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Ghazipur News: श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर रखा एकादशी का सबसे कठोर व्रत

Fri, 26 Jun 2026 12:34 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 12:34 AM IST
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Devotees observed the strictest Ekadashi fast after bathing in the Ganges.
जमानिया नगर के बलूआ घाट पर स्नान करते श्रद्धालू। संवाद
सुहवल। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर बृहस्पतिवार को तड़के से ही क्षेत्र के विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सूर्योदय से पहले ही हजारों की संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे गंगा तट पर पहुंचने लगे। गंगा स्नान के लिए उमड़ी भीड़ इतनी अधिक थी कि घाटों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची।
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श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया तथा अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगल की कामना की। स्नान के उपरांत श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन-पूजन, वट वृक्ष की परिक्रमा, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों में जुट गए। शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।
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झारखंडेय महादेव मंदिर के महंत प्रेम प्रकाश पांडेय ने बताया कि सनातन परंपरा में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, उपवास और दान करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि गंगा स्नान आत्मिक शांति प्रदान करता है तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। निर्जला एकादशी का व्रत कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें पूरे दिन अन्न तो दूर, जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं की जाती। इसी कारण इसे सभी एकादशियों में सबसे कठोर और सर्वाधिक फलदायी व्रत माना गया है। इस दिन जलदान, अन्नदान, वस्त्रदान और पंखा, छाता आदि दान करने की भी विशेष परंपरा है।
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ये है मान्यता
महंत ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। कथा के अनुसार महाभारत काल में पांडवों में सबसे बलशाली भीमसेन अत्यधिक भोजन करते थे और नियमित रूप से एकादशी का उपवास नहीं कर पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जल रहकर व्रत करने की सलाह दी। मान्यता है कि इस एक दिन का कठोर व्रत करने से वर्ष की सभी 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। तभी से यह एकादशी भीमसेनी या निर्जला एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हुई। सनातन धर्म में वर्ष भर आने वाली 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा, गंगा स्नान, व्रत और दान करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा भक्त को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जमानिया। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर गुरुवार को नगर स्थित जमदग्नि ऋषि घाट (बलुआ घाट) पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों एवं पड़ोसी राज्य बिहार से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। जाम की आशंका को देखते हुए ब्लॉक तिराहा मोड़ पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। इसके अलावा बाजार क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण के लिए दोपहिया वाहनों की आवाजाही भी सीमित कर दी गई थी।

जमानिया नगर के बलूआ घाट पर स्नान करते श्रद्धालू। संवाद

जमानिया नगर के बलूआ घाट पर स्नान करते श्रद्धालू। संवाद

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