{"_id":"66b6afaa5593f140f40cf66c","slug":"ganga-became-stable-after-rising-the-speed-of-rise-was-one-cm-till-morning-ghazipur-news-c-313-1-gzp1001-118865-2024-08-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: बढ़ने के बाद स्थिर हुईं गंगा, भोर तक एक सेमी थी बढ़ाव की रफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: बढ़ने के बाद स्थिर हुईं गंगा, भोर तक एक सेमी थी बढ़ाव की रफ्तार
विज्ञापन
गाजीपुर। गंगा का जलस्तर शुक्रवार की भोर चार बजे तक एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही थी। लेकिन, सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक गंगा का जलस्तर 62.460 मीटर पर स्थिर रहा। दूसरी तरफ जनपद के निचले इलाकों में गंगा का पानी फैलने से लोगों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। रेवतीपुर क्षेत्र के हसनपुरा में बाढ़ का पानी आने के कारण प्राथमिक विद्यालय को बंद करना पड़ गया है। साथ ही लगभग 300 बीघा फसल जलमग्न हो चुकी है।
बृहस्पतिवार की शाम को गंगा का जलस्तर तीन सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। बाढ़ का पानी पसरने के कारण रेवतीपुर क्षेत्र का निचला इलाका विशेष रूप से प्रभावित हुआ है। नसीरपुर, हसनपुरा, वीरउपुर, परमानंदपुर, दुल्लहपुर, अठहठा आदि गांवों के खेत जलमग्न हो चुके हैं। साथ ही ये गांव एक तरफ से पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। ग्रामीण ऊंचाई वाले स्थानों के रास्तों से आवागमन कर रहे हैं। इस इलाके में लगभग 50 बीघा में परवल की खेती जलमग्न हुई है। वहीं 50 बीघा के करीब चरी की फसल डूब गई है। गहमर में कामाख्या धाम के आसपास करीब 100 बीघा और सैदपुर क्षेत्र में लगभग 90 बीघा फसल जलमग्न है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
रेवतीपुर क्षेत्र के हसनपुरा प्राथमिक विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी आ चुका है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय को फिलहाल दो दिनों के लिए बंद किया गया है। विद्यालय में लगभग 150 बच्चे पढ़ते हैं। विद्यालय बंद होने से बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। सैदपुर: बाढ़ के कारण जौहरगंज, औड़िहार, शादी-भादी, कोल्हुआ घाट, फुलवारी कला, फुलवारी खुद, टोडरपुर आदि गांवों के खेत प्रभावित हैं। इन गांवों के लगभग 90 बीघा खेत जलमग्न हो चुके हैं। नालों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है, इसके कारण गांवों में पानी पसरने का खतरा मंडरा रहा है। गंगा और गोमती के बाढ़ के पानी के कारण कुसई, खरौना, सूरजभान चक, सिधौना, नगरिया नाला, गौरी, गोरखा आदि गांव प्रभावित हैं।
विज्ञापन
रेवतीपुर-गहमर रोड पर कमर तक पानी, आवागमन बंद
गाजीपुर। रेवतीपुर से गहमर तक जाने के लिए लगभग 12 किलोमीटर बाइपास मार्ग है। मार्ग पर कमर से ऊपर तक बाढ़ का पानी है। इससे मार्ग पर आवागमन बंद है, क्योंकि बाढ़ के पानी का बहाव काफी तेज है। मार्ग किनारे बसे नगदीलपुर, हसनपुरा आदि गांवों के लोग संपर्क मार्ग से आवागमन कर रहे हैं। इसी तरह नसीरपुर-भदौरा मार्ग पर लगभग 300 मीटर के दायरे में बाढ़ का पानी सड़क पर फैल चुका है। 300 मीटर के दायरे में गर्दन तक बाढ़ का पानी लगा हुआ है।
पशु पालकों के सामने चारे का संकट
गाजीपुर। रेवतीपुर क्षेत्र में बड़े दायरे में चरी की फसल जलमग्न हो चुकी है। इससे पशु पालकों के सामनने पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। वह इधर-उधर से चारे का इंतजाम कर रहे हैं। महीनों चारे की व्यवस्था के लिए किसान खेतों में चरी की बोवाई करते हैं। किसान रमेश, सुरेश प्रजापति, मोहन यादव आदि का कहना है कि वर्तमान में प्रशासन की ओर से भी भूसे की व्यवस्था कराई गई, लेकिन बाढ़ का पानी खत्म हो जाने के बाद मवेशियों को क्या खिलाएंगे।
