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जिला अस्पताल में नहीं बना डेंगू वार्ड, तैयारियां भी नाकाफी
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गाजीपुर। बरसात के मौसम में संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है लेकिन अभी तक जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड नहीं बनाया जा सका है। यही नहीं डेंगू, मलेरिया एवं संक्रामक रोगों से निपटने की तैयारी भी नाकाफी है। नगर में नपा एवं ग्रामीण इलाकों में डीपीआरओ कार्यालय की ओर से नालियों में फागिंग एवं दवा छिड़काव का दावा तो किया जाता है, लेकिन हकीकत कुछ अलग है। स्वास्थ्य विभाग कोरोना संक्रमण काल का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ ले रहा है। स्थिति तो यह है कि जब साधारण बीमारियों के उपचार के लिए यहां दवा एवं एंटीबायोटिक इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों का उपचार कैसे होगा, यह सवाल उठ खड़ा हुआ है। जिले को दो माह तक कोरोना संक्रमण ने ऐसा चपेट में लिया था कि रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग संक्रमित पाए जा रहे थे। यही नहीं कई लोगों की जान चली गई थी। स्वास्थ्य महकमा कोरोना संक्रमण से पीड़ित मरीजों के उपचार को लेकर परेशान था। वहीं अन्य बीमारियों से निपटने को लेकर सभी तैयारी धरी की धरी रह गई थी। संक्रमण कम होने के बाद जब सामान्य तौर पर सरकारी अस्पतालों का संचालन शुरू हुआ तो डेंगू, मलेरिया एवं संक्रामक बीमारियों से बचाव को लेकर दवा छिड़काव एवं एहतियात बरतने का निर्देश शासन की ओर से दिया गया था। बावजूद इसके जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड तो नहीं बनाया गया और न ही इससे निपटने को लेकर कोई तैयारी ही गई। दवा छिड़काव एवं फागिंग का कार्य नपा द्वारा नगर पालिका क्षेत्रों में किया गया लेकिन ग्रामीण इलाकों की स्थिति तो काफी बदतर है। यहां अब तक न तो दवा का छिड़काव हो सका है और न ही फागिंग ही कराई गई है। ऐसे में इन बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है।
सीएचसी, पीएचसी पर नहीं है कोई व्यवस्था
ग्रामीण इलाकों में स्थापित सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डेंगू, मलेरिया समेत अन्य संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों का उपचार तो दूर जांच की भी कोई व्यवस्था नहीं है। स्थिति तो यह है कि इन केंद्रों पर सिर्फ दर्द एवं बुखार की ही दवा मिल पाती है। यही नहीं साधारण जांच तक नहीं होने से मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है।
कोरोना संक्रमण के चलते जिला अस्पताल को कोविड अस्पताल में परिवर्तित किया गया था। ऐसे में स्थिति सामान्य होने पर जल्द ही दस बेड का डेंगू वार्ड बनाया जाएगा। दवा एवं जांच की पूरी व्यवस्था होगी। - डॉ. राजेश सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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सीएचसी, पीएचसी पर नहीं है कोई व्यवस्था
ग्रामीण इलाकों में स्थापित सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डेंगू, मलेरिया समेत अन्य संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों का उपचार तो दूर जांच की भी कोई व्यवस्था नहीं है। स्थिति तो यह है कि इन केंद्रों पर सिर्फ दर्द एवं बुखार की ही दवा मिल पाती है। यही नहीं साधारण जांच तक नहीं होने से मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है।
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कोरोना संक्रमण के चलते जिला अस्पताल को कोविड अस्पताल में परिवर्तित किया गया था। ऐसे में स्थिति सामान्य होने पर जल्द ही दस बेड का डेंगू वार्ड बनाया जाएगा। दवा एवं जांच की पूरी व्यवस्था होगी। - डॉ. राजेश सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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