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भरत मिलाप देख भाव-विभोर हुए दर्शक
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गाजीपुर। जिले में चल रही अधिकतर रामलीला अब अंतिम दौर में हैं। कई जगहों पर भरत मिलाप के साथ इनका समापन भी किया जा रहा है। शहर में भरत मिलाप का मंचन किया गया जिसे देख दर्शक भाव-विभोर हो गए।
भरतजी गुरू वशिष्ठ को बुलवाकर श्रीराम से मिलने के लिए अयोध्या से भारद्वाज मुनि के आश्रम के लिए प्रस्थान कर देते हैं। भारद्वाज मुनि के आश्रम के पूर्व रथ रूकवाकर पैदल ही श्रीराम का नाम लेते हुए दौड़ जाते हैं और उनके चरणों में लिपट जाते हैं। श्रीराम भरत के अगाध प्रेम को देखते हुए उन्हें अपने गले से लगा लेते हैं। चारों भाइयों का मिलन देखकर उपस्थित लोगों के नेत्रों से अश्रु धारा बहने लगती है। सभी भाव-विभोर होकर यह दृश्य देखते ही रह जाते हैं। हर-हर महादेव और चारों भाइयों के जयकारे से पूरा लीला स्थल गूंज उठता है। इसके पूर्व के प्रसंग में श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर लक्ष्मण, सीता, हनुमान, अंगद, जामवंत, सुग्रीव तथा विभीषण आदि के साथ कुबेर द्वारा दिए गए पुष्पक विमान से आकाश मार्ग द्वारा अयोध्या के लिए प्रस्थान करते हैं। वह हनुमान को अयोध्या भेज कर भरत को अपने आने की सूचना भिजवा देते हैं।
उधर महाराज भरत अपने बड़े भाई श्रीराम की चरण पादुका को चित्रकूट से लाकर अयोध्या की राजगद्दी पर रख कर उसकी देखरेख में तपस्वी का वेष बनाए कुश के आसन पर समाधि लगाकर बैठे श्रीराम के आने की प्रतीक्षा करते हैं। भरत पूरी अयोध्या को श्रीराम के आने की खुशी में ध्वज पताकाओं और तोरण के द्वारा भव्य सजावट करवाते हैं। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से भरतजी की शोभा यात्रा निकाली गई जो हरिशंकरी स्थित राम चबूतरा से गाजे-बाजे के साथ महाजन टोली, झुन्नूलाल चौराहा, आमघाट, राजकीय महाविद्यालय, राजकीय बालिका इंटर कालेज, महुआबाग होते हुए सकलेनाबाद स्थित दुर्गा चौक आकर श्रीराम-भरत मिलन हुआ। चारों भाइयों का रथ श्रृंगवेरपुर स्थित बाबा पहाड़ खां के पोखरा स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में आकर समाप्त हुआ। बहादुरगंज संवाददाता के अनुसार कसबे का प्रसिद्ध भरत मिलाप का कार्यक्रम डाकघर के पास बृहस्पतिवार की भोर में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। लंका विजय के बाद अयोध्या लौट रहे भगवान श्रीराम और भरत की भेंट (मुलाकात) का मंचन किया गया। पात्रों की ओर से पारंपरिक रामलीला के तहत सम्पन्न हुए भरत मिलाप प्रसंग के मंचन को देखने के लिए बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, बच्चों के साथ श्रद्धालु पूरी रात कार्यक्रम स्थल पर जुटे रहे। भगवान श्रीराम और उनके भाई भरत की भेंट के इस प्रसंग को देखकर रामभक्त भाव विभोर हो गए। श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा कर चारों भाइयों के साथ माता जानकी के जयकारे से पूरा वातावरण गुंजायमान होता रहा।
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भरतजी गुरू वशिष्ठ को बुलवाकर श्रीराम से मिलने के लिए अयोध्या से भारद्वाज मुनि के आश्रम के लिए प्रस्थान कर देते हैं। भारद्वाज मुनि के आश्रम के पूर्व रथ रूकवाकर पैदल ही श्रीराम का नाम लेते हुए दौड़ जाते हैं और उनके चरणों में लिपट जाते हैं। श्रीराम भरत के अगाध प्रेम को देखते हुए उन्हें अपने गले से लगा लेते हैं। चारों भाइयों का मिलन देखकर उपस्थित लोगों के नेत्रों से अश्रु धारा बहने लगती है। सभी भाव-विभोर होकर यह दृश्य देखते ही रह जाते हैं। हर-हर महादेव और चारों भाइयों के जयकारे से पूरा लीला स्थल गूंज उठता है। इसके पूर्व के प्रसंग में श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर लक्ष्मण, सीता, हनुमान, अंगद, जामवंत, सुग्रीव तथा विभीषण आदि के साथ कुबेर द्वारा दिए गए पुष्पक विमान से आकाश मार्ग द्वारा अयोध्या के लिए प्रस्थान करते हैं। वह हनुमान को अयोध्या भेज कर भरत को अपने आने की सूचना भिजवा देते हैं।
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उधर महाराज भरत अपने बड़े भाई श्रीराम की चरण पादुका को चित्रकूट से लाकर अयोध्या की राजगद्दी पर रख कर उसकी देखरेख में तपस्वी का वेष बनाए कुश के आसन पर समाधि लगाकर बैठे श्रीराम के आने की प्रतीक्षा करते हैं। भरत पूरी अयोध्या को श्रीराम के आने की खुशी में ध्वज पताकाओं और तोरण के द्वारा भव्य सजावट करवाते हैं। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से भरतजी की शोभा यात्रा निकाली गई जो हरिशंकरी स्थित राम चबूतरा से गाजे-बाजे के साथ महाजन टोली, झुन्नूलाल चौराहा, आमघाट, राजकीय महाविद्यालय, राजकीय बालिका इंटर कालेज, महुआबाग होते हुए सकलेनाबाद स्थित दुर्गा चौक आकर श्रीराम-भरत मिलन हुआ। चारों भाइयों का रथ श्रृंगवेरपुर स्थित बाबा पहाड़ खां के पोखरा स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में आकर समाप्त हुआ। बहादुरगंज संवाददाता के अनुसार कसबे का प्रसिद्ध भरत मिलाप का कार्यक्रम डाकघर के पास बृहस्पतिवार की भोर में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। लंका विजय के बाद अयोध्या लौट रहे भगवान श्रीराम और भरत की भेंट (मुलाकात) का मंचन किया गया। पात्रों की ओर से पारंपरिक रामलीला के तहत सम्पन्न हुए भरत मिलाप प्रसंग के मंचन को देखने के लिए बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, बच्चों के साथ श्रद्धालु पूरी रात कार्यक्रम स्थल पर जुटे रहे। भगवान श्रीराम और उनके भाई भरत की भेंट के इस प्रसंग को देखकर रामभक्त भाव विभोर हो गए। श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा कर चारों भाइयों के साथ माता जानकी के जयकारे से पूरा वातावरण गुंजायमान होता रहा।
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