नालों में घुसने लगा बाढ़ का पानी, गांवों को खतरा
गहमर। क्षेत्र में कामख्या धाम मंदिर परिसर के पास स्थित गदाईपुर, पथरा, करहिया आदि गांवों की लगभग 100 बीघा खेत में बाढ़ का पानी पसर गया है। साथ ही गहमर स्थित नरवा घाट की लगभग 10 सीढि़यां डूब चुकी हैं। नालों में गंगा के बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है। इससे गांवों में पानी घुसने का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ का पानी हनुमान चबूतरा मैदान तक पहुंचने वाला है। गंगा किनारे स्थित बबुरहनी बस्ती के लोग भी काफी चिंतित हैं। गंगा उस पार दीयर क्षेत्र डूब जाने से खड़ी फसल डूब गई है। गहमर गांव के सोझवा घाट और पंचमुखी घाट पर काफी तेजी से कटान हो रहा है। गंगा के साथ-साथ कर्मनाशा में भी जलस्तर बढ़ा है। कर्मनाशा के तटवर्ती गांव भतौरा, मनिहर वन, सायर के ग्रामीण संशकित नजर आ रहे हैं।
-- -- -- --
श्मशान घाटों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
सैदपुर। जौहरगंज श्मशान घाट पर गंगा के बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। विद्युत शव दाह गृह बाढ़ की जद में आ चुका है। इससे दस मीटर की दूरी पर सड़क किनारे शव का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसी तरह पटना गांव स्थित रामतवक्का श्मशान घाट पर 10 फीट तक बाढ़ का पानी पसरा हुआ है, जिससे 30 फीट की दूरी पर रामानंद मठिया के पश्चिमी छोर पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसी क्रम में औड़िहार वाराह रूप घाट की सीढि़या डूब चुकी हैं। विष्णु-महादेव मंदिर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।
कटान से 10 बीघा भूमि गंगा में समाहित
भांवरकोल। शेरपुर मौजा के जलालपुर, मुबारकपुर में कटान जारी है। गंगा किनारे लगाए गए ठोकरों से टकराकर गंगा का पानी कटान कर रहा है। लगभग 10 बीघा भूखंड गंगा में समाहित हो गया है। क्षेत्र में मिर्च और टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इसके कारण किसानों को डर सता रहा है कि अगर गंगा का जलस्तर आगे भी बढ़ता रहता तो उनकी खेती को काफी नुकसान होगा।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार की शाम को गंगा का जलस्तर तीन सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। बाढ़ का पानी पसरने के कारण रेवतीपुर क्षेत्र का निचला इलाका विशेष रूप से प्रभावित हुआ है। नसीरपुर, हसनपुरा, वीरउपुर, परमानंदपुर, दुल्लहपुर, अठहठा आदि गांवों के खेत जलमग्न हो चुके हैं। साथ ही ये गांव एक तरफ से पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। ग्रामीण ऊंचाई वाले स्थानों के रास्तों से आवागमन कर रहे हैं। इस इलाके में लगभग 50 बीघा में परवल की खेती जलमग्न हुई है। वहीं 50 बीघा के करीब चरी की फसल डूब गई है। गहमर में कामाख्या धाम के आसपास करीब 100 बीघा और सैदपुर क्षेत्र में लगभग 90 बीघा फसल जलमग्न है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
विज्ञापन
रेवतीपुर क्षेत्र के हसनपुरा प्राथमिक विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी आ चुका है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय को फिलहाल दो दिनों के लिए बंद किया गया है। विद्यालय में लगभग 150 बच्चे पढ़ते हैं। विद्यालय बंद होने से बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। सैदपुर: बाढ़ के कारण जौहरगंज, औड़िहार, शादी-भादी, कोल्हुआ घाट, फुलवारी कला, फुलवारी खुद, टोडरपुर आदि गांवों के खेत प्रभावित हैं। इन गांवों के लगभग 90 बीघा खेत जलमग्न हो चुके हैं। नालों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है, इसके कारण गांवों में पानी पसरने का खतरा मंडरा रहा है। गंगा और गोमती के बाढ़ के पानी के कारण कुसई, खरौना, सूरजभान चक, सिधौना, नगरिया नाला, गौरी, गोरखा आदि गांव प्रभावित हैं।
