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Ghazipur News: रेल सह रोड ब्रिज को रोशन करने की कवायद अधर में
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सुहवल। गंगा नदी पर करीब 420 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 1050 मीटर लंबे रेल सह सड़क पुल को रंगीन रोशनी से जगमगाने की महत्वाकांक्षी योजना दो साल से अधर में लटकी हुई है। पुल के बॉटम डेक फ्लोर पर करीब चार करोड़ रुपये की लागत से लगाई गई 395 फ्लैशयुक्त रंगीन एलईडी लाइटें पिछले लगभग दो वर्षों से खराब पड़ी हैं। अब तक उनकी मरम्मत नहीं हो सकी है। इससे पुल को रात में आकर्षक और जगमगाता बनाने की योजना को बड़ा झटका लगा है। इन अत्याधुनिक लाइटों को वर्ष 2023 में पुल के बॉटम डेक फ्लोर के दोनों किनारों पर लगाया गया था। इनका उद्देश्य रात के समय ट्रेनों के गुजरते वक्त पुल को रंग-बिरंगी रोशनी से सुसज्जित कर एक आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करना था।
वर्ष 2024 की शुरुआत में इनका ट्रायल भी किया गया, जिसके बाद कुछ दिनों तक यह पुल सतरंगी रोशनी में नहाकर दूर-दूर तक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। लेकिन, तकनीकी खराबी के चलते फरवरी 2024 में ये लाइटें अचानक बंद हो गईं। इसके बाद मरम्मत के लिए सभी 395 लाइटों को खोलकर हटा दिया गया, परंतु इतना लंबा समय बीत जाने के बावजूद इन्हें अब तक दोबारा नहीं लगाया जा सका है।
रेलवे अधिकारियों की कथित उदासीनता के कारण करोड़ों रुपये की ये लाइटें फिलहाल महज शोपीस बनकर रह गई हैं। प्रत्येक रंगीन लाइट में 48 एलईडी बल्ब लगे हैं और एक लाइट की कीमत लगभग 70 हजार रुपये है। आरवीएनएल के परियोजना निदेशक पीके सिंह ने बताया कि तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी सभी लाइटों को मरम्मत के लिए फिलिप्स कंपनी के पास भेजा गया है। कहा कि लाइटें दोबारा लगने के बाद यह महत्वपूर्ण रेल सह सड़क पुल एक बार फिर रात के समय रंगीन रोशनी से जगमगाता नजर आएगा।
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वर्ष 2024 की शुरुआत में इनका ट्रायल भी किया गया, जिसके बाद कुछ दिनों तक यह पुल सतरंगी रोशनी में नहाकर दूर-दूर तक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। लेकिन, तकनीकी खराबी के चलते फरवरी 2024 में ये लाइटें अचानक बंद हो गईं। इसके बाद मरम्मत के लिए सभी 395 लाइटों को खोलकर हटा दिया गया, परंतु इतना लंबा समय बीत जाने के बावजूद इन्हें अब तक दोबारा नहीं लगाया जा सका है।
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रेलवे अधिकारियों की कथित उदासीनता के कारण करोड़ों रुपये की ये लाइटें फिलहाल महज शोपीस बनकर रह गई हैं। प्रत्येक रंगीन लाइट में 48 एलईडी बल्ब लगे हैं और एक लाइट की कीमत लगभग 70 हजार रुपये है। आरवीएनएल के परियोजना निदेशक पीके सिंह ने बताया कि तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी सभी लाइटों को मरम्मत के लिए फिलिप्स कंपनी के पास भेजा गया है। कहा कि लाइटें दोबारा लगने के बाद यह महत्वपूर्ण रेल सह सड़क पुल एक बार फिर रात के समय रंगीन रोशनी से जगमगाता नजर आएगा।
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