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जिला जेल में छापा, मोबाइल बरामद
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Wed, 20 Apr 2016 11:56 PM IST
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जेल में छापा
- फोटो : अमर उजाला
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जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक रामकिशोर के साथ जिला जेल में छापा मारा। सुबह साढ़े नौ बजे अचानक पहुंचे अधिकारियों ने करीब एक घंटे तक जेल के बैरकों को खंगाला। इस दौरान एक बैरक के सामने नाली में प्लास्टिक में लपेटकर फेंका गया मोबाइल बरामद हुआ। इस कार्रवाई से जेल प्रशासन में हड़कंप मचा रहा, वहीं बंदी भी सहमे रहे।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक बुधवार की सुबह 9.30 बजे पुलिस बल के साथ अचानक जिला कारागार पहुंचे। दोनों अधिकारियों को बैरकों में एक कैदी के पास कई-कई झोले पाए गए। इस पर डीएम ने जेलर को निर्देश दिया कि एक कैदी को केवल एक बैग रखने की ही अनुमति दी जाए। उन्होंने बैरकों में साफ-सफाई, बिजली, पानी तथा भोजन के संबन्ध में बंदियों से जानकारी ली। बैरकों से बाहर काफी संख्या में कैदियों से कर्मचारी के रूप में कार्य लेने की शिकायत पर अधिकारियों ने जेलर से पूछताछ की।
जेलर ने बताया कि स्टाफ की कमी के चलते कैदियों से ही कार्य लिया जाता है। इस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि अधिक कैदियों के एक साथ बैरक से बाहर रखने पर कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। इसके बाद डीएम, एसपी ने जेल के भोजनालय का निरीक्षण किया। इस दौरान कैदियों को सब्जी बदल-बदल कर देने का निर्देश दिया। बैरक संख्या सात के निरीक्षण के दौरान नाली में प्लास्टिक में लपेट कर फेंका गया बिना सिम का मोबाइल सेट बरामद किया गया। लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि किस कैदी का है। जिलाधिकारी ने मोबाइल को सीज करते हुए जांच करने का निर्देश दिया।
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जेल के अस्पताल के निरीक्षण में जिलाधिकारी ने पाया कि दो कैदियों को बिना परामर्श के अस्पताल मे भर्ती दिखाया गया था। निरीक्षण के समय पर्ची पाई गई लेकिन बंदी बैरक में थे। वीडियो कांफ्रेंसिंग कक्ष का कार्य अधूरा पाया गया। पूरे जेल की सुरक्षा में सिफ्टवार सिर्फ 10 गार्ड लगाने की बात बताई गई। महिला बैरक में 36 महिला बंदी बंदी थीं। उनके साथ दो छोटे बच्चे भी थे जिन्हें दूध, फल मिलने के बारे में डीएम ने पूछा तो महिला बंदियों ने बताया कि बच्चों को फल नहीं सिर्फ दूध मिलता है। निरीक्षण के समय मजिस्ट्रेट एके सिंह, एसपी सिटी लल्लन राय भी मौजूद रहे।
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जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक बुधवार की सुबह 9.30 बजे पुलिस बल के साथ अचानक जिला कारागार पहुंचे। दोनों अधिकारियों को बैरकों में एक कैदी के पास कई-कई झोले पाए गए। इस पर डीएम ने जेलर को निर्देश दिया कि एक कैदी को केवल एक बैग रखने की ही अनुमति दी जाए। उन्होंने बैरकों में साफ-सफाई, बिजली, पानी तथा भोजन के संबन्ध में बंदियों से जानकारी ली। बैरकों से बाहर काफी संख्या में कैदियों से कर्मचारी के रूप में कार्य लेने की शिकायत पर अधिकारियों ने जेलर से पूछताछ की।
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जेलर ने बताया कि स्टाफ की कमी के चलते कैदियों से ही कार्य लिया जाता है। इस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि अधिक कैदियों के एक साथ बैरक से बाहर रखने पर कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। इसके बाद डीएम, एसपी ने जेल के भोजनालय का निरीक्षण किया। इस दौरान कैदियों को सब्जी बदल-बदल कर देने का निर्देश दिया। बैरक संख्या सात के निरीक्षण के दौरान नाली में प्लास्टिक में लपेट कर फेंका गया बिना सिम का मोबाइल सेट बरामद किया गया। लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि किस कैदी का है। जिलाधिकारी ने मोबाइल को सीज करते हुए जांच करने का निर्देश दिया।
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जेल के अस्पताल के निरीक्षण में जिलाधिकारी ने पाया कि दो कैदियों को बिना परामर्श के अस्पताल मे भर्ती दिखाया गया था। निरीक्षण के समय पर्ची पाई गई लेकिन बंदी बैरक में थे। वीडियो कांफ्रेंसिंग कक्ष का कार्य अधूरा पाया गया। पूरे जेल की सुरक्षा में सिफ्टवार सिर्फ 10 गार्ड लगाने की बात बताई गई। महिला बैरक में 36 महिला बंदी बंदी थीं। उनके साथ दो छोटे बच्चे भी थे जिन्हें दूध, फल मिलने के बारे में डीएम ने पूछा तो महिला बंदियों ने बताया कि बच्चों को फल नहीं सिर्फ दूध मिलता है। निरीक्षण के समय मजिस्ट्रेट एके सिंह, एसपी सिटी लल्लन राय भी मौजूद रहे।