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बरसात से दलहन और तिलहन की फसल चौपट
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गाजीपुर। पिछले दिनों हुई कहीं छिटपुट तो कहीं तेज बरसात से जिले में रबी की फसलों पर कहीं अनुकूल तो कहीं प्रतिकूल असर पड़ा है। सबसे अधिक नुकसान दलहन और तिलहन की खेती को हुआ है। बड़ी मात्रा में इसकी फसल चौपट हो गई है। इधर, इस बरसात से आलू, गेहूं और ज्वार की फसल को काफी फायदा मिला है। हालांकि अगर आगे कोहरा बना रहता है तथा मौसम साफ नहीं होता है तो आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की संभावना है। इससे बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने दवाओं के छिड़काव की सलाह दी है।
कृषि विभाग के अनुसार जिले के हर तहसील क्षेत्र में दलहन और तिलहन की बड़ी मात्रा में खेती की जाती है। सरसों 419 हेक्टेयर, चना 4586 हेक्टेयर, मटर 3990 हेक्टेयर तथा मसूर की खेती 13311 हेक्टेयर में की जाती है। अरहर का भी 2683 हेक्टेयर में अच्छा उत्पादन किया जाता है। दलहन की फसलों चना, मसूर, मटर पर बरसात का सबसे ज्यादा कुप्रभाव पड़ा है। अगैती दलहन की फसलों पर लगे फूल बरसात के कारण गिर जाते हैं। ऐसे में नए फूल आने में समय लगता है और यह सीधे तौर पर फसल की पैदावार को प्रभावित करता है। इसी प्रकार, तिलहन की सरसों, तिल के फूल भी गिर गए हैं। इसी प्रकार जिले में एक लाख 71 हजार 1307 हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई जाती है। आलू की खेती चालीस हजार हेक्टेयर में की जाती है। इसमें मुहम्मदाबाद, जमानिया, बिरनो, सैदपुर आदि क्षेत्रों में इसकी बहुलता है। इसी प्रकार, जौ की खेती 7551 हेक्टेयर में होती है। इस बरसात ने गेहूं और आलू की फसल को खासा लाभ पहुंचाया है। गेहूं, बाजरा, जौ आदि फसलों के पौधे अब थोड़े बड़े आकार में आ गए हैं। बरसात के पानी से उनमें हरियाली बढ़ गई है। खास बात यह है कि अगर शीतलहर, कोहरा और ठंड का क्रम यही बना रहा तो आलू की फसल के लिए यह अच्छा संकेत नहीं होगा। झुलसा और पाला रोग की संभावना बढ़ जाएगी। इस प्रकार की समस्या आते ही किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र अथवा किसान सहायता केंद्र पर संपर्क कर सलाह लेनी चाहिए।
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कृषि विभाग के अनुसार जिले के हर तहसील क्षेत्र में दलहन और तिलहन की बड़ी मात्रा में खेती की जाती है। सरसों 419 हेक्टेयर, चना 4586 हेक्टेयर, मटर 3990 हेक्टेयर तथा मसूर की खेती 13311 हेक्टेयर में की जाती है। अरहर का भी 2683 हेक्टेयर में अच्छा उत्पादन किया जाता है। दलहन की फसलों चना, मसूर, मटर पर बरसात का सबसे ज्यादा कुप्रभाव पड़ा है। अगैती दलहन की फसलों पर लगे फूल बरसात के कारण गिर जाते हैं। ऐसे में नए फूल आने में समय लगता है और यह सीधे तौर पर फसल की पैदावार को प्रभावित करता है। इसी प्रकार, तिलहन की सरसों, तिल के फूल भी गिर गए हैं। इसी प्रकार जिले में एक लाख 71 हजार 1307 हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई जाती है। आलू की खेती चालीस हजार हेक्टेयर में की जाती है। इसमें मुहम्मदाबाद, जमानिया, बिरनो, सैदपुर आदि क्षेत्रों में इसकी बहुलता है। इसी प्रकार, जौ की खेती 7551 हेक्टेयर में होती है। इस बरसात ने गेहूं और आलू की फसल को खासा लाभ पहुंचाया है। गेहूं, बाजरा, जौ आदि फसलों के पौधे अब थोड़े बड़े आकार में आ गए हैं। बरसात के पानी से उनमें हरियाली बढ़ गई है। खास बात यह है कि अगर शीतलहर, कोहरा और ठंड का क्रम यही बना रहा तो आलू की फसल के लिए यह अच्छा संकेत नहीं होगा। झुलसा और पाला रोग की संभावना बढ़ जाएगी। इस प्रकार की समस्या आते ही किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र अथवा किसान सहायता केंद्र पर संपर्क कर सलाह लेनी चाहिए।
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