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जलस्तर में वृद्धि से कईं तटवर्ती गांवों के लोगों में हड़कंप
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नदी जलस्तर: उचौरी गांव के पास खेतों और बागीचों में प्रवेश करता गांगी का पानी।
- फोटो : GHAZIPUR
संवाद न्यूज एजेंसीभीमापार। गोमती नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से कईं तटवर्ती गांवों के लोगों में अफरा-तपुरी मची हुई है। कई छोटी-छोटी नदियों, दर्जनों कैनालों और सैकड़ों नालों के अलावा बरसात के पानी से गोमती नदी पूरी भरी पड़ी है। यही कारण है कि गोमती नदी का पानी अपने किनारों को लांघकर अब गांवों के बाहर खड़ी फसलों को डुबोने लगा है। लोग बीते कई वर्षों से आ रही बाढ़ की विभीषका को याद कर सिहर उठे हैं।
नेवादा गांव से प्रवेेश करने वाली गोमती ने भी अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। नदी का पानी खानपुर, भुजाड़ी, बहुरा, तेतारपुर, गौरहट, गौरी, नुरदीपुर, अमेहता, सिधौना, खरौना, कुसही, हथौड़ा के बाद पटना गांव में मोक्षदायिनी गंगा में विलीन हो जाता है। पीलीभीत की तराई में स्थित गोमत ताल से निकलने वाली गोमती नदी के नौ सौ किलोमीटर के सफर में कई नाला और कैनाल का पानी प्रवेश करने लगा है। जौनपुर में अपनी आधा दर्जन सहायक नदियों का पानी लेकर सईं नदी का पानी गोमती में प्रवेश करता है। तब इसी गोमती नदी में उफान सा आ जाता है। इसके बाद मूसलधार बारिश का पानी गोमती में मिलकर उसे बाढ़ का रूप दे देता है। इलाके में बहने वाली गांगी नदी के किनारे पर बसे उचौरी, भुवरपुर, भीमापार, दौलतपुर, सोनियापार, कूढ़ालंबी, नायकडीह, मौधा, मकरसन, सोनरान, नसीरपुर, अनौनी, इटहां, चिलौनाकला आदि गांवों के लोगों की नींद उड़ी हुई है।
सेमरा में कटान रोकने की कवायद तेज
संवाद न्यूज एजेंसी
मुहम्मदाबाद। गंगा के बढ़ रहे जलस्तर से क्षेत्र के सेमरा-शिवराय का पुरा गांव के पूरब राम तुलाई साधु राय के डेरा के आगे कटान की संभावना को देखते हुए सिंचाई विभाग की ओर से रोक की कवायद तेज कर दी गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर कटान को रोकने के लिए सेमरा में साधु राय के डेरा एवं उसके आगे छह सौ मीटर बोल्डर पिचिंग बनाने की कार्ययोजना बनाकर काम शुरू कराया गया। विलंब से तथा धीमी गति से काम होने से अभी बालू की बोरी डालने आदि का कार्य पूरी तरह से नहीं हो सका है। जलस्तर बढ़ जाने से निर्माण कार्य भी पूरी तरह से ठप पड़ गया। करीब पांच दिन पहले जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य ने गंगा तट पर पहुंचकर जलस्तर बढ़ने पर आने वाली खतरनाक स्थिति से निबटने के लिए सिंचाई विभाग देवकली पंप नहर के अधिशासी अधिकारी राजेश कुमार शर्मा को निर्देशित किया था। उन्होंने कटान से बचाव के लिए तत्काल बांस के कैरेट बनाकर उसमें बालू भरी बोली डलवाने को कहा था। विभाग की ओर से कैरेट में बालू भरी बोरी डालकर किनारे डालने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
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नेवादा गांव से प्रवेेश करने वाली गोमती ने भी अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। नदी का पानी खानपुर, भुजाड़ी, बहुरा, तेतारपुर, गौरहट, गौरी, नुरदीपुर, अमेहता, सिधौना, खरौना, कुसही, हथौड़ा के बाद पटना गांव में मोक्षदायिनी गंगा में विलीन हो जाता है। पीलीभीत की तराई में स्थित गोमत ताल से निकलने वाली गोमती नदी के नौ सौ किलोमीटर के सफर में कई नाला और कैनाल का पानी प्रवेश करने लगा है। जौनपुर में अपनी आधा दर्जन सहायक नदियों का पानी लेकर सईं नदी का पानी गोमती में प्रवेश करता है। तब इसी गोमती नदी में उफान सा आ जाता है। इसके बाद मूसलधार बारिश का पानी गोमती में मिलकर उसे बाढ़ का रूप दे देता है। इलाके में बहने वाली गांगी नदी के किनारे पर बसे उचौरी, भुवरपुर, भीमापार, दौलतपुर, सोनियापार, कूढ़ालंबी, नायकडीह, मौधा, मकरसन, सोनरान, नसीरपुर, अनौनी, इटहां, चिलौनाकला आदि गांवों के लोगों की नींद उड़ी हुई है।
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सेमरा में कटान रोकने की कवायद तेज
संवाद न्यूज एजेंसी
मुहम्मदाबाद। गंगा के बढ़ रहे जलस्तर से क्षेत्र के सेमरा-शिवराय का पुरा गांव के पूरब राम तुलाई साधु राय के डेरा के आगे कटान की संभावना को देखते हुए सिंचाई विभाग की ओर से रोक की कवायद तेज कर दी गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर कटान को रोकने के लिए सेमरा में साधु राय के डेरा एवं उसके आगे छह सौ मीटर बोल्डर पिचिंग बनाने की कार्ययोजना बनाकर काम शुरू कराया गया। विलंब से तथा धीमी गति से काम होने से अभी बालू की बोरी डालने आदि का कार्य पूरी तरह से नहीं हो सका है। जलस्तर बढ़ जाने से निर्माण कार्य भी पूरी तरह से ठप पड़ गया। करीब पांच दिन पहले जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य ने गंगा तट पर पहुंचकर जलस्तर बढ़ने पर आने वाली खतरनाक स्थिति से निबटने के लिए सिंचाई विभाग देवकली पंप नहर के अधिशासी अधिकारी राजेश कुमार शर्मा को निर्देशित किया था। उन्होंने कटान से बचाव के लिए तत्काल बांस के कैरेट बनाकर उसमें बालू भरी बोली डलवाने को कहा था। विभाग की ओर से कैरेट में बालू भरी बोरी डालकर किनारे डालने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
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