विज्ञापन
रेवतीपुर-गहमर रोड पर कमर तक पानी, आवागमन बंद
गाजीपुर। रेवतीपुर से गहमर तक जाने के लिए लगभग 12 किलोमीटर बाइपास मार्ग है। मार्ग पर कमर से ऊपर तक बाढ़ का पानी है। इससे मार्ग पर आवागमन बंद है, क्योंकि बाढ़ के पानी का बहाव काफी तेज है। मार्ग किनारे बसे नगदीलपुर, हसनपुरा आदि गांवों के लोग संपर्क मार्ग से आवागमन कर रहे हैं। इसी तरह नसीरपुर-भदौरा मार्ग पर लगभग 300 मीटर के दायरे में बाढ़ का पानी सड़क पर फैल चुका है। 300 मीटर के दायरे में गर्दन तक बाढ़ का पानी लगा हुआ है।
पशु पालकों के सामने चारे का संकट
गाजीपुर। रेवतीपुर क्षेत्र में बड़े दायरे में चरी की फसल जलमग्न हो चुकी है। इससे पशु पालकों के सामनने पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। वह इधर-उधर से चारे का इंतजाम कर रहे हैं। महीनों चारे की व्यवस्था के लिए किसान खेतों में चरी की बोवाई करते हैं। किसान रमेश, सुरेश प्रजापति, मोहन यादव आदि का कहना है कि वर्तमान में प्रशासन की ओर से भी भूसे की व्यवस्था कराई गई, लेकिन बाढ़ का पानी खत्म हो जाने के बाद मवेशियों को क्या खिलाएंगे।
नालों में घुसने लगा बाढ़ का पानी, गांवों को खतरा
गहमर। क्षेत्र में कामख्या धाम मंदिर परिसर के पास स्थित गदाईपुर, पथरा, करहिया आदि गांवों की लगभग 100 बीघा खेत में बाढ़ का पानी पसर गया है। साथ ही गहमर स्थित नरवा घाट की लगभग 10 सीढि़यां डूब चुकी हैं। नालों में गंगा के बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है। इससे गांवों में पानी घुसने का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ का पानी हनुमान चबूतरा मैदान तक पहुंचने वाला है। गंगा किनारे स्थित बबुरहनी बस्ती के लोग भी काफी चिंतित हैं। गंगा उस पार दीयर क्षेत्र डूब जाने से खड़ी फसल डूब गई है। गहमर गांव के सोझवा घाट और पंचमुखी घाट पर काफी तेजी से कटान हो रहा है। गंगा के साथ-साथ कर्मनाशा में भी जलस्तर बढ़ा है। कर्मनाशा के तटवर्ती गांव भतौरा, मनिहर वन, सायर के ग्रामीण संशकित नजर आ रहे हैं।
श्मशान घाटों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
सैदपुर। जौहरगंज श्मशान घाट पर गंगा के बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। विद्युत शव दाह गृह बाढ़ की जद में आ चुका है। इससे दस मीटर की दूरी पर सड़क किनारे शव का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसी तरह पटना गांव स्थित रामतवक्का श्मशान घाट पर 10 फीट तक बाढ़ का पानी पसरा हुआ है, जिससे 30 फीट की दूरी पर रामानंद मठिया के पश्चिमी छोर पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसी क्रम में औड़िहार वाराह रूप घाट की सीढि़या डूब चुकी हैं। विष्णु-महादेव मंदिर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।
कटान से 10 बीघा भूमि गंगा में समाहित
भांवरकोल। शेरपुर मौजा के जलालपुर, मुबारकपुर में कटान जारी है। गंगा किनारे लगाए गए ठोकरों से टकराकर गंगा का पानी कटान कर रहा है। लगभग 10 बीघा भूखंड गंगा में समाहित हो गया है। क्षेत्र में मिर्च और टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इसके कारण किसानों को डर सता रहा है कि अगर गंगा का जलस्तर आगे भी बढ़ता रहता तो उनकी खेती को काफी नुकसान होगा।