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Ghazipur News: बिना जांच जारी हो रहा डीएल, हादसों का बन रहा कारण
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गाजीपुर। एआरटीओ विभाग हमेशा किसी न किसी मामलों को लेकर सुर्खियों में बना रहता है। इन दिनों बिना जांच के जारी हो रहे लर्निंग और परमानेंट डीएल का खेल धड़ल्ले से जारी है। कभी पांच तो कभी चार तो कभी बिना जांच के ही लाइसेंस जारी कर दिया जा रहा है। प्रतिदिन ऑनलाइन बुक किए गए स्लॉट के मुताबिक 100 से अधिक चालक अभ्यर्थियों की जांच कर लाइसेंस जारी करने की सूची जारी होती है। ऐसे में कुछ तो ग्राउंड पर वाहन चलाकर पास हो जाते हैं तो अधिकांश को बिना ग्राउंड पर पहुंचे ही लाइसेंस मिलने की हरी झंडी अधिकारियों द्वारा दे दी जाती है।
शासन ने विभाग को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए सभी व्यवस्थाओं को ऑनलाइन तो कर दिया, लेकिन कुछ मामलों में कार्रवाई का अधिकार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सुपुर्द कर दिया।
पड़ताल के दौरान आईटीआई मैदान पर बीते 31 जनवरी को छह चालक अभ्यर्थी, एक फरवरी को कोई नहीं आया था। जबकि शुक्रवार को मुश्किल से चार अथवा पांच अभ्यर्थियों की संख्या थी। छात्र नेता सिद्धांत सिंह करन ने बताया कि डीएल बनाने के नाम पर लंबे समय से खेल जारी है। इस संबंध में बीते दिनों पत्रक भी जिलाधिकारी को दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस संबंध में आरआई संतोष कुमार पटेल ने बताया कि प्रतिदिन 50 से 60 अभ्यर्थी आते हैं, जो समय से नहीं पहुंचते हैं, वे दुबारा जांच के लिए आनलॉइन समय लेते हैं। वहीं, एआरटीओे सौम्या पांडेय का कहना है ऐसी कोई बात नहीं है। यदि किसी को लगता है तो वह सीधे मेरे कार्यालय आकर शिकायत कर सकता है।
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शासन ने विभाग को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए सभी व्यवस्थाओं को ऑनलाइन तो कर दिया, लेकिन कुछ मामलों में कार्रवाई का अधिकार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सुपुर्द कर दिया।
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पड़ताल के दौरान आईटीआई मैदान पर बीते 31 जनवरी को छह चालक अभ्यर्थी, एक फरवरी को कोई नहीं आया था। जबकि शुक्रवार को मुश्किल से चार अथवा पांच अभ्यर्थियों की संख्या थी। छात्र नेता सिद्धांत सिंह करन ने बताया कि डीएल बनाने के नाम पर लंबे समय से खेल जारी है। इस संबंध में बीते दिनों पत्रक भी जिलाधिकारी को दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस संबंध में आरआई संतोष कुमार पटेल ने बताया कि प्रतिदिन 50 से 60 अभ्यर्थी आते हैं, जो समय से नहीं पहुंचते हैं, वे दुबारा जांच के लिए आनलॉइन समय लेते हैं। वहीं, एआरटीओे सौम्या पांडेय का कहना है ऐसी कोई बात नहीं है। यदि किसी को लगता है तो वह सीधे मेरे कार्यालय आकर शिकायत कर सकता है।
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