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सजल थीं आंखें, चेहरे पर दिखा गर्व

Wed, 28 Jan 2015 11:45 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर Updated Wed, 28 Jan 2015 11:45 PM IST
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eyes were hydrous but  pride showing on face
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में मंगलवार की सुबह आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में शहीद हुए कर्नल मुनींद्र नाथ राय की शहादत पर वृद्ध माता-पिता ही नहीं जनपदवासियों को भी गर्व है।
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बुधवार को भले ही शहीद के पैतृक गांव डेढ़गांवा, चंदन नगर कालोनी (जहां माता-पिता रहते हैं) और जमानिया के ताजपुर गांव (ससुराल) में मातम पसरा रहा हो, चूल्हे न जले हों और लोगों की आंखें सजल रहीं हों, बावजूद इसके लोग इसपर इतराते रहे कि जिले के लाल ने देश की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
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हालांकि सभी को इसका अफसोस जरूर रहा कि वे अपने वीर सपूत का अंतिम दर्शन नहीं कर सके। कर्नल मुनींद्रनाथ राय की शहादत की खबर मंगलवार की देर शाम ही आ गई थी।
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इसके बाद से उनके पैतृक गांव डेढ़गांवा, शहर की चंदन नगर कालोनी और ताजपुर गांव स्थित ससुराल में शोक की लहर दौड़ गई थी। बेटे को खोने के गम में मां शिवदुलारी देवी बिलखने लगीं, जबकि पिता नागेंद्र प्रसाद राय को तो मानो काठ मार गया।

उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि वतन के लिए अपनी जान देकर मुनींद्र अमर हो गया। दोनों इस बात को लेकर ज्यादा बेचैन नजर आए कि कब वे अपने बहादुर बेटे को अंतिम बार देख पाएंगे। उसके जज्बे को सलाम कर सकेंगे। इसी इंतजार में माता-पिता ने पलकें खोलकर रात गुजार दी।


माता-पिता दिल्ली रवाना ः सेना की गाड़ी बुधवार की सुबह चंदन नगर कालोनी पहुंची और शहीद मुनींद्र के पिता नागेंद्र प्रसाद राय और मां शिवदुलारी देवी के साथ ही चचेरे भाई मुन्ना राय को लेकर वाराणसी चली गई। वहां बाबतपुर एयरपोर्ट से सभी दिल्ली रवाना हो गए। वहां मौजूद कालोनीवासियों ने शहीद के माता-पिता को ढांढस बंधाते हुए विदा किया।

बाल सखा को किया था मैसेज ः जिंदगी इतनी शिद्दत से निभाओ कि पर्दा गिरने के बाद भी तालियां बजती रहें। 25 जनवरी की रात 8 बजे अपने बाल सखा डेढ़गांवा निवासी केदारनाथ उपाध्याय को यह मैसेज भेजने के बाद कर्नल मुनींद्रनाथ को क्या मालूम था कि इस संदेश को वह कुछ ही घंटे बाद चरितार्थ कर देंगे।

आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में जिले के इस लाल ने अपनी जिंदगी को इतनी शिद्दत से निभाया कि वह आज हमारे बीच में नहीं हैं लेकिन उनकी वीरता की चर्चा कर हर कोई उन्हें सलाम कर रहा है।

अपने बहादुर मित्र के इस अंतिम संदेश को पढ़कर केदारनाथ की आंखों से आंसू तो थम नहीं रहे हैं, फिर भी दोस्त की जांबाजी से उनका सीना चौड़ा हो गया है।
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