Ghazipur: लहुरी काशी में घूमने के लिए बढ़ रही पर्यटकों की संख्या, जानिए यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल
गंगा नदी के किनारे बसे गाजीपुर को लोग लहुरी काशी भी की कहते हैं। जिला प्रशासन भी अब यहां गगा किनारे घाटों पर काशी की तर्ज पर गंगा आरती कराने की पहल कर रहा है। इसके लिए चीतनाथ घाट पर बीते दिनों नमानि गंगे योजना के तहत गंगा आरती भी कराई।
विस्तार
लहुरी काशी के नाम से प्रसिद्ध गाजीपुर में घूमने में घरेलू पर्यटक रूचि दिखा रहे हैं। हालांकि इनकी रूचि को देखते हुए शासन-प्रशासन ने इसे बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। स्थिति यह है कि वर्ष 2021 की तुलना में आठ हजार घरेलू पर्यटक बढ़े हैं।
गंगा नदी के किनारे बसे गाजीपुर को लोग लहुरी काशी भी की कहते हैं। जिला प्रशासन भी अब यहां गगा किनारे घाटों पर काशी की तर्ज पर गंगा आरती कराने की पहल कर रहा है। इसके लिए चीतनाथ घाट पर बीते दिनों नमानि गंगे योजना के तहत गंगा आरती भी कराई। साथ ही जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने सभी घाटों पर समिति बनाकर रोजाना या सप्ताह में एक दिन गंगा आरती करने की अपील भी की। इसी तरह उन्होंने पर्यटन संवर्धन योजना के तहत सभी विधानसभा क्षेत्रों में काम कराने के लिए जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव भी मांगा है। क्योंकि जनपद में पर्यटन की संभावनाएं भी हैं।
आंकड़ों पर एक नजर
पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर किए गए फिडिंग के मुताबिक वर्ष 2019 में सात लाख 9 हजार 448 घरेलू पर्यटक आए थे। जबकि साल 2020 में 60 हजार 25 घरेलू पर्यटक पहुंचे। हालांकि इसके बाद घरेले पर्यटकों का रूझान कम हो गया था। नतीजन वर्ष 2021 में 50 हजार 76 घरेलू पर्यटक घूमने के लिए गाजीपुर पहुंचे। लेकिन, शासन-प्रशासन के तमाम प्रयासों से इसे फिर से बढ़ावा मिलने लगा है, जिससे एक बार फिर घरेलू पर्यटकों की संख्या 58 हजार 344 पहुंच गई, जिसके इस वर्ष और बढ़ने की संभावना है।
जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल
दादरी घाट और चीतनाथ घाटः गंगा नदी के किनारे बना हुआ है। घाट के पास में ही राधा कृष्ण मंदिर और शनि मंदिर है। मकर संक्रांति के समय यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं।
संकट मोचन मंदिरः यह मंदिर दादरी घाट के पास में ही है। हनुमान, भगवान विष्णु सहित कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं विराजमान हैं।
लॉर्ड कार्नवालिस का मकबराः शहर के पीजी कॉलेज के पास लॉर्ड कार्नवालिस का मकबरा है। लॉर्ड कार्नवालिस की मृत्यु इसी स्थान पर हुई थी। गार्डन के बीच में बने इस मकबरे का आकार वृत्ताकार है और विशाल गुंबद युक्त संरचना में 12 खंभों पर यह मकबरा टिका हुआ है। यहां पर लॉर्ड कार्नवालिस की मूर्ति एक वर्गाकार चबूतरे पर रखी हुई है। महाहर धाम - मरदह का महाहर धाम एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। कहा जाता है, कि इस मंदिर की स्थापना भगवान राम के पिता दशरथ ने की थी। महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय मेला लगता है।
पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद का गठन हुआ है। इससे जिले में पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है।-दिव्या तिवारी, पर्यटन सूचना अधिकारी