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Ghazipur News: नर्सरी डालने के लिए पानी का इंतजार कर रहे किसान
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बारा। गहमर पूर्वी पंप कैनाल को 24 घंटे बिजली देने के लिए स्वतंत्र उपकेंद्र का निर्माण किया गया है, लेकिन उपकेंद्र की बदहाल स्थिति के चलते पंप कैनाल से पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। लघुडाल एवं बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। नहर के सहारे धान की नर्सरी डालने वाले किसान पानी आने की राह देख रहे हैं। पंप कैनाल का विद्युत उपकेंद्र परिसर पर झाड़ - झंखाड़ का पूरी तरह कब्जा हो गया है। जिससे अंदर जाकर काम करने से वहां तैनात कर्मचारी डरते हैं।
गहमर पूर्वी पंप कैनाल कभी बिजली तो कभी लघुडाल विभाग की उदासीनता का शिकार है। 20 क्यूसेक क्षमता वाली गहमर पूर्वी पंप कैनाल से बारा, मिश्रवलिया, रसूलपुर, पटकवलिया, सिकंदरपुर, रोइनी, मनिहरबुजुर्ग आदि मौजा के किसान नहर के माध्यम से खेतों की सिंचाई करते हैं। कैनाल के उपकेंद्र में झाड़ - झंखाड़ की बहुलता के कारण आपूर्ति बराबर बाधित होती रहती है। जिसके चलते कैनाल से पानी की सप्लाई बंद हो जाती है।
परिसर में उग आए झाड़-झंखाड़ इतने बड़े हो गए हैं कि वह कहीं-कहीं विद्युत तारों को छू रहे हैं, जिसके चलते लाइन ट्रिप कर जाती है और पंप कैनाल से नहर में पानी नहीं छोड़ा जाता। दिन में ट्रिप के बाद कर्मचारी किसी तरह लाइन को दुरुस्त तो कर देते हैं लेकिन रात में जाने से डरते हैं। ऐसे में स्वतंत्र उपकेंद्र का पूरा लाभ पंप कैनाल को नहीं मिल रहा है। धान की नर्सरी डालने के समय ही पंप कैनाल से पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
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बारा के प्रगतिशील किसान मास्टर एजाज खां, जियाउद्दीन खां, सरफराज खां, मतलूब खां, ओमकार यादव, महेंद्र यादव, जुबैर खां, दिनेश यादव सहित आदि ने बताया कि हर साल नर्सरी डालने के समय गहमर पूर्वी पंप कैनाल बंद हो जाता है। कभी बिजली की समस्या तो कभी पंप कैनाल में मशीनों की खराबी बनी रहती है। किसानों ने बताया कि इस समय धान की नर्सरी डालने का समय है। लेकिन अब तक पंप कैनाल से पानी नहीं छोड़ा गया है। जिसके चलते नहर व माइनरों में धूल उड़ रही है। पंप कैनाल पर स्थित स्वतंत्र उपकेंद्र में झाड़ - झंखाड़ से भी सप्लाई बाधित हो रही है। सफाई कराना बेहद जरूरी है।
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तत्काल की जाएगी साफ-सफाई : एसएसओ
विद्युत उपकेंद्र बारा के एसएसओ कैलाश यादव ने कहा कि पंप कैनाल के स्वतंत्र उपकेंद्र परिसर की साफ-सफाई की व्यवस्था की जिम्मेदारी वहां नियुक्त सिंचाई विभाग के ऑपरेटर की है। फाल्ट होने पर बिजली विभाग का कर्मचारी उसे ठीक करता है। झाड़-झंखाड़ के कारण फाल्ट होना स्वभाविक है।
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गहमर पूर्वी पंप कैनाल कभी बिजली तो कभी लघुडाल विभाग की उदासीनता का शिकार है। 20 क्यूसेक क्षमता वाली गहमर पूर्वी पंप कैनाल से बारा, मिश्रवलिया, रसूलपुर, पटकवलिया, सिकंदरपुर, रोइनी, मनिहरबुजुर्ग आदि मौजा के किसान नहर के माध्यम से खेतों की सिंचाई करते हैं। कैनाल के उपकेंद्र में झाड़ - झंखाड़ की बहुलता के कारण आपूर्ति बराबर बाधित होती रहती है। जिसके चलते कैनाल से पानी की सप्लाई बंद हो जाती है।
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परिसर में उग आए झाड़-झंखाड़ इतने बड़े हो गए हैं कि वह कहीं-कहीं विद्युत तारों को छू रहे हैं, जिसके चलते लाइन ट्रिप कर जाती है और पंप कैनाल से नहर में पानी नहीं छोड़ा जाता। दिन में ट्रिप के बाद कर्मचारी किसी तरह लाइन को दुरुस्त तो कर देते हैं लेकिन रात में जाने से डरते हैं। ऐसे में स्वतंत्र उपकेंद्र का पूरा लाभ पंप कैनाल को नहीं मिल रहा है। धान की नर्सरी डालने के समय ही पंप कैनाल से पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
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बारा के प्रगतिशील किसान मास्टर एजाज खां, जियाउद्दीन खां, सरफराज खां, मतलूब खां, ओमकार यादव, महेंद्र यादव, जुबैर खां, दिनेश यादव सहित आदि ने बताया कि हर साल नर्सरी डालने के समय गहमर पूर्वी पंप कैनाल बंद हो जाता है। कभी बिजली की समस्या तो कभी पंप कैनाल में मशीनों की खराबी बनी रहती है। किसानों ने बताया कि इस समय धान की नर्सरी डालने का समय है। लेकिन अब तक पंप कैनाल से पानी नहीं छोड़ा गया है। जिसके चलते नहर व माइनरों में धूल उड़ रही है। पंप कैनाल पर स्थित स्वतंत्र उपकेंद्र में झाड़ - झंखाड़ से भी सप्लाई बाधित हो रही है। सफाई कराना बेहद जरूरी है।
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तत्काल की जाएगी साफ-सफाई : एसएसओ
विद्युत उपकेंद्र बारा के एसएसओ कैलाश यादव ने कहा कि पंप कैनाल के स्वतंत्र उपकेंद्र परिसर की साफ-सफाई की व्यवस्था की जिम्मेदारी वहां नियुक्त सिंचाई विभाग के ऑपरेटर की है। फाल्ट होने पर बिजली विभाग का कर्मचारी उसे ठीक करता है। झाड़-झंखाड़ के कारण फाल्ट होना स्वभाविक है।