार दो जीत के बाद सपा से अफजाल अंसारी लगातार दूसरी बार सांसद बने। इस ऐतिहासिक जीत से अफजाल ने यह भी साबित कर दिया कि वहीं गाजीपुर की राजनीति के असली चाणक्य है। यहां पिछले चुनाव का हिसाब बराबर करने की सत्ताधारी दल की हर कोशिशें नाकाम साबित हुईं। भाजपा के गुजरात मॉडल पर चुनाव लड़ने ,पीएम की चुनावी सभा पर सपा मुखिया की चुनावी रैली भारी पड़ गई। रही-सही कसर प्रसार की कमान संभालने वाली अफजाल अंसारी की बेटियों ने घर-घर जाकर पूरा कर दिया, जिससे सपा प्रत्याशी के सिर जीत का ताज फिर रखा गया।
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70 वर्षीय अफजाल अंसारी अब तक 11 बार चुनाव लड़ चुके हैं। वह पांच बार विधायक और तीसरी बार सांसद बने हैं। पिछली बार वर्ष 2019 में सांसद बनने के लिए उन्होंने बसपा से टिकट चुनाव लड़ा और 2014 के सीटिंग सांसद और भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा को 119392 मत के अंतर से हराने में कामयाब रहे। खुद के कुंडली में संघर्ष लिखा होने की बात कहने वाले अफजाल अंसारी के सामने कई तरह की मुश्किलें भी आईं। छोटे भाई मुख्तार अंसारी की मौत और खुद के चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किए जाने की लटक रही तलवार के बीच सपा से टिकट हासिल किया। तमाम अटकलों के बीच सपा मुखिया अखिलेश यादव का विश्वास जीतते हुए चुनावी समर में उतरे। साथ ही अपनी बड़ी बेटी नुसरत अंसारी को निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार दिया, जिसने चुनाव में खूब साथ दिया। यही नहीं, इस चुनाव में उन्होंने अपनी बेटी नुरसत और नूरिया तक को मैदान में उतार दिया, जो अपने पिता के पक्ष में घर-घर जाकर वोट मांगने में कामयाब रहीं। दूसरी ओर इस सीट पर पिछला हिसाब बराबर करने के लिए भाजपा ने पारसनाथ राय को मोहरा बनाया, जिनपर जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के करीबी होने का मुहर भी लगा। यही नहीं, माहौल बनाने के लिए दिग्गज पीछे भी नहीं रहे। संवैधानिक पद का ख्याल रखते हुए मनोज सिन्हा अपनी जिम्मेदारी को निभाने में भी नहीं चुके। यह, पहला मौका था, जब चुनाव जीतने के लिए भाजपा की मशीनरी ने पूरी ताकत झोंक दी। गुजरात मॉडल से चुनाव जीतने की कोशिश में लगी भाजपा ने पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ समेत उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के सीएम तक को चुनाव में उतार दिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रोड शो करके भी भरपूर माहौल बनाया, लेकिन, सपा मुखिया अखिलेश यादव की चुनावी रैली सब पर भारी पड़ गई। इंडी का हिस्सा न बनने वाली बसपा यहां शुरू से ही लड़ाई से बाहर हो गई थी, जिसका लाभ सीधे तौर लाभ सपा को मिला। इसमें रही सही कसर अफजाल अंसारी की बेटियों ने प्रचार की कमान संभालकर पूरी कर दी, जो घर-घर जाकर बेरोजगारी, महंगाई, अग्निवीर और संविधान बचाने की बातें करते हुए अपने पिता के पक्ष में मतदान करने के लिए माहौल बना रही थी और आखिरकार 124266 मतों से जीत हासिल किए।
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अफजाल अंसारी के नाम बने ये पांच नये रिकॉर्ड
-अफजाल अंसारी ने गाजीपुर सीट से जैनुल बशर के लगातार 1980-84 में जीत दर्ज करने के रिकॉर्ड की किए बराबरी।
-गाजीपुर सीट पर 1984 के बाद लगातार दो बार जीतने वाले पहले सांसद बने अफजाल अंसारी
-गाजीपुर सीट से तीसरी बार चुनाव जीतने वाले पहले मुस्लिम सांसद बने अफजाल अंसारी।
-हर प्रसाद सिंह, सरजू पांडेय और जैनुल बशर के बाद लगातार दो बार चुनाव जीतने वाले चौथे सांसद बने अफजाल अंसारी।
-वर्तमान में जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के गाजीपुर से तीन बार सांसद बनने के रिकॉर्ड की किए बराबरी।
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