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पानी उतरने के साथ दिखने लगा खौफनाक मंजर
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Thu, 01 Sep 2016 11:57 PM IST
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flood due to heavy rain in purnagiri route
- फोटो : amar ujala
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जनपद के चार तहसीलों में बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही खौफनाक मंजर साफ दिखाई देने लगा है। घरों के क्षतिग्रस्त सामान, अंदर और बाहर जमा मलवा, सीवान में तबाह हुईं फसलें देख बाढ़ पीड़ितों का कलेजा फटा जा रहा है। बाढ़ खत्म होने के बाद तेज धूप निकलने से फसलों की सड़न, मृत जानवरों की दुर्गंध से लोगों का जीना हराम हो गया है। राहत शिविरों से लौट रहे लोग अपने घरों की सफाई में जुट गए हैं।
गंगा की बाढ़ से 56 गांवों में से 36 गांवों की हालत अब भी बद से बदतर है। इन गांवों की लगभग 55 हजार की आबादी समस्याओं से जूझ रही है। यहां न तो उनके लिए खाने की कोई व्यवस्था है और न रहने की। इतना ही नहीं बीमार बाढ़ पीड़ितों को उपचार के लिए भी भटकना पड़ रहा है। बाढ़ के पानी से करोड़ों की फसल और सब्जी की खेती बर्बाद हो गई है। बाढ़ के पानी से लोगों के घरों में मलबा जम गया है। घर गृहस्थी के सामान खराब हो गए हैं। घरों का मलवा हटाना पीड़ितों के लिए एक चुनौती बन गई है। सड़कों पर मलवा होने से संपर्क मार्ग चलने लायक नहीं रह गए हैं। कई घरों में अब भी पानी भरा हुआ है।
आलम यह है कि एनएच-31 और बाढ़ राहत शिविरों से लोग अपने घरों को वापस हो चुके हैं। पशुओं के चारा की गंभीर समस्या इलाके में उत्पन्न हो गई है। जिला प्रशासन की तरफ से उनको चारा बांटा जा रहा है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। ऐसे में पशु पालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पेयजल स्रोतों के संक्रमित होने और दवाओं का छिड़काव न किए जाने से लोग संक्रामक बीमारी की जद में आते जा रहे हैं। क्षेत्र में हजारों एकड़ फसलों की क्षति हुई है। जिसमें अरहर, बाजरा, तिल, मक्का के अलावा धान की फसलें खराब हुई है। एक पखवारे से पानी में डूबे रहने के बाद फसलें बेजान हो गई हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद यह खौफनाक मंजर गंगा के तटवर्ती इलाकों तथा मुहम्मदाबाद के करईल क्षेत्र मेंद देखने को मिल रहा है।
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गंगा की बाढ़ से 56 गांवों में से 36 गांवों की हालत अब भी बद से बदतर है। इन गांवों की लगभग 55 हजार की आबादी समस्याओं से जूझ रही है। यहां न तो उनके लिए खाने की कोई व्यवस्था है और न रहने की। इतना ही नहीं बीमार बाढ़ पीड़ितों को उपचार के लिए भी भटकना पड़ रहा है। बाढ़ के पानी से करोड़ों की फसल और सब्जी की खेती बर्बाद हो गई है। बाढ़ के पानी से लोगों के घरों में मलबा जम गया है। घर गृहस्थी के सामान खराब हो गए हैं। घरों का मलवा हटाना पीड़ितों के लिए एक चुनौती बन गई है। सड़कों पर मलवा होने से संपर्क मार्ग चलने लायक नहीं रह गए हैं। कई घरों में अब भी पानी भरा हुआ है।
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आलम यह है कि एनएच-31 और बाढ़ राहत शिविरों से लोग अपने घरों को वापस हो चुके हैं। पशुओं के चारा की गंभीर समस्या इलाके में उत्पन्न हो गई है। जिला प्रशासन की तरफ से उनको चारा बांटा जा रहा है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। ऐसे में पशु पालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पेयजल स्रोतों के संक्रमित होने और दवाओं का छिड़काव न किए जाने से लोग संक्रामक बीमारी की जद में आते जा रहे हैं। क्षेत्र में हजारों एकड़ फसलों की क्षति हुई है। जिसमें अरहर, बाजरा, तिल, मक्का के अलावा धान की फसलें खराब हुई है। एक पखवारे से पानी में डूबे रहने के बाद फसलें बेजान हो गई हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद यह खौफनाक मंजर गंगा के तटवर्ती इलाकों तथा मुहम्मदाबाद के करईल क्षेत्र मेंद देखने को मिल रहा है।
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