गाजीपुर/भीमापार। मोक्षदायिनी गंगा के जलस्तर में बीते चार दिनों से बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। इससे तटवर्ती लोगों में अब खौफ भरना शुरू हो गया है। जिला मुख्यालय के कलेक्टर घाट, स्टीमर घाट, चीतनाथ घाट, ददरीघाट, नवापुरा घाट, बड़ा महादेवा घाट, सिकंदरपुर घाट आदि की नीचे की सीढ़ियां गंगा में डूब गई हैं। हालांकि गंगा नदी चेतावनी बिंदु और खतरा बिंदुुुुुुुु से अभी काफी दूर हैं। बीते मंगलवार को नदी को जलस्तर 55.100 मीटर पर थीं। लेकिन निरंतर जलस्तर बढ़ने के बाद यह शुक्रवार को सायंकाल तक 55.290 तक पहुंच चुकी हैं। नदी में प्रतिघंटे दो से तीन सेंटीमीटर बढ़ाव जारी है।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आपदा विशेषज्ञ अशोक राय ने बताया कि बीते 21 जुलाई को शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर 55.100 मीटर से 22 जुलाई को सुबह आठबजे 55.160 मीटर पर पहुंच गया। इसी तरह 23 की शाम पांच बजे 55.230 मीटर से 24 की शाम 55.290 मीटर दर्ज किया गया। आपदा विशेषज्ञ ने बताया कि इस तरह से गंगा अपने चेतावनी बिंदु से महज 6.120 मीटर ही नीचे बह रही हैं। फिर भी तटवर्ती गांव वासियों के मन में गंगा की बाढ़ को लेकर खौफ कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। बीते सालों में जिसने भी गंगा में आई बाढ़ का रौद्र रूप देखा है। उनकी तो रातों की नींद ही गायब है। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ की विभीषिका देखने के बाद भी बाढ़ को रोकने की कोई स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं की जा सकी है। भीमापार संवाददाता के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह से सैदपुर तहसील के आदित्य घाट की तेरह सीढ़ियां जलमग्न होने के बाद गंगा का पानी एक बार फिर बढ़ने लगा है। 21 जुलाई से गंगा के पानी में तीन से चार सेंटीमीटर प्रतिदिन के हिसाब से बढ़ोत्तरी दर्ज की जाने लगी। हालत यह है कि गंगा का पानी शुक्रवार की सुबह आदित्य घाट की दो और सीढ़ियां चढ़कर और ऊपर आ गया है।