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Ghazipur News: लंबी जद्दोजहद के बाद भी 94.19 करोड़ का बजट वापस
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चालू वित्तीय वर्ष समाप्त हो गया। ऐसे में सोमवार की रात बजे तक सभी विभाग बजट खपाने में लगे हैं। ईद का अवकाश होने के बाद भी कोषागार एवं बैंकों में कामकाज होता रहा।
विभागीय बजट का लेखा-जोखा वित्तीय वर्ष की शुरुआत से नहीं रखने के कारण क्लोजिंग के दौरान हाय-तौबा मची रही। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक 94.19 करोड़ रुपये शासन को वापस करने पड़ गए।
जिले में कुल 158 परियोजनाओं में 46 पूरी हो चुकी हैं। 6.99 करोड़ की लागत से स्टेडियम का निर्माण हुआ है, जो अभी तक हैंडओवर नहीं हो पाया है। इसी तरह 9.86 करोड़ की लागत से ड्रग वेयर हाउस, 9.89 करोड़ से बन रहा गो संरक्षण केंद्र, 1.32 करोड़ से सोमेश्वर महादेव का पर्यटन विकास, 2.95 करोड़ से राजकीय पॉलिटेक्निक हाॅस्टल समेत 112 परियोजनाओं का काम चल रहा है। इसी तरह बात अगर, प्रमुख विभाग शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, वन और लोक निर्माण विभाग की करें तो पूरे साल में 16 अरब 97 करोड़ 03 लाख 77 हजार 760 रुपये आवंटित हुए। सोमवार को ईद का अवकाश होने के बाद भी सुबह से ही कोषागार सहित जिले के सभी प्रमुख बैंकों पर कर्मचारी काम करते दिखे। लगातार 15 दिनों से देर शाम तक बैंकों एवं कोषागार में पिछला लेखा-जोखा दुरुस्त करने के लिए कर्मचारी लगे थे।
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वित्तीय वर्ष का अंतिम कार्य दिवस होने के कारण सोमवार को भी जो बिल आए, उनका निष्पादन तेजी से करने की व्यवस्था की गई। रात नौ बजे तक भुगतान सुनिश्चित हो सके। कोई भी बिल पेंडिंग न रहे, इसकी कोशिश की गई। बावजूद इसके 94.19 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो पाए, जिसके चलते उसे शासन को वापस कर दिया गया। इसमें सबसे अधिक शिक्षा और स्वास्थ्य का बजट रहा।
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विभागीय बजट का लेखा-जोखा वित्तीय वर्ष की शुरुआत से नहीं रखने के कारण क्लोजिंग के दौरान हाय-तौबा मची रही। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक 94.19 करोड़ रुपये शासन को वापस करने पड़ गए।
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जिले में कुल 158 परियोजनाओं में 46 पूरी हो चुकी हैं। 6.99 करोड़ की लागत से स्टेडियम का निर्माण हुआ है, जो अभी तक हैंडओवर नहीं हो पाया है। इसी तरह 9.86 करोड़ की लागत से ड्रग वेयर हाउस, 9.89 करोड़ से बन रहा गो संरक्षण केंद्र, 1.32 करोड़ से सोमेश्वर महादेव का पर्यटन विकास, 2.95 करोड़ से राजकीय पॉलिटेक्निक हाॅस्टल समेत 112 परियोजनाओं का काम चल रहा है। इसी तरह बात अगर, प्रमुख विभाग शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, वन और लोक निर्माण विभाग की करें तो पूरे साल में 16 अरब 97 करोड़ 03 लाख 77 हजार 760 रुपये आवंटित हुए। सोमवार को ईद का अवकाश होने के बाद भी सुबह से ही कोषागार सहित जिले के सभी प्रमुख बैंकों पर कर्मचारी काम करते दिखे। लगातार 15 दिनों से देर शाम तक बैंकों एवं कोषागार में पिछला लेखा-जोखा दुरुस्त करने के लिए कर्मचारी लगे थे।
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वित्तीय वर्ष का अंतिम कार्य दिवस होने के कारण सोमवार को भी जो बिल आए, उनका निष्पादन तेजी से करने की व्यवस्था की गई। रात नौ बजे तक भुगतान सुनिश्चित हो सके। कोई भी बिल पेंडिंग न रहे, इसकी कोशिश की गई। बावजूद इसके 94.19 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो पाए, जिसके चलते उसे शासन को वापस कर दिया गया। इसमें सबसे अधिक शिक्षा और स्वास्थ्य का बजट रहा।