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Ghazipur News: 23 वाहन लगाने के बाद भी नगर में कूड़ा उठाने का समय निर्धारित नहीं
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गाजीपुर। नगर में कूड़ा उठाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। इसके कारण दिन में सार्वजनिक जगहों पर कूड़ों का अंबार लगा रहता है। दुर्गंध के कारण लोगों का राह चलना दूभर हो जाता है। साथ ही संक्रामक बीमारियों के फैलने का भय हमेशा बना रहता है। लोगों की मांग है कि नगर में कूड़ा उठाने के लिए समय निर्धारित होना चाहिए। जबकि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में नगर पालिका की ओर से 23 वाहन लगाए गए हैं।
शहर के अंदर 25 वार्ड हैं। इन 25 वार्डों में विभिन्न जगहों पर कूड़ा कलेक्शन सेंटर बनाया गया है। विभिन्न जगहों से आए कूड़ों को यहां पर डंप किया जाता है। इसके बाद यहां से कूड़ों का उठान ट्रैक्टरों के जरिए किया जाता है, लेकिन कूड़ा उठाने का समय स्थान के हिसाब से तय नहीं है। कभी कूड़ा दस बजे उठाया जाता है तो कभी दोपहर में एक बजे। इसके कारण कूड़ा कलेक्शन सेंटरों की सड़कों से राह गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। बदबू के कारण लोग अपनी नाक पर रूमाल रखने के लिए विवश हो जाते हैं। वहीं कूड़ा कलेक्शन सेंटरों के आसपास के लोग हमेशा संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका से संशकित रहते हैं। बुधवार को सुबह 11 बजे तक नगर के आमघाट कॉलोनी के कूड़ा कलेक्शन सेंटर से कूड़ा नहीं उठा था। इसी तरह दोपहर एक बजे तक नगर के आरटीआई स्थित नवीन स्टेडियम और डेढ़ बजे तक ददरीघाट रोड पर कूड़े का अंबार नजर आया। इस संबंध में नगर पालिका ईओ आलोक कुमार सिंह ने बताया कि समय से कूड़ा उठाने सुनिश्चित कराया जाएगा।
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दावा डोर-टू-डोर का, लेकिन हकीकत कुछ और
नगर पालिका प्रशासन की ओर से शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का दावा किया जाता है। दावा किया जाता है कि हर एक घर से कूड़ा इकट्ठा किया जाता है, लेकिन सच्चाई इसके इतर है। कूड़ा कलेक्शन सेंटरों पर लोग अपने घरों के कूड़ों को भी फेंकते हैं। इसी से नगर पालिका के दावे की पोल खुल जाती है। सवाल यह है कि यदि वास्तव में नगर पालिका प्रशासन की ओर से हर एक घर से कूड़ा इकट्ठा किया जाता है तो फिर लोग कूड़ा कलेक्शन सेंटरों पर अपने घरों का कूड़ा क्यों फेंकते हैं। जबकि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में नगर पालिका की ओर से 23 वाहन लगाए गए हैं।
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शहर के अंदर 25 वार्ड हैं। इन 25 वार्डों में विभिन्न जगहों पर कूड़ा कलेक्शन सेंटर बनाया गया है। विभिन्न जगहों से आए कूड़ों को यहां पर डंप किया जाता है। इसके बाद यहां से कूड़ों का उठान ट्रैक्टरों के जरिए किया जाता है, लेकिन कूड़ा उठाने का समय स्थान के हिसाब से तय नहीं है। कभी कूड़ा दस बजे उठाया जाता है तो कभी दोपहर में एक बजे। इसके कारण कूड़ा कलेक्शन सेंटरों की सड़कों से राह गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। बदबू के कारण लोग अपनी नाक पर रूमाल रखने के लिए विवश हो जाते हैं। वहीं कूड़ा कलेक्शन सेंटरों के आसपास के लोग हमेशा संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका से संशकित रहते हैं। बुधवार को सुबह 11 बजे तक नगर के आमघाट कॉलोनी के कूड़ा कलेक्शन सेंटर से कूड़ा नहीं उठा था। इसी तरह दोपहर एक बजे तक नगर के आरटीआई स्थित नवीन स्टेडियम और डेढ़ बजे तक ददरीघाट रोड पर कूड़े का अंबार नजर आया। इस संबंध में नगर पालिका ईओ आलोक कुमार सिंह ने बताया कि समय से कूड़ा उठाने सुनिश्चित कराया जाएगा।
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दावा डोर-टू-डोर का, लेकिन हकीकत कुछ और
नगर पालिका प्रशासन की ओर से शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का दावा किया जाता है। दावा किया जाता है कि हर एक घर से कूड़ा इकट्ठा किया जाता है, लेकिन सच्चाई इसके इतर है। कूड़ा कलेक्शन सेंटरों पर लोग अपने घरों के कूड़ों को भी फेंकते हैं। इसी से नगर पालिका के दावे की पोल खुल जाती है। सवाल यह है कि यदि वास्तव में नगर पालिका प्रशासन की ओर से हर एक घर से कूड़ा इकट्ठा किया जाता है तो फिर लोग कूड़ा कलेक्शन सेंटरों पर अपने घरों का कूड़ा क्यों फेंकते हैं। जबकि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में नगर पालिका की ओर से 23 वाहन लगाए गए हैं।