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Ghazipur News: पछुआ हवा से मुरझाई फसल, महंगी होने लगीं सब्जियां
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गाजीपुर। पछुआ हवा से तेज हुई गर्मी की मार से सब्जी की फसल मुरझाने लगी है। इसका असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। खेतों में सब्जी की पैदावार कम हुई तो मंडी की आवक भी कम हो गई। इस कारण सब्जी महंगी होने लगी है। हालांकि, लगन समाप्त होने पर दाम में कुछ गिरावट की संभावना है। पिछले एक हफ्ते में अधिकांश सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी हुई है। जिस वजह से लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
खेतों में सब्जियों की पैदावार कम हुई है। इस कारण सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। एक सप्ताह में सब्जियों के दाम में वृद्धि हुई है। गर्मी बढ़ने से किसान भी परेशान हैं, क्योंकि उनके सिंचाई के खर्चे बढ़ गए हैं। बारा गांव निवासी मंटू साहनी ने बताया कि सब्जी के खेतों में हर तीसरे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है, इसके बावजूद गर्मी से फूल मर जा रहे हैं। गर्मी बढ़ते ही खेतों में पैदावार एक तिहाई कम हो गई है, जबकि नेनुआ, खीरा की लताएं पलट जा रही हैं। सब्जियों के दाम कुछ बढ़े हैं, बावजूद इसके किसान नुकसान में हैं। बारा सब्जी मंडी के व्यापारी मोती कुशवाहा ने बताया कि मंडी में सब्जियां महंगी हो गई हैं। मंडी में सब्जी कम आ रही है। सब्जी व्यापारी बबलू राईन ने बताया कि थोक मंडी में सब्जियों के दाम 10-15 रुपये किलो बढ़े हैं, लेकिन फुटकर दुकानों में 20 से 30 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। वहीं, सब्जी विक्रेता पवन का कहना है कि तापमान बढ़ने और शादियों का समय होने से लोग ज्यादा मात्रा में हरी सब्जियां ले जा रहे हैं, लेकिन बाजार में सीमित मात्रा में हरी सब्जियां आ रही है।
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बोली गृहणियां- बढ़ रहा अत्यधिक आर्थिक बोझ
गृहिणी नीतू वर्मा कहती हैं कि हरी सब्जियों के दाम बढ़ने से हमें बाजार से महंगी सब्जी लाना पड़ रहा है, जिससे की हम पर अत्यधिक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
गृहिणी शशि कला देवी का कहना है कि आलू दिनों-दिनों महंगा होता जा रहा है। जिससे हमेें हरी सब्जियों की तरफ जाना पड़ रहा है, और हरी सब्जियां लगातार महंगी होती जा रही है।
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एक सप्ताह में बढ़े दाम (प्रति किलो)
सब्जी अब पहले
आलू-28-26
लौकी - 35-30
चुकंदर-40-30
पालक-40-30
प्याज-40-35
बैगन- 40-35
भिंडी- 50-40
मिर्चा-60-60
परवल-80-75
अदरख-200-160
लहसून-280-260
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खेतों में सब्जियों की पैदावार कम हुई है। इस कारण सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। एक सप्ताह में सब्जियों के दाम में वृद्धि हुई है। गर्मी बढ़ने से किसान भी परेशान हैं, क्योंकि उनके सिंचाई के खर्चे बढ़ गए हैं। बारा गांव निवासी मंटू साहनी ने बताया कि सब्जी के खेतों में हर तीसरे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है, इसके बावजूद गर्मी से फूल मर जा रहे हैं। गर्मी बढ़ते ही खेतों में पैदावार एक तिहाई कम हो गई है, जबकि नेनुआ, खीरा की लताएं पलट जा रही हैं। सब्जियों के दाम कुछ बढ़े हैं, बावजूद इसके किसान नुकसान में हैं। बारा सब्जी मंडी के व्यापारी मोती कुशवाहा ने बताया कि मंडी में सब्जियां महंगी हो गई हैं। मंडी में सब्जी कम आ रही है। सब्जी व्यापारी बबलू राईन ने बताया कि थोक मंडी में सब्जियों के दाम 10-15 रुपये किलो बढ़े हैं, लेकिन फुटकर दुकानों में 20 से 30 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। वहीं, सब्जी विक्रेता पवन का कहना है कि तापमान बढ़ने और शादियों का समय होने से लोग ज्यादा मात्रा में हरी सब्जियां ले जा रहे हैं, लेकिन बाजार में सीमित मात्रा में हरी सब्जियां आ रही है।
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बोली गृहणियां- बढ़ रहा अत्यधिक आर्थिक बोझ
गृहिणी नीतू वर्मा कहती हैं कि हरी सब्जियों के दाम बढ़ने से हमें बाजार से महंगी सब्जी लाना पड़ रहा है, जिससे की हम पर अत्यधिक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
गृहिणी शशि कला देवी का कहना है कि आलू दिनों-दिनों महंगा होता जा रहा है। जिससे हमेें हरी सब्जियों की तरफ जाना पड़ रहा है, और हरी सब्जियां लगातार महंगी होती जा रही है।
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एक सप्ताह में बढ़े दाम (प्रति किलो)
सब्जी अब पहले
आलू-28-26
लौकी - 35-30
चुकंदर-40-30
पालक-40-30
प्याज-40-35
बैगन- 40-35
भिंडी- 50-40
मिर्चा-60-60
परवल-80-75
अदरख-200-160
लहसून-280-260