सुहवल। शासन की ओर से दो वर्ष पहले मनचलों की नकेल कसने एवं छात्राओं की सुरक्षा को लेकर हर विद्यालय में गरिमा बाक्स-शिकायत पेटिका योजना की शुरुआत की गई थी। यह कवायद शिक्षा विभाग एवं प्रशासन की उदासीनता के चलते फ्लाप साबित हो रही है। इससे छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहीं हैं।
शासन की ओर से वर्ष 2019 में महिला सशक्तिकरण एवं बालिका सुरक्षा योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत जिले के सभी इंटर और डिग्री कालेजों में प्राथमिकता के आधार पर गरिमा बाक्स लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य मनचलों और शोहदों की प्रभावी तरीके से लगाम कसना था। जिले में वर्तमान समय में 1016 माध्यमिक विद्यालयों में 28 राजकीय एवं 96 एडेड के अलावा करीब 350 डिग्री कालेज हैं। लोगों ने बताया कि शासन की इस कवायद के बाद पुलिस महकमा एवं शिक्षा विभाग ने कुछ दिनों तक सक्रियता बनाए रखी। कुछ दिनों तक गरिमा बाक्स कालेजों की शोभा बढ़ाते रहे। उसके बाद इन लोगों की उदासीनता के चलते यह योजना फाइलों में सिमट कर रह गई है। ग्रामीणों ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार एक तरफ जहां फिक्रमंद है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस महकमा इसको लेकर बेपरवाह बना हुआ है। लोगों ने बताया कि किसी भी स्कूल कालेज में गरिमा बाक्स दूर-दूर तक नजर नहीं आता। इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक डा. ओपी राय ने बताया कि गरिमा बाक्स को लेकर विद्यालयों को पत्र के माध्यम से सख्त निर्देश दिया जाएगा, ताकि शासन की इस योजना की सक्रियता बनी रहे।