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कावंरियों पर हेलीकाप्टर से बरसाएंगे फूल, लेकिन सड़कों पर पांवों में चुभेंगे शूल
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इस बार सावन की कांवड़ यात्रा के दौरान सिधौना-बिहारीगंज मार्ग से क्षेत्र के शिवालयों पर जल चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं को खून के आंसू रोने पड़ेंगे। क्योंकि मार्ग पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुका है। इसी मार्ग पर चलकर कांवरियों को सिधौना गांव के सिद्धेश्वर महादेव व बभनौली गांव के बिछुड़ननाथ महादेव मंदिर तक की कांवड़ यात्रा पूरी करनी पड़ेगी।
सावन 14 जुलाई से शुरू हो रहा है। भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए कांवड़ यात्रा में गिने-चुने दिन शेष रह गए हैं। लेकिन काशी के विश्वनाथ धाम से लेकर जनपद के अनेक गंगा घाटों से क्षेत्र के प्रमुख शिव मंदिरों तक पहुंचने के लिए सिधौना-बिहारीगंज मार्ग इस बार भी मुसीबत का कारण बनेगा। सड़क से गड्ढे का रूप ले चुके इस उबड़ खाबड़ मार्ग पर शिवजी के भक्तों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। पिछले वर्ष अप्रैल में ईंट, गिट्टी और भस्सी डालकर खानापूर्ति की गई थी। लेकिन सड़क पर हल्की बारिश से निकले नोकदार नुकीले पत्थर व कंकड़ कांवरियों के पैरों में शूल का काम करेंगे। इसी तरह सिधौना से कटकर सीधे बिछुड़ननाथ जाने वाले भक्तों की भी इस दौरान खूब परीक्षा होगी। सिधौना से बभनौली गांव की कुल तीन किलोमीटर की दूरी में सिर्फ ईंट व पत्थर ही भरे पड़े हैं। रास्ते के दोनों तरफ स्थापित लगभग दो दर्जन घरेलू हैंडपंपों की जलनिकासी मार्ग की तरफ ही है। सावन में नंगे पैर चलने वाले शिवभक्तों को इस सड़क पर फैले गंदे व बदबूदार पानी का सामना करना पड़ेगा।
सिधौना-बिहारीगंज मार्ग के अलावा सिधौना के आस पास से गुजरने वाली सभी खराब सड़कों की सूची लोक निर्माण विभाग को दी जा चुकी है। सड़कों के निर्माण व उनके मरम्मत की मंजूरी भी विभाग से मिल चुकी है। निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा।
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दयाशंकर मिश्र उर्फ दयालु गुरू, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
सावन के महीने में बाबा बिछुड़ननाथ धाम पहुंच कर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में होती है। उनके लिए खराब सड़क मुसीबत का कारण बनेगी। -लुल्लूर सिंह
इस बार सावन माह में कांवड़ यात्रा लेकर जाने वाले शिवभक्तों को सिधौना-बिहारीगंज मार्ग के कारण नंगे पैर चलना किसी परीक्षा से कम नहीं होगा। बिछुड़ननाथ महादेव लोगों की आस्था का केंद्र है। - शिवप्रकाश त्रिपाठी
इस बार भी बड़ी संख्या में कांवड़िए सिधौना के सिद्धेश्वर और बभनौली के बिछुड़ननाथ महादेव मंदिर के लिए जलाभिषेक के लिए निकलेंगे। जर्जर हो चुके सिधौना-बिहारीगंज मार्ग पर चलना आसान नहीं होगा। - ओमप्रकाश त्रिपाठी
बाबा विश्वनाथ से लेकर क्षेत्र के कैथी, वराहधाम, बूढ़े महादेव और अन्य गंगा घाटों से लौटने वाले कांवरियों को सिद्धेश्वर व बिछुड़ननाथ महादेव पर जलाभिषेक अनिवार्य होता है। मार्ग ईंट पत्थरों से भरा पड़ा है। - रामनरेश चौहान
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सावन 14 जुलाई से शुरू हो रहा है। भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए कांवड़ यात्रा में गिने-चुने दिन शेष रह गए हैं। लेकिन काशी के विश्वनाथ धाम से लेकर जनपद के अनेक गंगा घाटों से क्षेत्र के प्रमुख शिव मंदिरों तक पहुंचने के लिए सिधौना-बिहारीगंज मार्ग इस बार भी मुसीबत का कारण बनेगा। सड़क से गड्ढे का रूप ले चुके इस उबड़ खाबड़ मार्ग पर शिवजी के भक्तों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। पिछले वर्ष अप्रैल में ईंट, गिट्टी और भस्सी डालकर खानापूर्ति की गई थी। लेकिन सड़क पर हल्की बारिश से निकले नोकदार नुकीले पत्थर व कंकड़ कांवरियों के पैरों में शूल का काम करेंगे। इसी तरह सिधौना से कटकर सीधे बिछुड़ननाथ जाने वाले भक्तों की भी इस दौरान खूब परीक्षा होगी। सिधौना से बभनौली गांव की कुल तीन किलोमीटर की दूरी में सिर्फ ईंट व पत्थर ही भरे पड़े हैं। रास्ते के दोनों तरफ स्थापित लगभग दो दर्जन घरेलू हैंडपंपों की जलनिकासी मार्ग की तरफ ही है। सावन में नंगे पैर चलने वाले शिवभक्तों को इस सड़क पर फैले गंदे व बदबूदार पानी का सामना करना पड़ेगा।
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सिधौना-बिहारीगंज मार्ग के अलावा सिधौना के आस पास से गुजरने वाली सभी खराब सड़कों की सूची लोक निर्माण विभाग को दी जा चुकी है। सड़कों के निर्माण व उनके मरम्मत की मंजूरी भी विभाग से मिल चुकी है। निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा।
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दयाशंकर मिश्र उर्फ दयालु गुरू, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
सावन के महीने में बाबा बिछुड़ननाथ धाम पहुंच कर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में होती है। उनके लिए खराब सड़क मुसीबत का कारण बनेगी। -लुल्लूर सिंह
इस बार सावन माह में कांवड़ यात्रा लेकर जाने वाले शिवभक्तों को सिधौना-बिहारीगंज मार्ग के कारण नंगे पैर चलना किसी परीक्षा से कम नहीं होगा। बिछुड़ननाथ महादेव लोगों की आस्था का केंद्र है। - शिवप्रकाश त्रिपाठी
इस बार भी बड़ी संख्या में कांवड़िए सिधौना के सिद्धेश्वर और बभनौली के बिछुड़ननाथ महादेव मंदिर के लिए जलाभिषेक के लिए निकलेंगे। जर्जर हो चुके सिधौना-बिहारीगंज मार्ग पर चलना आसान नहीं होगा। - ओमप्रकाश त्रिपाठी
बाबा विश्वनाथ से लेकर क्षेत्र के कैथी, वराहधाम, बूढ़े महादेव और अन्य गंगा घाटों से लौटने वाले कांवरियों को सिद्धेश्वर व बिछुड़ननाथ महादेव पर जलाभिषेक अनिवार्य होता है। मार्ग ईंट पत्थरों से भरा पड़ा है। - रामनरेश चौहान