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पलायन का सिलसिला जारी
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sat, 17 Sep 2016 11:05 PM IST
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मुहम्मदाबाद के सेमरा में हो रहा गंगा कटान।
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सेमरा एवं शिवरायकापुरा में भीषण कटान से सहमे ग्रामवासियों का घरों को खाली कर सामान अन्यत्र ले जाने का क्रम शुक्रवार को भी जारी रहा। जिलाधिकारी के निर्देश पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने भी कटान की जगह पर बल्लियां लगाकर और बालू भरी बोरियां डालकर इससे बचाने का प्रयास शुरू कर दिया है।
पिछले 48 घंटे तक चले भीषण कटान में दो दर्जन रिहायशी मकान, सेमरा से शेरपुर जाने वाली सड़क, विशाल इमली का पेड़, बांस की खुटिया आदि गंगा की कटान की भेंट चढ़ गई थी जिससे लोग काफी सहमे हुए हैं। 2013 में हुई भीषण कटान में शिवरायकापुरा का 75 प्रतिशत हिस्सा कटान की भेंट चढ़ गया था। बचा भाग इस वर्ष गंगा की धारा में विलीन हो जाने से गांव का अस्तित्व ही समाप्त होने के कगार पर है। गांव के पूरब परिया चौरासी एवं रामतुलाई के पास बने कटान क्षेत्र मे इस वर्ष बड़े पैमाने पर कृषि भूमि एवं रिहायशी मकान कटान में विलीन हो चुके हैं। प्रशासनिक अधिकारी कटान पीड़ितों का दर्द पूछने भी नहीं जा रहा है।
तहसील में एसडीएम का पद रिक्त है। लेखपाल हड़ताल पर हैं। इस लिये कटान पीड़ितों की सूची भी नहीं बन पा रही है। 2013 के कटान पीड़ितों को आज तक आवास मुहैया न होने से वे गांव के प्राथमिक एवं सीनियर बेसिक विद्यालय के अलावा यूसुफपुर कृषि मंडी समिति, मुहम्मदाबाद सीनियर एवं प्राथमिक विद्यालय के विस्थापित कैंपों के अलावा सड़क के किनारे प्लास्टिक डालकर रह रहे हैं।
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इनको बसाने के लिये सरकारी स्तर पर खरीदी गई भूमि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। बाढ़ प्रभावित एरिया में होने के कारण कटान पीड़ित को वहां जाने से मना कर रहे हैं।
पिछले 48 घंटे तक चले भीषण कटान में दो दर्जन रिहायशी मकान, सेमरा से शेरपुर जाने वाली सड़क, विशाल इमली का पेड़, बांस की खुटिया आदि गंगा की कटान की भेंट चढ़ गई थी जिससे लोग काफी सहमे हुए हैं। 2013 में हुई भीषण कटान में शिवरायकापुरा का 75 प्रतिशत हिस्सा कटान की भेंट चढ़ गया था। बचा भाग इस वर्ष गंगा की धारा में विलीन हो जाने से गांव का अस्तित्व ही समाप्त होने के कगार पर है। गांव के पूरब परिया चौरासी एवं रामतुलाई के पास बने कटान क्षेत्र मे इस वर्ष बड़े पैमाने पर कृषि भूमि एवं रिहायशी मकान कटान में विलीन हो चुके हैं। प्रशासनिक अधिकारी कटान पीड़ितों का दर्द पूछने भी नहीं जा रहा है।
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तहसील में एसडीएम का पद रिक्त है। लेखपाल हड़ताल पर हैं। इस लिये कटान पीड़ितों की सूची भी नहीं बन पा रही है। 2013 के कटान पीड़ितों को आज तक आवास मुहैया न होने से वे गांव के प्राथमिक एवं सीनियर बेसिक विद्यालय के अलावा यूसुफपुर कृषि मंडी समिति, मुहम्मदाबाद सीनियर एवं प्राथमिक विद्यालय के विस्थापित कैंपों के अलावा सड़क के किनारे प्लास्टिक डालकर रह रहे हैं।
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इनको बसाने के लिये सरकारी स्तर पर खरीदी गई भूमि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। बाढ़ प्रभावित एरिया में होने के कारण कटान पीड़ित को वहां जाने से मना कर रहे हैं।