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Ghazipur News: डायलिसिस की मशीनों को लग रहा बिजली का झटका
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मेडिकल कॉलेज स्थित डायलिसिस युनिट। संवाद
गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के 200 बेड वाले पुरुष अस्पताल के सबसे ऊपरी तल पर स्थित डायलिसिस यूनिट में हर 15 से 20 मिनट पर बिजली ट्रिपिंग का असर मशीनों पर पड़ रहा है। बार-बार बिजली जाने से मशीनों का सॉफ्टवेयर क्रैश हो जाता है। इसका असर डायलिसिस की संख्या पर भी पड़ रहा है। प्रतिदिन 60 मरीजों के डायलिसिस के निर्देश के बावजूद 35 से 40 मरीजों का ही डायलिसिस हो रहा है। यूनिट 20 डायलिसिस मशीनों से लैस है। इससे जिले के अलावा आसपास के जनपदों के मरीज भी लाभान्वित हो रहे हैं। वर्तमान में 85 मरीज इस यूनिट पर डायलिसिस के लिए निर्भर हैं। यूनिट में तीन बेड और मशीनें हेपेटाइटिस व एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों से संबंधित मरीजों के लिए सुरक्षित रखी गई हैं। मौजूदा समय में ऐसे 11 मरीज पंजीकृत हैं, जो समय-समय पर यहां पहुंचकर डायलिसिस कराते हैं।
निर्बाध बिजली आपूर्ति नहीं मिलने और बार-बार ट्रिपिंग होने से मशीनों पर असर पड़ता है। सॉफ्टवेयर क्रैश होने पर यूनिट में तैनात कर्मचारियों को नया सॉफ्टवेयर डालने के साथ मशीन का टाइमर भी सेट करना पड़ता है।
नए मरीजों को ढाई घंटे, पुराने मरीजों को लगते हैं चार घंटे
डायलिसिस यूनिट में पहुंचने वाले नए मरीजों की प्रक्रिया में करीब ढाई घंटे लगते हैं। इस दौरान यूनिट की टीम मरीज के शरीर की हर गतिविधि पर नजर रखती है। वहीं, पुराने मरीजों के डायलिसिस में करीब चार घंटे का समय लगता है। जिन मरीजों के पास समय कम होता है, उनका डायलिसिस तीन घंटे में ही किया जाता है।
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बिजली ट्रिपिंग से मशीनों पर पड़ रहा असर
यहां बिजली ट्रिपिंग की काफी समस्या है। ऐसे में डायलिसिस मशीनों पर असर पड़ता है। कभी-कभी सॉफ्टवेयर क्रैश हो जाता है। ऐसी स्थिति में नया सॉफ्टवेयर डालना पड़ता है। बिजली आपूर्ति निर्बाध रहे तो प्रतिदिन 60 मरीजों का डायलिसिस आसानी से हो सकेगा। - शीर्षेंदु पांडेय, मैनेजर, डायलिसिस यूनिट
24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए लिखा गया पत्र
200 बेड के पुरुष अस्पताल में 24 घंटे बिजली की व्यवस्था नहीं है। हालांकि, 300 बेड वाले नवनिर्मित अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे बिजली की व्यवस्था है। 200 बेड वाले पुरुष अस्पताल में भी 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए बिजली निगम और जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। - प्रो. आनंद मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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निर्बाध बिजली आपूर्ति नहीं मिलने और बार-बार ट्रिपिंग होने से मशीनों पर असर पड़ता है। सॉफ्टवेयर क्रैश होने पर यूनिट में तैनात कर्मचारियों को नया सॉफ्टवेयर डालने के साथ मशीन का टाइमर भी सेट करना पड़ता है।
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नए मरीजों को ढाई घंटे, पुराने मरीजों को लगते हैं चार घंटे
डायलिसिस यूनिट में पहुंचने वाले नए मरीजों की प्रक्रिया में करीब ढाई घंटे लगते हैं। इस दौरान यूनिट की टीम मरीज के शरीर की हर गतिविधि पर नजर रखती है। वहीं, पुराने मरीजों के डायलिसिस में करीब चार घंटे का समय लगता है। जिन मरीजों के पास समय कम होता है, उनका डायलिसिस तीन घंटे में ही किया जाता है।
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बिजली ट्रिपिंग से मशीनों पर पड़ रहा असर
यहां बिजली ट्रिपिंग की काफी समस्या है। ऐसे में डायलिसिस मशीनों पर असर पड़ता है। कभी-कभी सॉफ्टवेयर क्रैश हो जाता है। ऐसी स्थिति में नया सॉफ्टवेयर डालना पड़ता है। बिजली आपूर्ति निर्बाध रहे तो प्रतिदिन 60 मरीजों का डायलिसिस आसानी से हो सकेगा। - शीर्षेंदु पांडेय, मैनेजर, डायलिसिस यूनिट
24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए लिखा गया पत्र
200 बेड के पुरुष अस्पताल में 24 घंटे बिजली की व्यवस्था नहीं है। हालांकि, 300 बेड वाले नवनिर्मित अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे बिजली की व्यवस्था है। 200 बेड वाले पुरुष अस्पताल में भी 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए बिजली निगम और जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। - प्रो. आनंद मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज