{"_id":"61e1b5f082494d78dc5e2bbf","slug":"donated-after-bathing-in-the-ganges-on-makar-sankranti-ghazipur-news-vns6335749187","type":"story","status":"publish","title_hn":"परंपरागत तरीके से मनाया गया मकर संक्रांति का पर्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परंपरागत तरीके से मनाया गया मकर संक्रांति का पर्व
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मकर संक्रांति का पर्व शुक्रवार को परंपरागत तरीके के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने सुबह गंगा में स्नान किया। इसके बाद पूजन अर्चन कर ब्राह्मणों और गरीबों को खिचड़ी दान किया। इसके बाद घर पहुंच कर दही चूड़ा का सेवन किया। मकर संक्रांति पर बच्चों एवं युवाओं ने जमकर पतंगबाजी की।
शहर सहित ग्रामीणों क्षेत्रों के कई लोगों ने आज मकर संक्रांति का पर्व मनाया। भोर से ही स्नान के लिए लोग घाटों पर पहुंचने लगे थे। गंगा स्नान करने के बाद पूजन-अर्चन किया। इसके बाद गरीबों और ब्राह्मणों को दान किया। कई लोगों ने घर में स्नान कर पूजा-पाठ कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद लोगों ने लाई-चूड़ा और दही का सेवन किया। शाम को घरों में खिचड़ी बनाई गई। परिवार के लोगों ने खिचड़ी खाने के साथ ही इसका वितरण पास-पड़ोस के लोगों में किया। पर्व पर पतंगबाजी का चलन है। बच्चे और युवा सुबह ही परेता लेकर घर के आसपास मैदानों और घर की छत पर पहुंच गए थे। इसके बाद उनकी पतंगबाजी का सिलसिला शाम तक चलता रहा। इसके शौकीनों ने बड़ी संख्या में पतंगें खरीदकर रखी थी। जैसे ही एक पतंग कट रही थी, वैसे ही वह दूसरी पतंग को उड़ाने लग रहे थे।
विज्ञापन
शहर सहित ग्रामीणों क्षेत्रों के कई लोगों ने आज मकर संक्रांति का पर्व मनाया। भोर से ही स्नान के लिए लोग घाटों पर पहुंचने लगे थे। गंगा स्नान करने के बाद पूजन-अर्चन किया। इसके बाद गरीबों और ब्राह्मणों को दान किया। कई लोगों ने घर में स्नान कर पूजा-पाठ कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद लोगों ने लाई-चूड़ा और दही का सेवन किया। शाम को घरों में खिचड़ी बनाई गई। परिवार के लोगों ने खिचड़ी खाने के साथ ही इसका वितरण पास-पड़ोस के लोगों में किया। पर्व पर पतंगबाजी का चलन है। बच्चे और युवा सुबह ही परेता लेकर घर के आसपास मैदानों और घर की छत पर पहुंच गए थे। इसके बाद उनकी पतंगबाजी का सिलसिला शाम तक चलता रहा। इसके शौकीनों ने बड़ी संख्या में पतंगें खरीदकर रखी थी। जैसे ही एक पतंग कट रही थी, वैसे ही वह दूसरी पतंग को उड़ाने लग रहे थे।
विज्ञापन